SRMS गुडलाइफ हॉस्पिटल की उपलब्धि, किया पहला फुली ऑटोमेटेड रोबोटिक नी ट्रांसप्लांट

SRMS गुडलाइफ हॉस्पिटल की उपलब्धि, किया पहला फुली ऑटोमेटेड रोबोटिक नी ट्रांसप्लांट

बरेली: रोबोट की मदद से घुटना प्रत्यारोपण होने के साथ एसआरएमएस गुडलाइफ हॉस्पिटल आज (शुक्रवार) रुहेलखंड और कुमायूं रीजन का पहला फुली ऑटोमेटेड रोबोटिक नी ट्रांसप्लांट सेंटर बन गया। यह उपलब्धि आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. ध्रुव गोयल ने एसआरएमएस गुडलाइफ के नाम की। एसआरएमएस ट्रस्ट के चेयरमैन देव मूर्ति इसे बड़ी सफलता बताया और मरीजों की सेवा के लिए एसआरएमएस ट्रस्ट के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि एसआरएमए ट्रस्ट हमेशा से मरीजों के उपचार के लिए अत्याधुनिक तकनीकी और उपकरणों पर जोर देता आया है। गुणवत्तापूर्ण इलाज में अत्याधुनिक तकनीकी और उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अंतत: इसका मरीजों को मिलता है, जो उन्हें शीघ्र स्वस्थ करने में मदद करता है। फुली ऑटोमेटेड रोबोटिक नी ट्रांसप्लांट सेंटर होने से हम मरीजों के घुटनों का बेहतर उपचार कर उन्हें यथाशीघ्र स्वस्थ कर पाएंगे।

6500 से ज्यादा सफल घुटना प्रत्यारोपण का अनुभव रखने वाले डॉ. ध्रुव गोयल ने बताया कि आज हमने बरेली निवासी 70 वर्ष की महिला के दोनों घुटनों का फुली ऑटोमेटेड ट्रांसप्लांट किया। सफल ट्रांसप्लांट से उन्हें वर्षों के दर्द से आजादी मिली। अभी तक घुटनों का प्रत्यारोपण पारंपरिक विधि से किया जाता था, जिसमें काफी समय लगने के साथ ही रिकवरी में भी काफी दिन लगते थे। अत्याधुनिक फुली ऑटोमेटेड रोबोटिक नी ट्रांसप्लांट तकनीकी से रोबोट के माध्यम से थ्री डायमेंशन से सर्जरी करना संभव है। इसमें दोनों घुटनों का एलाइनमेंट कंप्यूटर से किया जाता है।

SRMS गुडलाइफ हॉस्पिटल की उपलब्धि, किया पहला फुली ऑटोमेटेड रोबोटिक नी ट्रांसप्लांट

हजारों मरीजों को मिलेगा फायदा

डॉ. ध्रुव गोयल ने बताया कि मरीज को दिक्कत बेहद कम होती है और घुटनों की लाइफ बढ़ने के साथ ही मरीज के पैर भी सीधे रहते हैं। अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी से सटीक ऑपरेशन होता है, कम रक्तस्राव, तेज रिकवरी, जल्द सामान्य जीवन, कम दवाई का सेवन जैसे लाभ मरीज मिलते हैं। अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी अभी तक बरेली और कुमायूं में उपलब्ध नहीं थी। गुडलाइफ में आज पहला फुली ऑटोमेटेड रोबोटिक नी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक होने से हजारों मरीजों को इसका फायदा मिलेगा।

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