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Shailendra Singh
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नई जिंदगी, नया शरीर: प्रसव के बाद ऐसा होना चाहिए मां के पोषण का सफर
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डायटीशियन सुनीता सक्सेना से जानिए प्रसव के बाद मां का डाइट प्लान
शैलेंद्र सिंह
मां बनना, हर महिला का सपना होता है। मगर, मां बनने के बाद यानी प्रसव के बाद उनका शरीर सिर्फ एक नया जीवन नहीं, बल्कि खुद को नए रूप में भी जन्म देता है। इस समय शरीर को सही पोषण, देखभाल और संतुलन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। अक्सर हम बच्चे की देखभाल में इतने खो जाते हैं कि मां की जरूरतें पीछे छूट जाती हैं। इसी अहम विषय यानी प्रसव के बाद महिला की डाइट पर एक्स डायटीशियन, केजीएमयू और एचओडी हेल्थ सिटी विस्तार, गोमती नगर सुनीता सक्सेना से खास बातचीत की गई। उन्होंने प्रसव के बाद महिलाओं की डाइट के बारे में बताया, जिससे उनके शरीर को सही पोषण मिल सके और वह ऊर्जा से भरपूर, मानसिक रूप से मजबूत महसूस करते हुए जल्दी रिकवर हो सकें। पढ़िए बातचीत के विशेष अंश:
सवाल: प्रसव के बाद महिलाओं के शरीर में कौन से पोषक तत्वों की कमी हो जाती है?
जवाब: जब एक मां बच्चे को जन्म देती है तो प्रसव के बाद उसके शरीर में बहुत अधिक हार्मोनल बदलाव होते हैं। बच्चे को जन्म देने के बाद उन्हें कमजोरी होने लगती है। अगर बच्चा सिजेरियन यानी सी-सेक्शन के जरिए हुआ हो तो ब्लीडिंग के कारण समस्याएं और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं। उनके शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है, क्योंकि बच्चे भी उस समय दूध के जरिए कैल्शियम को अवशोषित करते हैं। आयरन, प्रोटीन, फाइबर और मिनिरल्स की भी कमी हो जाती है। ज्यादातर मदर को इन्हीं पोषक तत्वों से अपने शरीर को मजबूत रखने के लिए जरूरत पड़ती है।
सवाल: प्रसव के बाद मां की थाली में कौन-कौन से पोषक तत्वों की जरूरत होती है?
जवाब: प्रसव के बाद वाले पीरियड को पोस्टनेटल पीरियड कहते हैं। जब भी यह शुरू होता है तो न्यूली मदर के खाने में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और फाइबर रिच फूड्स शामिल होने चाहिए। उनको दाल, हरी सब्जियां, फाइबर वाले आटे की रोटियां, फल, दूध, दही, पनीर और जो लोग अंडा खाते हैं उनको अंडे जैसे प्रोटीन रिच फूड्स देना चाहिए। दूसरी चीज आती है कि इन्हें आयरन की बहुत जरूरत होती है, जिसके लिए हरे पत्तेदार सब्जियां, गुड़, सोया-मेथी, पालक, बथुआ जैसे आयरन रिच फूड्स देने चाहिए। तीसरी चीज होती है कैल्शियम, जिसके दही, मट्ठा, फूल गोभी, पत्ता गोभी और तिल के लड्डू जैसे कैल्शियम से भरपूर फूड्स देने चाहिए। चौथी सबसे जरूरी चीज है कि प्रसव के बाद बच्चे को दूध की ज्यादा जरूरत पड़ती है और ऐसे में मां के लिए भी तरल पदार्थ की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। इसके लिए वे दाल, दूध, मट्ठा, ताजा जीरा पानी, अजवाइन पानी भी कंज्यूम कर सकती हैं, जो गैस की समस्या को भी खत्म करने में मदद करता है। सही मायनों में प्रसव के बाद मां की थाली में लिक्विड, प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन रिच डाइट बहुत जरूरी होती है।
सवाल: प्रसव के बाद महिलाओं के लिए दिन भर का डाइट प्लान क्या होना चाहिए?
जवाब: न्यूली मदर के लिए पूरे दिन का जो डाइट प्लान होता है, उसमें तीन मील सुबह का नाश्ता, लंच और रात का डिनर, जिन्हें बिग मील कहते हैं, पौष्टिक तत्वों से भरपूर और बैलेंस्ड होने चाहिए। इसके अलावा दो मील और छोटे-छोटे मील ले सकती हैं, जिसमें फ्रूट्स, सलाद और सूप ले सकती हैं। इस तरह से कुल मिलाकर प्रसव के बाद दिनभर में महिलाएं पांच मील डाइट ले सकती हैं। अब बात करें ब्रेकफास्ट की तो इसमें प्रोटीन रिच डाइट लेनी चाहिए, जिनमें अंडा, अंकुरित मूंग, चना स्टीम करके खा सकती हैं, पनीर ले सकती हैं और साथ में दूध जरूर लेना है। जो महिलाएं दूध नहीं पीती हैं तो वह मट्ठा या दही का इस्तेमाल कर सकती हैं। साथ में मोटा अनाज जैसे- दलिया, ओट्स और सूजी का चिल्ला जैसी चीजें भी बहुत होनी चाहिए, क्योंकि अनाज के अंदर वह सारे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और मिनरल्स होते हैं, जिनकी जरूरत होती है। इसके बाद ढाई से तीन घंटे बाद विटामिन और मिनरल्स से रिच एक छोटा मील ले सकती हैं, जिसमें नारियल पानी और कोई मौसमी फल शामिल किया जा सकता है।
इसके बाद आता है दोपहर का खाना। इस समय हमारी पूरी थाली में दाल, जिसमें बथुआ या पालक मिक्स किया हो, कोई मौसमी हरी सब्जी, सोयाबीन, सलाद, थोड़ा सा चावल और मिक्स आटे की रोटी होनी चाहिए। फिर शाम को मखाना, तिल का लड्डू, गुड़ की चिक्की और साथ में एक गिलास दूध छोटे मील के रूप में ले सकती हैं। इसके बाद रात के 7:00 से 8:00 बजे के बीच जो लोग सूप पीना चाहते हैं सूप, नींबू पानी या सादा पानी पी सकते हैं। अंत में डिनर में थोड़ा सा लाइट खाना रखना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी गैस्ट्राइटिस की प्रॉब्लम हो जाती है। ऐसे में सब्जी, रोटी और कुछ मीठा, जिसमें सूजी, राइस या मेवे की खीर शामिल कर सकती हैं। साथ ही हल्दी वाला दूध लेना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि यह महिला के शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
सवाल: नॉन वेजिटेरियन और सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं की डाइट कैसी हो?
जवाब: वेज या नॉन वेजिटेरियन महिलाओं के लिए खाने का डाइट प्लान लगभग एक समान ही रहता है। बस, नॉन वेजिटेरियन महिलाएं प्रोटीन की मात्रा के लिए फिश या चिकन की दो-तीन पीस ले सकती हैं, लेकिन चिकना ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसके अलावा जिनकी नॉर्मल डिलीवरी होती है, वह दो-तीन दिन बाद डॉक्टर की सलाह से फैट वाली चीज थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कंज्यूम कर सकती हैं, लेकिन सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को थोड़ा फैट का रिस्ट्रिक्शंस फॉलो करना होता है। इन्हें डाइट को सबसे पहले तरल रूप में लेना होता है, जिसमें सूप, दाल का पानी और फिर एक-दो दिन बाद थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सॉलिड मील, जिसमें खिचड़ी, दही या फिर खीर देनी चाहिए। इसके बाद नॉर्मल डाइट पर आना चाहिए, लेकिन बहुत ज्यादा फैट और ऑयली चीजों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
सवाल: वर्किंग विमेंस के लिए डाइट प्लान कैसा होना चाहिए?
जवाब: प्रसव के बाद जब कई वर्किंग विमेंस को ऑफिस जाना होता है तो जल्दी-जल्दी में वे कुछ भी खाकर ऑफिस चली जाती हैं, लेकिन उन्हें ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। उनको सुबह कुछ इंस्टेंट चीजें, जैसे- दूध की दलिया, सब्जी वाली दलिया बना लेनी चाहिए। इसके अलावा अपने ऑफिस बैग में थोड़े स्प्राउट्स, भुने चने, पनीर का छोटा सा टुकड़ा, एक फल रख लेना चाहिए, जो वो ऑफिस में आसानी से खा सकती हैं। साथ ही वो लइया-चने का सत्तू, मूंगफली या जो डायबिटिक नहीं हैं, वो गुड़ की चिक्की भी ले जा सकती हैं। इसके बाद लंच के लिए खाने में खीरा, टमाटर, पालक या बथुआ मिक्स दाल, रोटी, सब्जी या फिर खिचड़ी साथ ले जा सकती हैं। क्योंकि, अगर आपका तन-मन स्वस्थ है तो बच्चा और जहां आप काम कर रही हैं, वहां के वातावरण में पूरे मन से काम कर पाएंगी और अपने बच्चे की भी ठीक से देखभाल कर पाएंगी।
सवाल: न्यूली मदर्स के लिए आपका क्या संदेश है?
जवाब: जो भी महिलाएं न्यूली मदर बनती हैं, उन्हें इस टाइम बहुत सारे स्ट्रेस होते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि बच्चा पालना, बच्चा पैदा करने से ज्यादा कठिन होता है। इन समस्याओं से बचने के लिए उनको हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। अच्छे से लिक्विड पीना चाहिए, पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए और सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। इन सभी चीजों को अच्छे से फॉलो करने से नई-नई मां बनीं महिलाएं स्ट्रेस फ्री और बहुत खुश रहेंगी, जिससे वे बच्चे का भी पालन-पोषण अच्छे से कर पाएंगी। लेकिन, यहां ध्यान देने वाली बात है कि अगर किसी महिला की नॉर्मल डिलीवरी हुई हो तो वे दो-तीन दिन बाद थोड़ा वॉक कर सकती हैं, हल्का-फुल्का योगा, एक्सरसाइज और मेडिटेशन कर सकती हैं। लेकिन, उन्हें भारी चीचें उठाने या झुकाने वाला काम नहीं करना चाहिए।
वहीं, अगर महिला की सिजेरियन डिलीवरी हुई हो तो उन्हें कोई भी बैकिंग पोजीशन वाली एक्सरसाइज या योग नहीं करना चाहिए। झुकने या स्ट्रेचिंग वाली एक्सरसाइज या काम नहीं करना चाहिए। हां, वो मेडिटेशन कर सकती हैं। साथ अगर योगा करना भी है तो डॉक्टर या फिजियो थैरेपिस्ट की गाइडलाइंस के अनुसार ही करना चाहिए। हल्की-फुल्की वॉकिंग कर सकती है, क्योंकि ये इंपॉर्टेंट है, जिससे स्टीचेस भी मजबूत रहेंगे और पूरे शरीर की एक्सरसाइज भी हो जाएगी। लेकिन, अगर आप योगा या एक्सरसाइज करने की सोच रही हैं तो डॉक्टर या योगा टीचर के निर्देशानुसार ही करें।



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