UGC Controversy: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूजीसी के विनियम-2026 पर कहा कि कोई दोषी बचना नहीं चाहिए और निर्दोष फंसना नहीं चाहिए। उन्होंने इसे भाजपा की चाल बताया। उन्होंने कहा कि इन नियमों से पीडीए समाज को कोई राहत नहीं मिलेगी, कोईं अधिकतर संस्थाओं पर गैर पीडीए समाज के लोग काबिज हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) एक्ट 2026 की नई गाइडलाइन को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। इसी के चलते लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। सैकड़ों छात्रों ने गेट नंबर-1 पर धरना-प्रदर्शन कर यूजीसी के नए नियमों को विभाजनकारी बताते हुए उन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की। छात्रों ने यूजीसी रोल बैक के नारे लगाए। चेतावनी दी कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
विश्वविद्यालय गेट पर छात्रों की भीड़ जुटने लगी। हालात को देखते हुए किसी अप्रिय घटना से बचाव के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि यूजीसी का नया नियम समानता नहीं, बल्कि छात्रों को जातीय आधार पर बांटने का प्रयास है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एसीपी को ज्ञापन सौंपकर सरकार से गाइडलाइन को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
ये है यूजीसी की नई गाइडलाइन
यूजीसी ने 13 जनवरी को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन-2026 अधिसूचित किया है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना है। इसके तहत एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
नए नियमों के कुछ प्रमुख बिंदु
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– हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में ईक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर और इक्वलिटी स्क्वाड का गठन अनिवार्य। शिकायत मिलने पर 24 घंटे में बैठक और तय समय सीमा में कार्रवाई ।
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– भेदभाव से जुड़े मामलों की वार्षिक रिपोर्ट यूजीसी को भेजना जरूरी। नियमों के उल्लंघन पर अनुदान रोकने, पाठ्यक्रमों पर प्रतिबंध और गंभीर स्थिति में मान्यता रद्द करने का प्रावधान।