उत्तर प्रदेश, राजनीति

बरेली नगर निगम ने तोड़ा ‘अनन्या किचन’, मेयर का आश्‍वासन- नुकसान की भरपाई करेंगे

बरेली नगर निगम ने तोड़ा ‘अनन्या किचन’, मेयर का आश्‍वासन- नुकसान की भरपाई करेंगे

बरेली: सिविल लाइंस में जेल रोड पर किराए के कमरे में रहने वाली 24 वर्षीय अनन्या पांडे ने करीब 6 महीने पहले ‘अनन्या किचन’ नाम से फास्ट फूड का स्टॉल शुरू किया। चौकी चौराहा स्थित बटलर प्लाजा के सामने लगने वाले इस स्टॉल के स्वाद के लोग दीवाने हो गए। मगर, कुछ दिन पहले नगर निगम के अतिक्रमण प्रभारी सच्चिदानंद प्रवर्तन दल की टीम और बुलडोजर के साथ वहां पहुंचे और अनन्या के स्टॉल को तोड़ दिया।

अनन्‍या पांडे ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इंस्पायर होकर ‘अनन्या किचन’ शुरू किया था। मगर, नगर निगम की टीम ने मेरी अनुपस्थिति में मेरा किचन तोड़ दिया। निगम कर्मियों ने कहा कि अतिक्रण था। मेरा स्टॉल बीच में लगा था। मेरा ही हटाया गया, जबकि अन्य स्टॉलों को नहीं हटाया गया। इसके बाद अनन्या ने मेयर डॉ. उमेश गौतम से मदद मांगी तो उन्‍होंने आश्वासन दिया कि नुकसान की भरपाई की जाएगी। अनन्या को पहले से बेहतर स्टॉल बनवाकर दिया जाएगा।

कौन हैं अनन्या पांडे?

पीलीभीत के बीसलपुर तहसील के हबीबुल्ला खां शुमाली की रहने वाली अनन्या अपने परिवार में सबसे बड़ी हैं। उनके पिता विवेक पांडे को पैरालिसिस होने के कारण वे बेड पर हैं। जिससे उनकी नौकरी छूट गई। माता-पिता दोनों शिक्षा मित्र हैं। अनन्या ने बीबीए और डीएलएड करने के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उनकी छोटी बहन अंशिका ऑप्टोमेट्री का डिप्लोमा कर रही है और भाई अच्युत 9वीं में पढ़ता है। भाई-बहनों की पढ़ाई और बीमार पिता की देखभाल के लिए ही अनन्या ने यह स्टार्टअप शुरू किया था।

स्टॉल शुरू करने से पहले अनन्या ने बजाज फिंसर्व, फ्यूचर यूनिवर्सिटी और राजश्री मैनेजमेंट कॉलेज में नौकरियां कीं। इसी दौरान एक सड़क हादसे में उनके हाथ-पैर फ्रैक्चर हो गए। करीब एक साल तक बेड रेस्ट पर रहने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और ‘अनन्या किचन’ की नींव रखी। मगर, नगर निगम की इस कार्रवाई ने उन्हें एक बार फिर आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। मैंने अपनी सारी सेविंग (पौने दो लाख रुपये) उस स्टील के स्टॉल में लगाई थी।

मैंने चालान के पैसे दिए, मगर नहीं लिए

अनन्या का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनके साथ बदसलूकी की गई। उन्होंने बताया, “मैंने उनसे कहा कि आप मेरा चालान काट लीजिए, लेकिन मेरा स्टॉल उठाकर मत ले जाइए। इस पर प्रभारी और अधिक भड़क गए और 25 हजार की पर्ची काटने की धमकी दी। अनन्या के अनुसार, विरोध के बावजूद उनके सामने ही उनके स्वाभिमान और रोजगार के साधन को तोड़ दिया गया।

उन्‍होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एक अधिकारी ने मेरे साथ बदसलूकी की। मैं उसके खिलाफ कार्रवाई चाहती हूं। एक महिला चाहे सड़क पर स्टॉल लगाए या कहीं और उसकी भी अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट होती है। जब मेरा स्टॉल तोड़ा गया, मेरे हाथ कांप रहे थे। कुछ लोग इसे ‘फेम’ के लिए किया गया नाटक बता रहे हैं, लेकिन जिस पर बीतती है वही जानता है। यह फेम नहीं, अपने हक की लड़ाई है।

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