Neet 2026: री-एग्जाम को लेकर उठी बड़ी मांग, सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका

Neet 2026: री-एग्जाम को लेकर उठी बड़ी मांग, सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका

Neet 2026: नीट 2026 परीक्षा को पेपर लीक होने के बाद रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही दोबारा परीक्षा के लिए नई तारीख का भी ऐलान कर दिया गया है। इस बीच नीट परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की गई है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान और राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन ने दाखिल की है। याचिका में NEET-UG 2026 परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग की गई है।

CBT मोड में परीक्षा कराने की मांग

याचिकाकर्ताओं ने NEET-UG की मौजूदा पेन-एंड-पेपर परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में बदलने की मांग की है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि “21 जून 2026 को प्रस्तावित री-कंडक्ट परीक्षा को पारंपरिक ऑफलाइन मोड के बजाय CBT मोड में आयोजित करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों को NEET-UG को पूरी तरह डिजिटल परीक्षा प्रणाली में बदलने के लिए समयबद्ध रोडमैप पेश करने को कहा जाए, जिसमें परीक्षा केंद्रों की तैयारी, साइबर सुरक्षा व्यवस्था और अभ्यर्थियों की पहुंच सुनिश्चित करने जैसे पहलू शामिल हों।”

NTA को हटाने की मांग

याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को हटाकर उसकी जगह एक नई, स्वतंत्र और पारदर्शी नेशनल एग्जामिनेशन अथॉरिटी गठित करने की भी मांग की है, जो कानूनी जवाबदेही और न्यायिक निगरानी के तहत काम करे। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति बनाने की अपील की गई है, जो राष्ट्रीय परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार सुझाए।

सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य करने की मांग

याचिका में यह भी मांग की गई है कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को सख्ती से लागू किया जाए और सभी राष्ट्रीय परीक्षाओं में एन्क्रिप्टेड डिजिटल पेपर ट्रांसमिशन, बायोमेट्रिक सत्यापन, AI आधारित निगरानी प्रणाली और कड़े साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य किए जाएं। प्रश्नपत्रों की “डिजिटल लॉकिंग” और CBT मॉडल अपनाने को पेपर लीक रोकने के लिए जरूरी कदम बताया गया है।

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