गंगा दशहरा पर स्‍नान को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, काशी में मां गंगा का 501 लीटर से दुग्धाभिषेक

गंगा दशहरा पर स्‍नान को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, काशी में मां गंगा का 501 लीटर से दुग्धाभिषेक

वाराणसी/प्रयागराज/अयोध्‍या: गंगा दशहरा के पावन अवसर पर वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या सहित प्रदेश में कई जगह नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंगलवार सुबह से ही स्नान, पूजा और दान का सिलसिला जारी है। काशी में भी गंगा घाटों पर अब तक 1 लाख से अधिक श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं।

काशी के अस्सी घाट पर मां गंगा को 12 राज्यों से आई 5100 साड़ियों की चुनरी चढ़ाई गई। ये करीब 25500 फीट लंबी थी। प्रयागराज में संगम पर हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद सूर्य को अर्घ दिया। अयोध्या के सरयू घाट पर भी सुबह से श्रद्धालु पहुंचे और दान पुण्य कर आस्था में सराबोर नजर आ रहे हैं। आज शाम काशी में विशेष गंगा आरती होगी। इसके बाद घाटों पर दीप सजाए जाएंगे। आज पूरा माहौल देव दिवाली जैसा रहेगा।

आठ साल बाद मनाया जा रहा गंगा दशहरा का महापर्व

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास में आठ साल बाद गंगा दशहरा का महापर्व मनाया जा रहा। ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को वृषभ लग्न और हस्त नक्षत्र में मां गंगा के अवतरण का उत्सव भक्त मना रहे हैं। इसी नक्षत्र व लग्न में मां का अवतरण हुआ था। इसके साथ ही चार विशिष्ट योग और चार उत्तम मुहूर्त में गंगा मां का पूजन होगा जो सौ गुना फलदायी है।

गंगा दशहरा पर मां गंगा के पूजन के विशिष्ट मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त (स्नान के लिए) सुबह 4:04 से 4:45 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए) दिन में 11:51 से 12:46 बजे तक है। वैसे दिनभर पूजन के लिए शुभ है।

गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि सनातन चेतना की जीवनधारा है

काशी में श्रीकुल पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. सचिंद्र नाथ महाराज ने बताया कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और सनातन चेतना की जीवनधारा हैं। गंगा दशहरा का यह पावन पर्व माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है, इसलिए इस दिन गंगा स्नान, सेवा, आरती और दान का विशेष महत्व माना गया है।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को अपनी संस्कृति, परंपराओं और गंगा संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर लाया, उसी प्रकार आज हम सबका दायित्व है कि मां गंगा की स्वच्छता, पवित्रता और अविरलता को बनाए रखें।

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