दिल्ली दंगा केस में उमर-शरजील को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं, 5 आरोपियों को सशर्ते बेल
नई दिल्ली: दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (05 दिसंबर) को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, पांच अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं।
असल में, उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल 3 महीने से तिहाड़ में हैं। इन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था।
6 बार जमानत याचिका लगा चुका है उमर
उमर खालिद जमानत के लिए निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक 6 बार याचिका लगा चुका है। दिल्ली में फरवरी, 2020 में हिंसा भड़की थी। इसमें 53 लोगों की मौत हुई थी। 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 750 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें:
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद और जस्टिस एनवी अंजारिया ने फैसला सुनाया।
- अदालत ने कहा कि अभियोजन और सबूतों, दोनों के लिहाज से उमर खालिद और शरजील इमाम की स्थिति अन्य 5 आरोपियों की तुलना में अलग है। कथित अपराधों में इन दोनों की केंद्रीय (मुख्य) भूमिका रही है। इन दोनों की हिरासत (ज्यूडिशियल कस्टडी) की अवधि भले ही लंबी रही हो, लेकिन यह न तो संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है और न ही संबंधित कानूनों के तहत लगे वैधानिक प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करती है।
- बहस के दौरान लंबे समय तक जेल में रहने और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के बारे में दलीलें दी गईं। यह कोर्ट संविधान और कानून के बीच अमूर्त तुलना नहीं कर रहा है। अनुच्छेद 21 संवैधानिक व्यवस्था में एक खास जगह रखता है। ट्रायल से पहले जेल को सजा नहीं माना जा सकता। स्वतंत्रता से वंचित करना मनमाना नहीं होगा।
- UAPA एक खास कानून के तौर पर उन शर्तों के बारे में एक कानूनी फैसला दिखाता है जिनके आधार पर ट्रायल से पहले जमानत दी जा सकती है। राज्य की सुरक्षा और अखंडता से जुड़े अपराधों का आरोप लगाने वाले मुकदमों में देरी तुरुप का पत्ता नहीं हो सकती।
- 5 अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, मोहम्मद समीर खान, शादाब अहमद और शिफाउर रहमान को जमानत मिलने से उनके खिलाफ लगे आरोपों में कोई नरमी नहीं आती। उन्हें करीब 12 शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जाएगा। यदि शर्तों का उल्लंघन होता है, तो ट्रायल कोर्ट आरोपियों की सुनवाई के बाद जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगा।
- खालिद और इमाम की जमानत याचिका पर एक साल रोक रहेगी। यानी इस मामले में संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी हो जाएगी, या इस आदेश को एक साल पूरा हो जाएगा। इन दोनों में से जो पहले हो, तब आरोपी जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उमर खालिद ने कहा– अब जेल ही मेरी जिंदगी
उमर खालिद की साथी बानो ज्योत्सना लाहिरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उमर ने उनसे बातचीत में कहा- ‘जिन लोगों को जमानत मिली है, उनके लिए मैं बहुत खुश हूं। मुझे राहत है। अब तो जेल ही मेरी जिंदगी बन गई है। बानो ने यह भी लिखा कि जब उन्होंने उमर से कहा कि वह अगले दिन मुलाकात के लिए आएंगी, तो उमर ने जवाब दिया- ठीक है, आ जाना… अब तो यही मेरी जिंदगी है।’
खालिद को 6 जमानत याचिकाओं में से किसी में राहत नहीं
दिल्ली दंगा मामले में खालिद और शमीम समेत 7 आरोपियों को मई से सितंबर, 2020 में गिरफ्तार किया गया। तब से ये सभी जेल में हैं। इन पर आपराधिक साजिश, दंगा, गैरकानूनी सभा के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत कई अपराधों का आरोप लगाया गया है। खालिद ने जमानत के लिए निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक 6 बार याचिकाएं लगाईं। हर बार याचिका खारिज हो गईं।



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