लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) अब एक्शन मोड में आ गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मकर संक्रांति के बाद संगठन में आमूल-चूल बदलाव यानी एक बड़ी ‘सर्जरी’ होने जा रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर पर फेरबदल की रूपरेखा तैयार कर ली है।
सपा नेतृत्व इस बार संगठन को अधिक समावेशी और सक्रिय बनाने पर जोर दे रहा है। इसके साथ ही जिन जिलाध्यक्षों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) और पार्टी के विरोध प्रदर्शनों में ढिलाई बरती है, उन्हें पद से हटाया जाएगा। पार्टी की रणनीति है कि जिन जातियों को विधानसभा टिकट नहीं मिल पा रहा है, उनके प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय और प्रदेश कमेटियों में अहम ओहदे देकर साधा जाए। जिलों में जिन जातियों को टिकट दिया जाएगा, संगठन की कमान उससे इतर प्रभावशाली जातियों के हाथों में सौंपी जाएगी ताकि संतुलित समीकरण बना रहे।
नई चाल चल रहे अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने चुनावी तैयारियों में बढ़त बनाने के लिए एक नई चाल चली है। एक-तिहाई से अधिक सीटों पर संभावित उम्मीदवारों को संकेत दे दिए गए हैं। पार्टी का मानना है कि जल्दी टिकट फाइनल होने से प्रत्याशियों को बूथ स्तर पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। घोषित किए जा रहे संभावित उम्मीदवारों को मतदाता सूची दुरुस्त करने और अपने क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, 14 जनवरी के बाद संगठन की नई सूचियां जारी होनी शुरू हो जाएंगी। यह बदलाव न केवल चुनावी समीकरणों को फिट करने के लिए है, बल्कि पार्टी के भीतर नई ऊर्जा भरने का भी प्रयास है।