World Environment Day 2026: गोरखपुर की बेटी ने बनाया ‘सोलर पर्यावरण ट्री सुरक्षा कवच’
गोरखपुर: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गोरखपुर की एक होनहार छात्रा ने जमीनी स्तर पर एक ऐसा आविष्कार कर दिखाया है, जो जंगलों की अवैध कटाई और बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ एक बड़ा हथियार साबित हो सकता है। गोरखपुर आईटीएम गीडा (ITM GIDA) में बीसीए तृतीय वर्ष की छात्रा भाग्यश्री पाण्डेय ने अपने कॉलेज की इनोवेशन टीम के साथ मिलकर एक अद्भुत ‘सोलर ट्री केयर सिस्टम’ तैयार किया है। यह एक ऐसा डिवाइस है, जिसे अगर किसी पेड़ पर लगा दिया जाए, तो वह पेड़ खुद अपनी सुरक्षा करने में सक्षम हो जाएगा।
कैसे काम करता है यह अनूठा ‘ट्री सुरक्षा कवच’?
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खूबी इसका स्मार्ट अलर्ट सिस्टम है। छात्रा भाग्यश्री के मुताबिक, अगर कोई भी व्यक्ति कुल्हाड़ी या किसी अन्य औजार से पेड़ को काटने की कोशिश करेगा, तो इस डिवाइस में लगा खास सेंसर तुरंत एक्टिव हो जाएगा। इसके एक्टिव होते ही वन विभाग के अधिकारी के मोबाइल नंबर पर सीधे जंगल की सटीक लोकेशन के साथ एक अलर्ट अलार्म बजने लगेगा। इससे अधिकारियों को तुरंत पता चल जाएगा कि किस जगह पर पेड़ को काटा जा रहा है और वे मौके पर पहुंचकर अपराधियों को रंगे हाथ दबोच सकेंगे।
तकनीकी पहलू: इस सुरक्षा कवच को बनाने में सोलर पैनल, बैटरी, एयर फ़िल्टर, एग्जॉस्ट फैन, वाटर मिस्ट सेंसर और SOS ब्लूटूथ मॉड्यूल जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
पेड़ कटने से बचाने के साथ-साथ प्रदूषण भी सोखेगा यह डिवाइस
यह सिर्फ एक अलार्म सिस्टम नहीं है, बल्कि पर्यावरण को शुद्ध करने वाला एक ‘सोलर एयर फ़िल्टर’ भी है। इस सिस्टम में दो विशेष होल (छेद) दिए गए हैं। इसमें लगा हाई-स्पीड एग्जॉस्ट फैन सोलर ऊर्जा की मदद से एक तरफ से हवा में मौजूद प्रदूषण और जहरीली गैसों को अपनी तरफ खींचता है। इसके बाद मशीन के अंदर लगी तकनीक उस हवा को साफ करती है और दूसरी तरफ से शुद्ध ऑक्सीजन युक्त हवा बाहर छोड़ती है। इससे आसपास के वायु प्रदूषण को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
भीषण गर्मी में पौधों को सूखने से बचाएगी यह तकनीक
गर्मी के मौसम में पानी की कमी और तेज धूप के कारण अक्सर छोटे-बड़े पौधे सूख जाते हैं। भाग्यश्री ने अपनी इस डिवाइस में इस समस्या का भी तोड़ निकाला है। इस डिवाइस के अंदर लगभग 2 लीटर पानी रखने की व्यवस्था की गई है। जब धूप बहुत तेज या गर्मी अत्यधिक बढ़ जाएगी, तो इसमें लगे सेंसर एक्टिव हो जाएंगे और यह पानी पेड़-पौधों के आसपास नमी बनाए रखने के लिए मिस्ट (फव्वारे) के रूप में काम करेगा। इस तकनीक से न सिर्फ पौधों को सूखने से बचाया जा सकेगा, बल्कि पेड़ों की उम्र भी काफी बढ़ जाएगी।
लागत बेहद कम, 5 साल तक पेड़ों की करेगा रखवाली
भाग्यश्री ने बताया कि इस बेहतरीन वर्किंग मॉडल को तैयार करने में उन्हें और उनकी टीम को 7 दिनों का समय लगा और शुरुआती खर्च लगभग 10 हजार रुपये आया है। मगर, यदि सरकार या कोई संस्था इसे बड़े पैमाने पर (बल्क में) बनवाती है, तो इसकी मैन्युफैक्चरिंग लागत घटकर मात्र 3 हजार रुपये प्रति डिवाइस रह जाएगी।
इस सिस्टम की कुछ अन्य खास बातें
- इसे किसी भी छोटे पौधे या विशालकाय बड़े वृक्ष पर आसानी से फिट किया जा सकता है।
- एक बार चार्ज और फिट होने के बाद यह उपकरण लगातार 5 वर्षों तक पेड़ों की सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।
संस्थान ने की तारीफ: “हर महीने लगाएं एक पौधा”
इस शानदार नवाचार पर आईटीएम संस्थान के निदेशक डॉ. एन. के. सिंह ने छात्रों के इस प्रयास की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति युवाओं की ऐसी सोच ही देश को एक सुरक्षित भविष्य दे सकती है। उन्होंने संदेश दिया कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए हम सभी को केवल तकनीक पर निर्भर न रहकर हर महीने कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए।
इसके अलावा, संस्थान के अध्यक्ष नीरज मातनहेलिया, सचिव श्याम बिहारी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष निकुंज मातनहेलिया, संयुक्त सचिव अनुज अग्रवाल सहित संस्थान के सभी शिक्षकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।



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