UP Congress: SIR का अत्याचार लगातार कर्मचारियों की मौतों का कारण बनता जा रहा है। यह बात कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कही है। उन्होंने कहा की मोदी सरकार और ज्ञानेश कुमार SIR सिस्टम के नाम पर निर्दोष कर्मचारियों की जान से खेल रहे हैं। SIR कोई System for Revision नहीं, बल्कि System Imposed Repression यानी सरकार द्वारा थोपा गया ज़ुल्मी तंत्र है। कर्मचारी मर रहे हैं… मोदी और ज्ञानेश कुमार चुप क्यों हैं? अजय राय ने कहा की सिस्टम के दबाव में एक-एक मौत लोकतंत्र पर एक-एक कलंक है। कितनी लाशों के बाद जागेगी यह सरकार? शर्म आनी चाहिए मोदी सरकार को। आज पूरे उत्तर प्रदेश में एक ही सवाल गूंज रहा है— कर्मचारी कब तक मरते रहेंगे? SIR सिस्टम के नाम पर आतंक फैलाया जा रहा है, घर तोड़े जा रहे हैं, जवान बेटों की अर्थियां उठ रही हैं और सरकार खामोश है।
उत्तर प्रदेश में SIR के दबाव में होने वाली हर मौत लोकतंत्र पर एक-एक कील है। मोदी सरकार को शर्म आनी चाहिए कि उसकी नीतियों ने परिवारों को उजाड़ दिया और अब भी संवेदनहीनता जारी है। जब जनता का सेवक ही डरकर मरने लगे, तो समझ लीजिए कि सत्ता तानाशाही में बदल चुकी है। कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को हर हाल में आख़िरी सांस तक लड़ेगी — कर्मचारियों की इज़्ज़त, हक़ और जिंदगी की रक्षा के लिए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने की ये मांगें
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बीएलओ की मौत के मामलों की उच्च स्तरीय जांच हो।
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जिम्मेदार अधिकारियों पर IPC 302 (हत्या) के अंतर्गत FIR दर्ज हो।
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सभी मृतक कर्मचारियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया जाए।
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परिवार के एक सदस्य को तत्काल सरकारी नौकरी दी जाए।
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SIR प्रक्रिया में तीन माह का समय अवधि बढ़ाया जाए।