BJP पार्षद को सुप्रीम कोर्ट से भी लगा झटका, सपा पार्षद को ही दिलानी होगी शपथ
लखनऊ: लखनऊ हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी बीजेपी पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला को झटका लगा है। हलफनामे में गलत जानकारी देने पर उनकी पार्षदी चली गई थी। अदालत ने कहा था- ‘शपथ पत्र में जरूरी कागजात नहीं देना, तथ्य छिपाना धांधली करना है। इसलिए निर्वाचन रद्द किया जाता है।’ कोर्ट ने चुनाव में रनरअप रहे समाजवादी पार्टी के नेता ललित तिवारी को पार्षद घोषित किया था।
12 मई को हाईकोर्ट ने ललित तिवारी को एक सप्ताह में शपथ दिलाने का आदेश दिया था। इस पर प्रदीप कुमार शुक्ला की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसे कोर्ट ने रद्द किया है। यानी अब 12 मई के हाईकोर्ट के फैसले को मानना होगा। यानी ललित तिवारी को शपथ दिलाना पड़ेगा। मामला लखनऊ नगर निगम के वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) का है।
क्या है मामला?
दरअसल, नगरीय निकाय चुनाव-2023 के दौरान भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला उर्फ टिंकू शुक्ला और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी के बीच सीधा मुकाबला हुआ था। मतगणना में प्रदीप कुमार शुक्ला को 4,972 और ललित तिवारी को 3,298 वोट मिले थे। इस आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला को निर्वाचित घोषित कर दिया गया था। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
उन्होंने इसमें आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाचन प्रपत्रों में कुछ जरूरी जानकारियां नहीं दी थीं। ये जानकारियां देना कानूनन जरूरी था। याचिका में यह भी कहा गया था कि नामांकन प्रक्रिया में की गई यह चूक चुनावी नियमों का उल्लंघन है। इसे कदाचार की श्रेणी में माना जाना चाहिए। इसी आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। साथ ही चुनाव परिणाम निरस्त करने की मांग की गई थी।
पांच महीने पहले रद्द हुआ था निर्वाचन
नगर निगम पार्षदी को लेकर वार्ड-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) में उठा विवाद 13 मई, 2023 को लखनऊ के अपर जिला जज की अदालत तक पहुंचा था। करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने निर्वाचन के समय दाखिल एफिडेविट, शपथ पत्र और निर्वाचन फार्म की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया था।
अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों, तथ्यों और दलीलें देखीं। कोर्ट ने पाया कि नामांकन के दौरान आवश्यक जानकारी न देना गंभीर अनियमितता है। इससे चुनाव की वैधता प्रभावित होती है। इसी आधार पर कोर्ट ने प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया था। साथ ही ललित तिवारी को वार्ड-73 से निर्वाचित घोषित कर दिया था।



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