इंग्लैंड में वैभव सूर्यवंशी के लिए होगा अलग चेंजिंग रूम, ICC नियमों के तहत फैसला

इंग्लैंड में वैभव सूर्यवंशी के लिए होगा अलग चेंजिंग रूम, ICC नियमों के तहत फैसला

स्‍पोर्ट्स डेस्‍क: इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी टीम के बाकी खिलाड़ियों से अलग चेंजिंग रूम इस्तेमाल करेंगे। सूर्यवंशी के लिए यह फैसला आईसीसी और इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) की अंडर-16 खिलाड़ियों से जुड़ी सेफगार्डिंग पॉलिसी के तहत लिया गया है।

हालांकि, सूर्यवंशी मैचों के दौरान भारतीय प्लेयर्स के साथ रह सकेंगे और टीम मीटिंग्स का भी हिस्सा होंगे। उन्हें कपड़े बदलने के लिए अलग चेंजिंग रूम और वॉशरूम का इस्तेमाल करना होगा। ICC ने यह नियम 2019 में लागू किया था। भारत-आयरलैंड टी-20 सीरीज 26 जून से होनी है। इसके बाद एक जुलाई से भारतीय टीम इंग्लैंड में 5 टी-20 और 3 वनडे मैच खेलेगी।

फुटबॉलर मैक्स को अलग चेजिंग रूम मिला था

इंग्लिश क्लब आर्सेनल के फुटबॉलर मैक्स डोमैन को दिसंबर 2025 में टीम के अन्य खिलाड़ियों से अलग चेंजिंग रूम का इस्तेमाल करना पड़ता था। उस वक्त उनकी उम्र 15 साल थी।

क्रिकेट, फुटबॉल और ओलिंपिक में नाबालिग खिलाड़ियों के लिए नियम

क्रिकेट

16 साल से कम उम्र के खिलाड़ी वयस्कों के साथ चेंजिंग रूम शेयर नहीं कर सकते।

18 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों के लिए अलग चेंजिंग स्पेस होना अनिवार्य है।

फुटबॉल

बच्चों और वयस्कों के लिए अलग चेंजिंग रूम, शावर और टॉयलेट एरिया जरूरी है।

16 साल या उससे कम उम्र के खिलाड़ियों का वयस्क स्टाफ या सीनियर खिलाड़ियों के साथ वन-ऑन-वन संपर्क प्रतिबंधित है।

ओलिंपिक गेम्स

18 साल से कम उम्र के एथलीट किसी वयस्क एथलीट के साथ कमरा साझा नहीं कर सकते।

नाबालिग एथलीट केवल समान जेंडर के नाबालिग खिलाड़ी या माता-पिता के साथ ही कमरा साझा कर सकते हैं।

रग्‍बी

ड्रेसिंग रूम में हर समय दो ऑफिशियल स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य है।

18 साल से कम उम्र के खिलाड़ी के साथ कोच, फिजियो या सीनियर खिलाड़ी एक साथ कपड़े नहीं बदल सकते और न ही शावर का उपयोग कर सकते।

क्यों बने नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम?

खेलों में चाइल्ड सेफगार्डिंग नियम अचानक नहीं बने। सालों तक खेल अकादमियों, ड्रेसिंग रूम और ट्रेनिंग सेंटरों में नाबालिग खिलाड़ियों के साथ यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना के कई मामले सामने आए। इन ऐतिहासिक घटनाओं और बड़े घोटालों ने खेल जगत को हिला कर रख दिया, जिसके बाद फीफा, इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी को ‘लॉकर रूम बैन’ और ‘नो 1-ऑन-1’ जैसे सख्त नियम बनाने पड़े।

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