सुप्रीम कोर्ट बोला- कुत्ते के काटने पर मुआवजा तय होगा, जो आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित, वे अपने घर ले जाएं
नई दिल्ली: आवारा कुत्तों के हमलों पर देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी) को सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बच्चों या बुजुर्गों को कुत्तों के काटने, चोट लगने या मौत के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले 5 सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया।
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है, तो इन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते। ये कुत्ते सड़कों पर क्यों घूमते रहें, लोगों को काटें और डराएं। उन्हें हम ऐसे ही नहीं छोड़ सकते।’
20 जनवरी को होगी सुनवाई
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा, ‘कुत्तों में एक खास तरह का वायरस होता है, जिसका कोई इलाज नहीं है। अब तक चार दिन की सुनवाई में इमोशन सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिख रही है। जब कुत्ते 9 साल के बच्चे पर हमला करते हैं तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या हम इसपर आंखें मूंद लें।’ इस मामले में अब अगली सुनवाई 20 जनवरी को दोपहर 2 बजे से होगी।
अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण समस्या 1000 गुना बढ़ी: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में दो एनिमल ट्रस्ट का पक्ष रखते हुए एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कहा- यह एक इमोशनल मामला है। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा- अब तक तो ऐसा लगता है कि इमोशन सिर्फ कुत्तों के लिए ही हैं। गुरुस्वामी ने कहा- ऐसा नहीं है। मैं इंसानों के बारे में भी उतनी ही चिंतित हूं।
जस्टिस मेहता ने कहा- शुक्र है! आप सभी हमें अधिकारियों से सवाल करने की इजाजत दें, ताकि हम प्रक्रिया शुरू कर सकें। सभी एक ही बात दोहरा रहे हैं। हमें आदेश पारित करने दें। हमें अधिकारियों से जवाब लेने में आधा दिन लग जाता है। उनकी निष्क्रियता के कारण समस्या 1000 गुना बढ़ गई है। यह एक अदालती कार्यवाही के बजाय एक सार्वजनिक मंच बन गया है।
कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए
जस्टिस नाथ ने कहा- हम बच्चों या बुजुर्गों को कुत्ते के काटने से होने वाली हर मौत या हमले के लिए, राज्य सरकार पर भारी मुआवजा तय करेंगे। सरकार कुछ नहीं कर रही है। साथ ही, उन लोगों पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए जो कह रहे हैं कि हम कुत्तों को खाना खिला रहे हैं। ऐसा करो, उन्हें अपने घर ले जाओ। कुत्ते इधर-उधर गंदगी क्यों फैलाएं, काटें और लोगों को डराएं?
एडवोकेट गुरुस्वामी बोलीं– क्रूरता गलत, लेकिन इंसान करुणा नहीं छोड़ सकता
एडवोकेट गुरुस्वामी ने कहा- कुत्तों को मारना और नसबंदी करना दोनों ही कारगर नहीं हैं। जब हम किसी प्रजाति को विलुप्त करने की बात करते हैं, तो हम अपने साथ भी कुछ गलत कर रहे होते हैं। हम करुणा नहीं छोड़ रह सकते। कोई भी तर्क क्रूरता और पशुओं को मारने को जायज नहीं ठहराता।
सुप्रीम कोर्ट बोला– पालतू जानवर रखना चाहते हैं, तो लाइसेंस लें
जस्टिस मेहता ने कहा- अगर कोई आवारा कुत्ता किसी पर हमला कर दे तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इस पर वकील ने कहा- स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए जिम्मेदारी तय की जा सकती है। जस्टिस मेहता ने कहा- आवारा कुत्ता किसी के कब्जे में नहीं होना चाहिए। अगर आप पालतू जानवर रखना चाहते हैं, तो लाइसेंस लें।
महिला वकील बोली– सड़कों से बच्चों को हटाना चाहिए, कुत्तों को नहीं
एक अन्य महिला वकील ने अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा- जब रेलवे स्टेशन पर एक छोटी बच्ची के बगल में कोई आवारा कुत्ता सो रहा होता है, तो उसके साथ रेप नहीं होगा। एक महिला होने के नाते, मुझे दिल्ली में उन कुत्तों के साथ चलने में सुरक्षित महसूस होता है। अगर मुझ पर कोई हमला करेगा, तो वे भौंकेंगे।
वकील ने आगे कहा- जब किसी शेल्टर होम में कोई कुत्ता बीमार पड़ जाता है, तो उनमें से जो वायरस पैदा होते हैं, उनपर दवाओं का असर नहीं होगा। मुझे बुरा लगता है जब RWA कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने के लिए और अधिक फंड की मांग करते हैं। सबसे पहले बच्चों को सड़कों से हटाना होगा, कुत्तों को नहीं। बच्चों को शेल्टर होम की ज्यादा जरूरत है।
वकील ने कहा- मैं एक 80 साल की महिला का प्रतिनिधित्व कर रही हूं जो सड़क पर रहती है। वह 200 कुत्तों की देखभाल करती है। दिल्ली में उन्हें ‘डॉग अम्मा’ के नाम से जाना जाता है। कुत्तों गोद लेने की पॉलिसी पर विचार किया जाना चाहिए। एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया जा सकता है। यहां कई वकील हैं जिनके घर में 8-10 देसी कुत्ते हैं।
जस्टिस मेहता बोले– अब तक इंसानों के लिए इतनी लंबी बहस नहीं देखी
जस्टिस संदीप मेहता ने महिला वकील की दलील पर कहा- क्या आप सच में ऐसा कह रही हैं? एक वकील ने अभी-अभी हमें सड़कों पर रहने वाले अनाथ बच्चों के आंकड़े दिखाए। शायद कुछ वकील उन बच्चों को गोद लेने की पैरवी कर सकते हैं।
जस्टिस मेहता ने कहा- 2011 में प्रमोशन के बाद से मैंने इतनी लंबी बहसें कभी नहीं सुनीं। और अब तक किसी ने भी इंसानों के लिए इतनी लंबी बहस नहीं की है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने आज की सुनवाई खत्म कर दी। अब 20 जनवरी को दोपहर 2 बजे से अगली सुनवाई होगी।



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