संसद में गरजे सपा सांसद, बोले- वंदे मातरम के साथ-साथ बुनियादी मुद्दों पर भी चर्चा जरूरी

Bareilly: नीरज मौर्य का आरोप- जनसमस्याओं के निराकरण में सरकार फेल
  • संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान नीरज मौर्य ने किसानों-नौजवानों के मुद्दों को उठाया

Parliament Winter Session 2025: राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में संसद में शीतकालीन सत्र के दौरान विशेष चर्चा हुई। इस विशेष चर्चा में आंवला सांसद नीरज मौर्य (समाजवादी पार्टी) भी शामिल हुए। उन्होंने बंकिम दा को नमन करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय गीत 150 साल से देश के कोने कोने में लोगों के हृदय में वास कर रहा है। उन्होंने वंदे मातरम में वर्णित सुजल भूमि, सुफल भूमि और मलय पर्वत की ठंडी हवाओं, लहलहा फसलों से ढकी जननी की कल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अन्नदाता ऋण के बोझ से दबा और परेशान है। किसानों की आत्महत्या की घटनाएं मन को आहत करती हैं। सांसद ने कहा कि गीत में जिन पहाड़ों की कल्पना की गई है, आज वहां तरह तरह की त्रासदियां और प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल रही हैं, इसलिए सरकार को चाहिए कि ऐसे हादसों से देश को बचाने के लिए ठोस रोड मैप तैयार करे।

11 सालों में न एक विकसित गांव बन पाया है और न ही एक स्मार्ट सिटी

सांसद ने कहा, आज देश के करीब 70 प्रतिशत लोगों को स्वच्छ जल नहीं मिल रहा, जबकि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई हर घर नल से जल योजना में भ्रष्टाचार की दीमक लग गई है और इस पर भी सदन में गंभीर चर्चा कराकर इसे ज़मीन पर सही रूप में लागू किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को स्वच्छ जल मिल सके। नीरज मौर्य ने अपने संबोधन में नौजवानों को रोजगार न मिलने, नई पीढ़ी को शिक्षा और चिकित्सा न मिल पाने तथा मूलभूत सुविधाओं से वंचित किए जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा की 2047 तक विकसित भारत बनाने की बात कही जाती है, जब स्थिति यह है कि इन 11 सालों में न एक विकसित गांव बन पाया है और न ही एक स्मार्ट सिटी। वंदे मातरम पर चर्चा के साथ साथ इन बुनियादी मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार करना समय की मांग है।

 

Post Comment

You May Have Missed