राम मंदिर चढ़ावा मामले में हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाएं खारिज, तीनों एक साथ रद्द
अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर दाखिल तीन जनहित याचिकाओं पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई करने से इनकार कर दिया। पहली याचिका अधिवक्ता मोहित अशोक, दूसरी अधिवक्ता मोतीलाल यादव और तीसरी एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने तीनों याचिकाओं को एकसाथ जोड़कर सुनवाई करने को कहा था।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे में अनियमितताएं हुई हैं। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और मंदिर के चढ़ावे का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की मांग की गई।
जस्टिस राजन और मंजीव ने कीं खारिज
याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने मांग की थी कि CBI जांच का आदेश हो। इस पर सरकार की तरफ से AAG विनोद शाही और CSC शैलेंद्र सिंह ने पक्ष रखते हुए कहा कि ऐसी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अतः यहां कोई औचित्य नहीं है। इसके बाद जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला ने याचिका खारिज कर दी।
मुख्य जनहित याचिका 12 जून 2026 को दाखिल की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी थी। अब सोमवार को इस पर सुनवाई से इन्कार कर दिया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मामला कोर्ट नंबर-1 में क्रम संख्या-19 पर सूचीबद्ध है और लंच के बाद इस पर सुनवाई होने की प्रबल संभावना थी।



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