बंगाल में टूटी ममता की TMC, 58 विधायकों का अलग गुट; ऋतब्रत बनर्जी चुने गए नेता

बंगाल में टूटी ममता की TMC, 58 विधायकों का अलग गुट; ऋतब्रत बनर्जी चुने गए नेता

कोलकाता: ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) का 28 साल के इतिहास में पहली बार औपचारिक तौर पर विभाजन हो गया। बुधवार (03 जून) को 58 बागी विधायकों ने निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र सौंपा। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, स्पीकर ने मंजूरी दे दी है। उन्हें विधानसभा में नेता विपक्ष का रूम भी अलॉट कर दिया गया है। जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता जबकि अखरुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है।

ममता बनर्जी का नहीं आया बयान

ऋतब्रत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दो और विधायक हमारे साथ हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी विधानसभा स्पीकर और ममता बनर्जी का कोई बयान नहीं आया है। ममता के पास अब 22 विधायकों का समर्थन है। टीएमसी ने 294 सीटों में से 80 सीटें जीती थीं।

इसी बीच सीनियर लीडर कुणाल घोष ने बताया कि TMC MLA फिरहाद हकीम ने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब नेता विपक्ष के चयन से जुड़े प्रस्ताव पर फर्जी हस्ताक्षर का आरोप लगने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से बाहर कर दिया गया था।

ऋतब्रत बोले- अभिषेक से कोई संबंध नहीं

बागी गुट ने अपने पत्र में ममता बनर्जी को अब भी पार्टी अध्यक्ष बताया है, लेकिन अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व और विधायक दल से जुड़े फैसलों को मानने से इनकार किया है। उन्‍होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी से हमारी पार्टी और जनता का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। अगर संबंध होता तो वे 26 दिनों तक छिपे नहीं रहते बल्कि बाहर आते।

ऋतब्रत ने कहा, अभिषेक को चोरों की तरह पीटा गया है। पिटाई के बाद भी अभिषेक कह रहे थे कि उनकी सुरक्षा जनता करेगी। बता दें कि अभिषेक से दक्षिण सोनारपुर में शनिवार को मारपीट हुई थी। वे चुनावी हिंसा में मारे गए कार्यकर्ता के परिवार से मिलने गए थे।

संसदीय नियमों के मुताबिक, उनका गुट ही बंगाल विधानसभा में असली और मुख्य विपक्ष है। बागी गुट को 58 विधायकों का समर्थन है, जो दल-बदल कानून के तहत जरूरी दो-तिहाई संख्या से ज्यादा है।

ममता ने पार्टी कमेटियां भंग कीं

टीएमसी पार्टी के भीतर बगावत के बीच ममता बनर्जी ने बुधवार को राज्य की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी अब पूरे संगठन का पुनर्गठन करेगी।

ममता ने क्यों लिया फैसला?

  • विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ गया था।
  • निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों ने बगावत की।
  • पार्टी नेतृत्व संगठन में बड़े बदलाव कर जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करना चाहती है।

आगे क्या होगा?

  • जिला, ब्लॉक और अन्य स्तर की समितियों का नए सिरे से गठन किया जाएगा।
  • फ्रंटल संगठनों (युवा, छात्र, महिला, श्रमिक आदि) में भी बदलाव होंगे।
  • पार्टी नेतृत्व नए चेहरों और जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका दे सकता है।

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