पाकिस्तान अमेरिका के पक्ष में झुका है, मध्यस्थ बनने के लायक नहीं: ईरानी सांसद
वॉशिंगटन डीसी/तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर चल रही बातचीत में अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच ईरान के एक नेता ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजई ने कहा कि पाकिस्तान दोस्त जरूर है, लेकिन वह बातचीत में बीच का सही पक्ष (मध्यस्थ) नहीं बन सकता।
सांसद रेजई ने कहा कि पाकिस्तान, अक्सर डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के हितों को ध्यान में रखता है और उनके खिलाफ कुछ नहीं कहता। इसलिए वह निष्पक्ष नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि एक सही मध्यस्थ वही होता है, जो दोनों पक्षों के बीच निष्पक्ष रहे, न कि हमेशा एक ही पक्ष की तरफ झुका रहे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 24 घंटे में दो बार पाकिस्तान का दौरा किया।
پاکستان دوست و همسایه خوب ماست اما واسطه مناسبی جهت مذاکرات نیست و اعتبار لازم را برای واسطهگری ندارد. آنها همیشه مصلحت ترامپ را در نظر میگیرند و برخلاف میل آمریکاییها حرفی نمیزنند بطور مثال حاضر نیستند به دنیا بگویند که آمریکا ابتدا پیشنهاد پاکستان را پذیرفت اما بعد زیر حرفش…
— ابراهیم رضایی (@EbrahimRezaei14) April 26, 2026
ट्रंप बोले– ईरान के पास बहुत कम वक्त बचा है
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि उसके पास युद्ध खत्म करने के लिए सीजफायर पर सहमत होने के लिए सिर्फ तीन दिन हैं, नहीं तो उसकी तेल पाइपलाइन में ब्लास्ट हो जाएगा।
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान तेल का निर्यात नहीं कर पाता, तो पाइपलाइन में दबाव बढ़ेगा। ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि तेल को जहाजों या स्टोरेज टैंकों में भेजने का रास्ता बंद है और उस पर नाकेबंदी लगी हुई है।
EU चीफ बोलीं- ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाना अभी जल्दबाजी
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोमवार को कहा कि ईरान पर लगे प्रतिबंध फिलहाल नहीं हटाए जाने चाहिए। उनका कहना है कि इस समय प्रतिबंध हटाने का फैसला जल्दबाजी होगा। वॉन डेर लेयेन ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में कंजर्वेटिव CDU पार्टी और उसकी सहयोगी CSU पार्टी की बैठक में यह बयान दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पर ये प्रतिबंध उसकी सरकार के अपनी ही जनता के दमन की वजह से लगाए गए थे। वॉन डेर लेयेन ने साफ कहा कि प्रतिबंध हटाने से पहले ईरान में बदलाव दिखना चाहिए।
ईरान का आरोप– अमेरिका की ज्यादा मांगों से शांति वार्ता फेल
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका की ज्यादा मांगों की वजह से पाकिस्तान में शांति वार्ता सफल नहीं हो पाई। उन्होंने यह बात रूस पहुंचने के बाद स्थानीय पत्रकारों से बातचीत में कही। अराघची मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को लेकर रूसी सहयोगियों से चर्चा करेंगे। उन्होंने बताया कि इस्लामाबाद में हुई बातचीत में यह तय करने की कोशिश की गई थी कि किन शर्तों पर आगे बातचीत जारी रह सकती है।
अराघची ने यह भी कहा कि ईरान ने अभी होर्मुज को बंद कर रखा है। उनके मुताबिक इस अहम समुद्री रास्ते से सुरक्षित आवाजाही सिर्फ ईरान का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पड़ोसी देश ओमान के साथ ईरान की सोच काफी हद तक मिलती है। दोनों देशों के बीच इसे लेकर आगे और बातचीत करने पर सहमति भी बन गई है।
ईरान का न्यूक्लियर और होर्मुज पर समझौते से इनकार
ईरान ने अमेरिका के साथ समझौते को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उसने कहा है कि न्यूक्लियर कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह संदेश पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। ईरान ने इन दोनों मुद्दों को अपनी ‘रेड लाइन’ बताया है और कहा है कि इन पर किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है।
साथ ही, यह भी साफ किया कि यह कोई औपचारिक बातचीत नहीं है, बल्कि अपनी स्थिति साफ करने की एक कूटनीतिक पहल है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस पूरे मामले में तय सीमाओं के भीतर रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।



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