पीएम मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान, बोले- सेशेल्स से हमारा 256 साल पुराना रिश्ता

पीएम मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान, बोले- सेशेल्स से हमारा 256 साल पुराना रिश्ता

विक्टोरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार (28 जून) को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। साथ ही पीएम मोदी को अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है।

सम्मान मिलने पर प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का आभार जताया। उन्‍होंने सेशेल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित किया। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।

पीएम मोदी ने कही ये बात

पीएम मोदी ने कहा कि सेशेल्स से भारत का रिश्ता सिर्फ 50 साल पुराना नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत अगस्त 1770 में हुई थी। जब ‘थेलेमाक’ जहाज से यहां 5 भारतीय पहुंचे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब लोग दुनिया का नक्शा देखते हैं, तो उन्हें सेशेल्स हिंद महासागर में बसे कुछ छोटे-छोटे द्वीपों का एक समूह दिखाई देता है। लेकिन हमारे लिए सेशेल्स सिर्फ द्वीपों का समूह नहीं, बल्कि इससे कहीं बढ़कर है।

पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को अब तक 3 बड़े सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पर्यावरण की रक्षा, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने और लंबे समय तक पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में किए गए काम के लिए मिला है।

पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को अब तक 3 बड़े अवार्ड मिल चुके हैं। इससे पहले मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने उन्हें एग्रीकोला मेडल से सम्मानित किया था। संयुक्त राष्ट्र ने साल 2018 में प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ प्रदान किया था।

PM मोदी के सेशेल्स दौरे की खास बातें

गोल्डन जुबली नेशनल डे में मुख्य अतिथि

PM मोदी 29 जून को सेशल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी परेड और समारोह का हिस्सा बनेंगे।

175 मिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज

भारत ने सेशल्स के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1651 करोड़) के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा भारत ने सेशेल्स को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ‘पीएस लेस्पवार’ गिफ्ट किया।

नए समझौतों पर हस्ताक्षर

प्रत्यर्पण संधि: सुरक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समझौता हुआ।

स्वास्थ्य सेवा: भारत सेशेल्स में एक नेशनल हॉस्पिटल बनाने में मदद करेगा।

अंतरिक्ष और कृषि: अंतरिक्ष की खोज और कृषि के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने हाथ मिलाया है।

मोदी ने कोको डी मेर पौधा लगाया

कोको डी मेर का पौधा और इसका फल सिर्फ सेशल्स पर ही प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इसके फल के अंदर मिलने वाला बीज दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भारी बीज माना जाता है। एक अकेले बीज का वजन 15 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है। कोको डी मेर के नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। मादा फल महिला के कूल्हे जैसा दिखाई देता है। इसे ‘डबल कोकोनट’ भी कहा जाता है। वहीं, नर फूल पुरुष के जननांग जैसा दिखता है। इस अनूठी बनावट के कारण सदियों से इस पौधे को लेकर कई तरह की लोककथाएं और पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं।

इस पेड़ को वयस्क होने और फल देने में 20 से 40 साल का समय लगता है। एक फल को पूरी तरह पककर तैयार होने में 6 से 7 साल लग जाते हैं। यह पेड़ बेहद लंबी उम्र जीता है; माना जाता है कि ये 200 से 350 साल तक जीवित रह सकते हैं। प्राचीन काल में, जब यह फल समुद्र में तैरता हुआ मालदीव या भारत के तटों पर पहुंच जाता था, तो लोग सोचते थे कि यह समुद्र के तल में उगने वाले किसी जादुई पेड़ का फल है। इसी वजह से फ्रांसीसी भाषा में इसका नाम ‘कोको डी मेर’ पड़ा, जिसका अर्थ होता है समुद्र का नारियल।

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