छह राज्यों में SIR की समय सीमा बढ़ी, चुनाव आयोग ने यूपी में 26 दिसंबर तय की आखिरी तारीख

छह राज्यों में SIR की समय सीमा बढ़ी, चुनाव आयोग ने यूपी में 26 दिसंबर तय की आखिरी तारीख

नई दिल्‍ली: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने 6 राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की समय सीमा बढ़ा दी गई है। पांच राज्यों में इसे एक सप्‍ताह के लिए बढ़ाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में इसे 26 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। अवधि बढ़ाए जाने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार शामिल हैं।

पहले इसकी आखिरी तारीख 11 नंवबर तय की गई थी लेकिन चुनाव आयोग ने इसे बढ़ाने का फैसला लिया है। अब अपडेटेड वोटर लिस्ट 19 नवंबर को जारी होगी। इससे पहले आयोग ने केरल के लिए आखिरी तारीख 11 दिसंबर से बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दी थी।

ऐसे बढ़ाई गई समय सीमा

छह राज्यों में SIR की समय सीमा बढ़ी, चुनाव आयोग ने यूपी में 26 दिसंबर तय की आखिरी तारीख

30 नवंबर को SIR की डेडलाइन 7 दिन बढ़ाई गई थी

चुनाव आयोग ने 30 नवंबर को SIR की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ाने का फैसला किया था। आयोग ने कहा था कि अब अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। मतदाता जोड़ने-हटाने का एन्यूमरेशन पीरियड यानी वोटर वेरिफिकेशन अब 11 दिसंबर तक चलेगा, जो पहले 4 दिसंबर तक तय था। वहीं, पहले ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को जारी होनी थी, लेकिन अब इसे 16 दिसंबर को जारी किया जाएगा।

पॉलिटिकल पार्टियों को मिलेगी मृत मतदाताओं की सूची

निर्वाचन आयोग ने बुधवार को कहा कि देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही SIR प्रक्रिया के तहत राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने से पहले मृत, स्थानांतरित और अनुपस्थित वोटरों की सूची दी जाएगी। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 16 दिसंबर को जारी की जाएगी।

इससे पहले आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को हर बूथ के हिसाब से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट वोटरों की सूची तैयार कर बूथ एजेंटों को देने का निर्देश दिया है। ये वे वोटर हैं जिनसे बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) तीन बार कोशिश के बावजूद संपर्क नहीं कर सके। बिहार में हुई एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भी यही तरीका अपनाया गया था।

SIR (स्पेशल इंटेसिव रिवीजन) क्या है?

ये चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इससे वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है।

इसमें 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है।

ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है। जो शिफ्ट हो चुके हैं उनके नाम हटाए जाते हैं।

वोटर लिस्ट में नाम, पते में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है।

BLO घर-घर जाकर खुद फॉर्म भरवाते हैं।

मकसद

कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में ना छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

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