राजा रघुवंशी केस में सोनम की बेल पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल, कहा- टाइपिंग की गलती से गिरफ्तारी अवैध कैसे?

राजा रघुवंशी केस में सोनम की बेल पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल, कहा- टाइपिंग की गलती से गिरफ्तारी अवैध कैसे?

नई दिल्‍ली: इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी मर्डर केस में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने संकेत दिए कि वह इस कानूनी सवाल को बड़ी बेंच के पास भेज सकती है कि क्या गिरफ्तारी मेमो में केवल टाइपिंग की गलती (टाइपो) होने से गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है और आरोपी को जमानत मिल सकती है।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विस्तार से विचार करेगी। साथ ही यह भी जांचेगी कि क्या मेघालय हाईकोर्ट ने केवल टाइपिंग की गलती के आधार पर सोनम रघुवंशी को जमानत देकर सही फैसला किया था।

सरकार बोली- टाइपो के आधार पर जमानत देना गलत

मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि यह बेहद गंभीर और सुनियोजित हत्या का मामला है। ऐसे मामले में गिरफ्तारी मेमो में एक टाइपिंग की गलती के आधार पर जमानत देना कानून की गलत व्याख्या है।

उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध कराए गए थे। मेमो में गलत धारा का उल्लेख केवल एक लिपिकीय (क्लेरिकल) त्रुटि थी।

हाईकोर्ट ने क्यों दी थी जमानत?

मेघालय हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत इस आधार पर बरकरार रखी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार उपलब्ध नहीं करा सकी। अदालत ने यह भी कहा था कि गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या से जुड़ी धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403 लिख दी गई थी। हाईकोर्ट ने इसे जांच एजेंसी की “न्यायिक सोच के पूर्ण अभाव” का उदाहरण माना था।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगे मूल दस्तावेज

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के समय लिखित आधार देना कितना जरूरी है, इस पर अलग-अलग फैसले हैं और इस कानूनी सवाल पर स्पष्टता जरूरी है। अदालत ने मेघालय पुलिस को निर्देश दिया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को दिए गए मूल दस्तावेज की स्पष्ट प्रतियां पेश की जाएं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उस समय वास्तव में क्या जानकारी दी गई थी।

सुनवाई के दौरान जस्टिस मनोज मिश्रा ने मौखिक रूप से कहा कि यदि जमानत का तकनीकी आधार टिकाऊ नहीं पाया गया, तो जमानत आदेश भी रद्द हो सकता है।

सोनम ने खुद को बताया बेकसूर

इससे पहले सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर खुद को बेकसूर बताते हुए कहा था कि उसे झूठे तरीके से फंसाया गया है। अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है, जिन्हें अदालत में संदेह से परे साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी है। केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता इसीलिए अदालत के पास उसकी जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं है। वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है। वहीं, मेघालय सरकार ने उसकी जमानत रद्द करने की मांग की है।

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