मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- विभाजन के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में सिंधु एजुकेशन सोसाइटी के 75वें स्थापना दिवस समारोह में 10 से 12 जुलाई तक कर्नाटक के बेलगावी में होने वाली अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक का ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों को शरणार्थी कहना सही नहीं है।
भागवत ने कहा कि पीढ़ियों से कमाई, संपत्ति, व्यवसाय ,खेती, सब छोड़कर लोग यहां आए, वह शरणार्थी नहीं थे, विस्थापित जरूर थे। उनके लिए गलत शब्द का उपयोग हुआ उस समय। वो तो अपनी मातृभूमि के प्रेम के कारण, धर्म प्रेम के कारण, संघर्षरत योद्धा थे, एक लड़ाई हार गए थे। हम सब लोग लड़ाई हार गए थे, भारत को एक रखने की, लेकिन क्या चुना? कैरियर नहीं चुना, संपत्ति नहीं चुनी, देश चुना, धर्म चुना, क्योंकि जैसा मैंने कहा कि दशा बदलती है, प्रस्थिति आती है, प्रस्थिति जाती है।
शिक्षा सिर्फ नौकरी के लिए नहीं होनी चाहिए
आरएसएस चीफ ने कहा- पेट भरने वाली शिक्षा आवश्यक तो है, लेकिन अनिवार्य नहीं है। बिना शिक्षा के भी लोग बड़े होते हैं और शिक्षित लोगों को नौकरी पर रखते हैं। विवेक प्राप्त करने के लिए वास्तव में शिक्षा है, घर से शुरू होती है। पहली टीचर माता है। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में आगे कहा कि “पूरी मानव जाति को एम इन लाइफ देना है। जीना अपने लिए नहीं जीना है, अपनों के लिए,स्वयं नेकी से जीना है। और सबको नेकी सीखानी है बोलकर नहीं, कीर्ति से सीखानी है, यही अपने यहां जीवन की रीति मानी जाती है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि जिनका सब कुछ उजड़ गया, जिनके पास कुछ नहीं है, एक तो कुछ नहीं है इसलिए रोते-रोते ये लोग लोग नहीं बैठे, सब कुछ गवां के यहां आए, फिर से यहां पर खड़ा किया। मनुष्य को प्रस्थिति के सामने, नियति के सामने रोना नहीं चाहिए, प्रयास करना चाहिए, प्रयास करने से सब ठीक होता है। प्रतीक्षा करनी पड़ती है, रोने वाला आदमी पहले ही हार जाता है लड़ने के पहले। जो लड़ाई करता है, कुछ ना कुछ हासिल करता है। इसलिए जीवन में सदा हारना नहीं, भागना नहीं।
डटे रहना, अड़े रहना, संघर्ष करना
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भगवान ने गीता में अर्जुन को बताया है कि भागने से तुम्हारी अप कृती होगी, लड़ोगे-जीतोगे तो वैभव मिलेगा, मारोगे तो ऐसी गति मिली जो बड़े-बड़े योगियो को भी नहीं मिलती। डटे रहना, अड़े रहना, संघर्ष करना, इसमें नुकसान नहीं है। भागना, हारना, निराश होना इसमें नुकसान है। यह जीवन का भाग है, हारना नहीं, एक दरवाजा बंद होता है तो, दूसरा दरवाजा कहीं खुलता है।
प्रचारकों के जीवन पर आधारित 100 वीडियो जारी करेंगे
RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों के तहत भागवत शुक्रवार को प्रचारकों के जीवन पर आधारित 100 वीडियो जारी करेंगे। इसी दिन ‘डॉ. हेडगेवार: आधुनिक युग के शालिवाहन’ शीर्षक यूट्यूब वीडियो का सार्वजनिक प्रसारण भी होगा।
इसके अलावा, 05 जुलाई को वे नागपुर में ‘सनमार्ग माइंड वेलनेस सेंटर’ का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल होंगे।



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