उत्तर प्रदेश
राजनीति
Bareilly News, Bareilly SRMS, Bazm-e-Sukhan, Riddhima Bareilly, Shri Ram Murti Memorial Riddhima, SRMS, SRMS Bareilly, SRMS Riddhima, एसआरएमएस, एसआरएमएस बरेली, एसआरएमएस रिद्धिमा, बज़्म-ए-सुखन, बरेली एसआरएमएस, रिद्धिमा बरेली, श्रीराम मूर्ति स्मारक रिद्धिमा
Shailendra Singh
0 Comments
रिश्ते कायम हैं आज दौलत पर, मैं जाने किस गुमान पर हूं
बरेली: श्रीराम मूर्ति स्मारक रिद्धिमा में रविवार को मुशायरे की शाम बज़्म-ए-सुखन का आयोजन हुआ। इसमें बरेली, बदायूं, दिल्ली और आसपास के शायरों ने अपने कलाम से इश्क और मुहब्बत का तो जिक्र किया ही, अपने शेर में मां-बाप की व्यथा के साथ ही सामाजिक व्यवस्था को भी उजागर किया। मुशायरे का आगाज बरेली के शायर सलमान आरिफ़ ने अपने कलाम ‘या ख़ुदा, कैसे इम्तिहान में हूं, जमीं-बाज़ू में उड़ान में हूं, पत्थरों से भी दोस्ती कर ली, जब से मैं कांच के मकान में हूं, रिश्ते कायम हैं आज दौलत पर, मैं जाने किस गुमान पर हूं’ से किया। श्रोताओं ने तालियां बजा कर उनकी हौसला अफजाही की।
इसके बाद मंच संभाला बदायूं के शायर ज़ुबैर मिर्जा ने उन्होंने ‘जान कहते हैं तुमको तुम्हारे बिना, पाक कहते हैं तुमको तुम्हारे बिना, बोल सकता नहीं हूं मैं तुमको तुम्हारे बिना, बात कहता हूँ तुमको तुम्हारे बिना’ सुनाया। बरेली निवासी अभिषेक अग्निहोत्री ने अपने कलाम में सामाजिक व्यवस्था पर चोट किया। उन्होंने सुनाया, ‘जो सीधा है उसे उल्लू बनाकर, वो अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं, जिन्होंने भाव सस्ता कर रखा है, उन्हीं से दिल का सौदा कर रखा है,’। दिल्ली की शायरा मुस्कान मजीद ने अपने कलाम में मां-बाप का जिक्र किया। उन्होंने सुनाया ‘टुकड़ा जिगर का दे दिया मां- बाप ने, मगर बारात कह रही है खाना पसंद नहीं है, मुस्कान जब से रूठ के गया है मुझ से, वो उस दिन से मुझे सजना सबरना पसंद नहीं’।
बरेली के शायरों ने भी बांधा समां
बरेली के शायर बिलाल राज बरेलवी ने कलाम पढ़ा- ‘उसके नजदीक मेरा प्यार वफा कुछ भी नहीं, यानी अब जान लुटाने का सिला कुछ भी नहीं, तेरी बातें किसी नेता की तरह लगती हैं, सिर्फ वादे किये तूने, किया कुछ भी नहीं, हम फ़कीरों के पास कुछ नहीं देने को, बस दुआ है, दुआ के सिवा कुछ भी नहीं,’। दिल्ली के अभिनव अतीक ने ‘अब के अपनों के लिए अपनों से ही लड़ना, मुझ में डाले गए आदाव निकाले जाएं, कैसे जंगल के परिंदों की सहादत देखें, यहां से सूखे हुए तालाब निकाले जाए,’ पढ़ा और कद्रदानों की वाहवाही हासिल की।
मुशायरे की शाम बज़्म-ए-सुखन का संचालन अश्वनी चौहान ने किया। इस मौके पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, ऋचा मूर्ति, गुरु मेहरोत्रा, सुभाष मेहरा, डॉ. एमएस बुटोला, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. अनुज कुमार, डॉ. शैलेश सक्सेना, डॉ. मनोज टांगड़ी, डॉ. रीटा शर्मा सहित शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।



Post Comment