UP News: आवश्यकता पड़ने पर OTS योजना में संशोधन संभव, मंत्री नंदी ने दिया सुझाव
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मंत्री नन्द गोपाल ‘नंदी’ बोले– ऋण वितरण प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो
UP News: यूपी सरकार में मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों को प्रोत्साहन देने में उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वित्तीय सहायता योजनाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं निवेशक हितैषी बनाया जाए। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री नंदी ने उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम (यूपीएफसी) की समीक्षा बैठक को संबोधित किया। बैठक में उन्होंने निगम के कार्यों, ऋण वितरण, वसूली व्यवस्था तथा औद्योगिक इकाइयों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को ऋण वितरण की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि निवेशकों का विश्वास मजबूत हो सके। साथ ही लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन उद्यमियों ने ऋण लिया है, उनसे नियमित संवाद स्थापित कर वसूली व्यवस्था को भी व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाया जाए। मंत्री नंदी ने कहा कि वित्तीय निगम की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह उद्यमों को अधिक से अधिक सहयोग प्रदान करे, जिससे स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिल सके। मंत्री ने लोन रिकवरी में आ रही बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए साथ ही हर सम्भव सहायता प्रदान करने का आश्वासन भी दिया।
आवश्यकता हो तो ओटीएस में संशोधन करा लिया जाए
मंत्री ने निर्देशित किया कि बकायेदारों की प्रेच्छा के दृष्टिगत ओटीएस पाॅलिसी में आवश्यकता हो तो संशोधन करा लिया जाए, ताकि अधिक से अधिक प्रवर्तकों को ओटीएस का लाभ दिया जा सके। बैठक में अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना को अधिक प्रभावी एवं उद्योग हितैषी बनाने के लिए एक समुचित प्रस्ताव तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड तथा उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि सभी संबंधित पक्षों के हितों का समुचित ध्यान रखा जा सके। बैठक में बताया गया कि यूपीएफसी द्वारा अब तक लगभग 41,358 इकाइयों को दीर्घकालिक ऋण के रूप में करीब 3,249 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं, जिनमें से 2,900 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है। विगत 03 वर्षों में 119 प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है। जिससे 128.00 करोड़ रूपये की धनराशि का परिसमापन किया जा चुका है। निगम पिछले 03 वर्षों में शुद्ध लाभ अर्जित कर चुका है।



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