नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र में गुरुवार (11 दिसंबर) को 9वें दिन की कार्यवाही जारी है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने स्पीकर ओम बिरला को शिकायत करते हुए कहा कि TMC सांसद सदन में ई-सिगरेट पी रहे हैं। इस पर स्पीकर ने कहा कि एक्शन लिया जाएगा।
विपक्ष के सवाल पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पेंट की जेब हाथ डाले हुए ही जबाव दे रहे थे। इस पर स्पीकर बिरला ने उन्हें टोका और कहा कि माननीय सांसद जेब से हाथ निकालकर जबाव दें। इस पर हरदीपसिंह पुरी ने तत्काल हाथ बाहर निकाले।
जयराम रमेश ने राजनाथ सिंह से मुलाकात
इधर, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सुबह लोकसभा पहुंचे। जैसे ही वे कार उतरे तो कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने उनसे मुलाकात की। रमेश ने ‘सरदार पटेल की इनसाइड स्टोरी: मणिबेन पटेल की डायरी’ नाम की किताब सौंपी। कहा- ये गुजराती में है, इसे पढ़िएगा। राजनाथ ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘अंग्रेजी में दीजिए। मैं गुजराती नहीं जानता हूं।’ इतना कहकर राजनाथ सिंह आगे बढ़ गए। आज भी दोनों सदनों में चुनाव सुधार, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और वोट चोरी जैसे मुद्दों पर हंगामे के आसार हैं।
राहुल का शाह को डिबेट का चैलेंज
इससे पहले गुरुवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को डिबेट के लिए चैलेंज कर दिया था। दरअसल, इससे पहले दौरान शाह ने कहा था कि चुनाव सुधार पर चर्चा से बीजेपी के लोग भागते नहीं है। लोकसभा में दोनों के बीच इसपर तीखी बहस भी हुई। शाह ने राहुल गांधी के लोकसभा में पूछे 3 सवालों का जवाब भी दिया। इस दौरान सदन में 7 से ज्यादा बार हंगामा हुआ। आखिर में कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया था।
नड्डा बोले- वंदे मातरम् गीत राष्ट्र के पुन: निर्माण का आह्वान
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वंदे मातरम् गीत राष्ट्र के पुन: निर्माण का आह्वान है। वंदे मातरम् एक मंत्र, ऊर्चा, प्रण, संकल्प है। ये मां भारती की साधना, सेवा और आराधना है। इससे जो भाव पैदा होते हैं। उसे शब्दों में बांधना बहुत कठिन है। ये आजादी का जज्बा देता है। आजादी के संघर्ष की याद भी दिलाता है। जब 1875 में ब्रिटिश हम पर अपना राष्ट्रगान थोपना चाहते थे। तब बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने वंदे मातरम् गीत हमको दिया। 1882 में आनंदमठ में उन्होंने इस जोड़ा।
नड्डा बोले ने कहा कि देश अनकंडीशनल सेंटमिटेंस को ध्यान में रखकर चलता है। वंदे मातरम् को वही सम्मान मिले, जो हम राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज को मिलता है।
कांग्रेस ने हर चीज कबूल की और कंप्रोमाइज किया
जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा हर चीज को कबूल किया और कंप्रोमाइज किया है। वक्फ भी इसी का हिस्सा है। बॉम्बे प्रेसिडेंसी का विभाजन कर दिया। मुस्लिम लीग ने इसकी मांग की थी। बाकी लोग नहीं चाहते थे कि ये बंटे। सन् 1947 में मुस्लिम लीग ने वंदे मारतम् का विरोध किया। कांग्रेस ने कबूल किया, अपने रेजोल्यूशन में। जिन्ना ने दो देश की बात कही। 1947 ने कांग्रेस ने भारत को खंडित आजादी दिलाई।
नड्डा ने कहा कि संविधान की तीन प्रतियों पर हस्ताक्षर करने के लिए 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई। उसमें बिना किसी चर्चा और बिना किसी नोटिस के एक वक्तव्य पढ़ दिया गया, जिसमें भारत के राष्ट्रगान का निर्णय सुना दिया गया। ‘जन गण मन’ को भारत का राष्ट्रगान घोषित कर दिया गया और साथ ही यह भी कहा गया कि ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान भी ‘जन गण मन’ के समान ही किया जाएगा। यह निर्णय किस प्रकार संवैधानिक प्रक्रिया के तहत और लोकतांत्रिक निर्णय कहा जा सकता है, यह संविधान-निर्माताओं पर छोड़ा जाता है।
VIDEO | Rajya Sabha: Leader of the House and BJP chief JP Nadda (@JPNadda) during debate on Vande Mataram, says, "During the Lucknow Session on August 15, 1937, Mohammad Ali Jinnah passed a fatwa against Vande Mataram. Instead of contesting it, Jawaharlal Nehru initiated an… pic.twitter.com/rPAeZLYL13
— Press Trust of India (@PTI_News) December 11, 2025
कलकत्ता कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 1937 तक हुई और उसने AICC के लिए एक प्रस्ताव पास किया। इसमें कहा गया था कि कमेटी हमारे मुस्लिम दोस्तों द्वारा गाने के कुछ हिस्सों पर उठाई गई आपत्तियों को सही मानती है। कमेटी सलाह देती है कि जब भी राष्ट्रीय मौकों पर वंदे मातरम् गाया जाए, तो सिर्फ पहले दो छंद ही गाए जाएं।
कंस्टीट्यूट असेंबली में राष्ट्रगान पर कितनी देर चर्चा हुई?
उन्होंने कहा कि मैं राष्ट्रगान का पूरे मन से सम्मान करता हूं, उसके सम्मान में अपना पूरा जीवन समर्पित करता हूं। लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि कंस्टीट्यूट असेंबली में राष्ट्रगान पर कितनी देर चर्चा हुई? राष्ट्रीय ध्वज पर तो आपने कमेटी बिठाई, कमेटी की रिपोर्ट आई और उस पर विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन जब राष्ट्रगान की बारी आई, तब आपने क्या किया?
1936-37 में नेहरू नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष थे। 937 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में और सांप्रदायिक तत्वों के दबाव में गीत में बदलाव किया गया। उन छंदों को हटा दिया गया, जिनमें भारत माता को हथियार पकड़े हुए मां दुर्गा के रूप में दिखाया गया था।
तकलीफ में देश आया तो विपक्ष इसकी भी जिम्मेदारी ले
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि जो सम्मान, स्थान वंदे मातरम् को मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला, इसके लिए तब के शासक जिम्मेदार हैं। देश जब तकलीफ में आया तो विपक्ष को इसकी भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वंदे मातरम् को जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह कभी नहीं मिला, और उस समय देश के नेता इसके लिए जिम्मेदार थे। 1937 में, जवाहरलाल नेहरू ने वंदे मातरम् के बारे में कुछ आपत्तियां जताईं।
सितंबर, 1937 में उर्दू लेखक अली सरदार जाफरी को लिखे एक पत्र में उन्होंने गाने की भाषा की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें बहुत ज्यादा मुश्किल शब्द हैं, जिन्हें लोग नहीं समझते और यह कि इसके विचार राष्ट्रवाद और प्रगति की आधुनिक सोच से मेल नहीं खाते। नड्डा ने कहा कि यही हमारा आरोप है कि भारत के PM ने वंदे मातरम् के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को नजरअंदाज किया गया।