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Shailendra Singh
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पैक्ड फूड पर वार्निंग लेबल दिया जाए, कितना शुगर और हानिकारक फैट है स्पष्ट लिखें: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पैक्ड फूड को लेकर केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा कि वह तीन महीने के अंदर पैक्ड फूड पर चेतावनी वाली लेबलिंग को लेकर नए नियम बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘बच्चे पैकेट पर कंटेंट से ज्यादा रैपर के अंदर क्या है, वो देखते हैं। बच्चों को डिसाइड करने दीजिए कि रैपर कैसा होना चाहिए।’
कोर्ट ने ये आदेश एक PIL पर सुनवाई के दौरान दिया। ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ नाम की संस्था द्वारा दायर याचिका में अधिवक्ता राजीव शंकर द्विवेदी द्वारा यह मांग की गई थी कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर FOPL यानी कि फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबल प्रणाली लागू करें। यानी हर पैक्ड खाने की चीज पर फ्रंट पर साफ चेतावनी दी जाए। इससे लोग यह जान सकें कि उस चीज में कितना शुगर, नमक या हानिकारक फैट है।
तीन महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपने के आदेश
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि इस मुद्दे पर 14 हजार से ज्यादा सुझाव और रिपोर्ट्स आ चुकी हैं। इसके लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है, जो इन सुझावों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि अब विशेषज्ञ समिति को तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपनी होंगी, जिससे खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) विनियम 2020 में जरूरी संशोधन किए जा सकें।
ICMR ने दी थी चेतावनी
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के तहत हैदराबाद बेस्ड नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) ने भारतीयों के लिए डाइटरी गाइडलाइन जारी की है। उन्होंने कहा, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के सख्त मानदंड हैं, लेकिन लेबल पर दी गई जानकारी भ्रामक हो सकती है। कुछ उदाहरण देते हुए NIN ने कहा कि किसी फूड प्रोडक्ट को ‘नेचुरल’ कहा जा सकता है, यदि इसमें एडेड कलर्स, फ्लेवर्स और आर्टिफिशियल सब्सटेंसेस नहीं मिलाए गए हैं और यह मिनिमल प्रोसेसिंग से गुजरता है।
लेबल, इंग्रिडिएंट्स और अन्य जानकारी ध्यान से पढ़ना चाहिए
NIN ने कहा, ‘नेचुरल’ शब्द का अक्सर इस्तेमाल किया जाता है, भले ही पैक्ड फूड में केवल एक या दो नेचुरल चीजें शामिल हों। ऐसे में ये ये भ्रामक हो सकता है, इसलिए लोगों को सामग्री और अन्य जानकारी को ध्यान से पढ़ना जरूरी है। बेहतर सेहत के लिए पैक्ड फूड के लेबल पर किए गए दावों की अच्छे से जांच करें।



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