मोहनलालगंज के मऊ गांव में बनेगा नया रजिस्ट्री कार्यालय, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

मोहनलालगंज के मऊ गांव में बनेगा नया रजिस्ट्री कार्यालय, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इनमें लखनऊ के मोहनलालगंज में उप निबंधक कार्यालय के भवन निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत ग्राम मऊ की 953 वर्गमीटर भूमि राजस्व विभाग से स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी।

प्रस्ताव के मुताबिक, मोहनलालगंज तहसील के ग्राम मऊ स्थित गाटा संख्या 1134 और 1137 की कुल 953 वर्गमीटर (0.0953 हेक्टेयर) भूमि उप निबंधक कार्यालय के निर्माण के लिए आवंटित की जाएगी। यह भूमि वर्तमान में राजस्व विभाग के पास है, जिसे स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा।

हर साल 50 लाख से अधिक दस्तावेजों का होता है पंजीकरण

स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग प्रदेश के प्रमुख राजस्व अर्जक विभागों में शामिल है और राजस्व संग्रह के मामले में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश के निबंधन कार्यालयों में हर वर्ष करीब 50 लाख दस्तावेजों का पंजीकरण होता है। इनमें भूमि और मकानों की रजिस्ट्री के अलावा विवाह पंजीकरण, किरायानामा, गिफ्ट डीड और मुख्तारनामा जैसे दस्तावेज शामिल हैं।

प्रस्तावित उप निबंधक कार्यालय में सब-रजिस्ट्रार कक्ष, रजिस्ट्रेशन कक्ष और अभिलेखागार के अलावा आम लोगों के लिए बड़ा प्रतीक्षालय, महिला और पुरुषों के लिए अलग शौचालय तथा पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य निबंधन संबंधी सेवाओं को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है।

जिलाधिकारी और महानिरीक्षक निबंधन ने भेजा था प्रस्ताव

जिलाधिकारी लखनऊ ने 02 अप्रैल, 2026 को शासन को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था। महानिरीक्षक निबंधन की 13 अप्रैल, 2026 की आख्या के आधार पर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब भवन निर्माण की दिशा में आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

18 शहरों में 1725 एसी इलेक्ट्रिक बसें चलाएगी योगी सरकार

कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य नगरीय परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और यात्री सुविधाओं के अनुरूप बनाना है। योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी तथा नोएडा (जेवर सहित) में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 एसी ई-बसों का संचालन किया जाएगा।

इन बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों द्वारा जीसीसी मॉडल पर किया जाएगा और अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन तिथि से 12 वर्ष होगी। जीसीसी मॉडल के अंतर्गत बसों की खरीद, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, चालक एवं तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता, बसों का संचालन और अनुरक्षण की पूरी जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी। निर्धारित मानकों के आधार पर उन्हें संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क का भुगतान किया जाएगा।

अनुदान भी दिया जाएगा

योजना के तहत 12 मीटर ई-बस पर 40 लाख रुपये तथा 9 मीटर ई-बस पर 35 लाख रुपये प्रति बस की दर से अनुदान भी दिया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक डिपो निर्माण हेतु भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। किराया एवं उपयोगकर्ता शुल्क का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इस योजना से सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित एवं समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

साथ ही निजी निवेश के माध्यम से सरकारी वित्तीय भार कम होगा तथा प्रदेश के शहरों में आधुनिक शहरी परिवहन तंत्र को नई मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि अभी 15 नगर निगमों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है।

आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए धनराशि स्वीकृत करने और व्यय संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से प्रदेश में आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नगरीय विकास को नई गति मिलेगी। प्रदेश सरकार द्वारा तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहरों के नियोजित विस्तार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई है।

योजना के संचालन के लिए 6 अप्रैल 2023 को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर नगरीय अवसंरचना विकसित करने में सुविधा मिलेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसी के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास हेतु संबंधित अभिकरणों को कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है। इसके सापेक्ष प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।

यूपी सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन को मंजूरी

योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। राज्य सरकार का मानना है कि बदलते औद्योगिक परिदृश्य, निवेशकों की आवश्यकताओं, अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा तथा भारत सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित करने के लिए नीति में संशोधन आवश्यक था।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 को 19 जनवरी 2024 को अधिसूचित किया गया था। यह नीति अधिसूचना की तिथि से 5 वर्षों तक प्रभावी रहेगी। संशोधन के माध्यम से नीति को और अधिक निवेशक अनुकूल बनाया गया है, जिससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित किए जा सकेंगे। इन संशोधनों से राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। नीति के तहत निवेशकों को परियोजना के वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तिथि से कम से कम 3 वर्षों तक उत्पादन संचालन बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी देनी होगी।

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