कपिल कनपुरिया ने ‘भौकाल’ शब्द को बताया बोगस, कहा- ये सब सबसे घटिया काम
शैलेंद्र सिंह
कानपुर के केशवपुरम निवासी कृष्ण कुमार शुक्ला (जो मुनीम का कार्य करते हैं) के परिवार को शायद ही अंदाजा था कि उनका बेटा कपिल शुक्ला एक दिन सोशल मीडिया की दुनिया में ‘कपिल कनपुरिया’ नाम का ब्रांड बन जाएगा। कपिल को बचपन से ही राजपाल यादव और राजू श्रीवास्तव जैसी मशहूर हस्तियों की मिमिक्री कर दोस्तों को हंसाने का शौक था। आज उनके इस सफर में उनकी माता पुष्पा शुक्ला और पत्नी कीर्ति शुक्ला भी कंधे से कंधा मिलाकर रील बनाने में साथ देती हैं, जिनके वीडियो आज फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर मिलियंस (लाखों) में देखे जाते हैं। परिवार में एक विवाहित बहन प्रीति भी हैं। हाल ही में लखनऊ में अपनी लोकप्रिय वेब सीरीज ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ सीजन 2 के प्रमोशन के दौरान कपिल कनपुरिया ने अपनी इस अनोखी जर्नी के अनुभव साझा किए:
सवाल: आप पहले भी एक्टिंग कर चुके हैं, फिर एक्टिंग से सोशल मीडिया की तरफ आने का कब और कैसे सोचा?
कपिल: एक्टिंग की दुनिया में सफलता या असफलता जैसा कुछ नहीं होता। अगर आप सच्चे एक्टर हैं, तो अपने क्राफ्ट को लेकर जुनून होना चाहिए ताकि असफलता का अहसास ही न हो। शादी और बच्चे के बाद, मैं परिवार को छोड़कर मुंबई नहीं भाग सकता था, इसलिए मैंने दिल्ली में जॉब शुरू की। फिर लॉकडाउन आया, और ‘वर्क फ्रॉम होम’ के बाद जो थोड़ा समय मिलता था, उसमें मैंने कंटेंट क्रिएशन की शुरुआत की।
सवाल: सोशल मीडिया को करियर चुनने के लिए आपने अपने परिवार को कैसे मनाया?
कपिल: परिवार ने बस यही कहा कि जो कुछ भी करना है घर आकर करो, हमें सब स्वीकार है। मैं कभी भी ऐसा ‘फूहड़’ कंटेंट नहीं बनाना चाहता था, जिससे परिवार को शर्मिंदा होना पड़े। शुरुआत में जब फाइनेंस कंपनी की अच्छी-खासी जॉब छोड़ी, तो लोगों ने ताने भी दिए कि ‘यह क्या कर रहा है!’ लेकिन मेरा अंतिम लक्ष्य सिनेमा और एक्टिंग ही था, और आज कंटेंट क्रिएशन की बदौलत मैं ओटीटी (OTT) तक पहुंच गया।
सवाल: कानपुर में एक शब्द बहुत चलता है- ‘भौकाल‘। आपको कब लगा कि सोशल मीडिया पर आपका भौकाल सेट हो गया है?
कपिल: मेरे नजरिए में ‘भौकाल’ सबसे बोगस (व्यर्थ) शब्द है। कट्टा लहराना, गाड़ियां बड़ी करना, नेता-नगिरी करना या वर्चस्व दिखाने के लिए किराए के लड़के लाना बेहद घटिया काम है। मैं तो बड़े इवेंट्स में भी जाने से बचता हूं। ‘ठुकरा के मेरा प्यार सीजन 2’ के प्रमोशन का यह मेरा सिर्फ दूसरा इवेंट है। इनविटेशन बहुत आते हैं, पर मुझे ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ पसंद है। हमारे कंटेंट में भौकाल के लिए कोई जगह नहीं है।
सवाल: क्या कंटेंट लिखते या बनाते समय कभी माताजी या पत्नी ने आपके किसी डायलॉग में बदलाव किया है?
कपिल: नहीं, लेखन का पूरा काम मेरा ही होता है। हर एक डायलॉग मैं खुद लिखता हूं। हां, वीडियो बनाते समय कभी-कभी मैं उनकी मदद जरूर लेता हूं, जिसमें मम्मी और पत्नी के कुछ छोटे-मोटे इनपुट्स शामिल होते हैं।
सवाल: सोशल मीडिया पर खुद का कंटेंट बनाने और ओटीटी (OTT) वेब सीरीज में एक्टिंग करने के अनुभव में क्या अंतर है?
कपिल: कंटेंट क्रिएशन में स्क्रिप्टिंग से लेकर एक्टिंग और एडिटिंग तक सारा काम मुझे अकेले ही करना पड़ता है। इसके विपरीत, ओटीटी (OTT) पर सिर्फ एक ही काम होता है- डायलॉग पढ़ो और कैमरे के सामने एक्टिंग करो। इसलिए अपना कंटेंट बनाने की तुलना में ओटीटी पर काम करना 10 गुना कम मेहनत वाला है।
सवाल: फिल्म इंडस्ट्री में आपका पसंदीदा एक्टर कौन है, जिसे आप कनपुरिया भाषा सिखाना चाहेंगे?
कपिल: इंडस्ट्री में मेरे सबसे पसंदीदा अभिनेता मनोज बाजपेयी जी हैं। उन्हें कनपुरिया भाषा सिखाने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे तो हमसे भी ज्यादा ‘हिट’ कनपुरिया बोलते हैं। मुझे उनके साथ कुछ समय व्यतीत करने का मौका मिला है, जो बेहतरीन अनुभव था।

सवाल: कानपुर-लखनऊ की ऐसी कौन सी आदत या चीज है, जो बाहरी लोगों को अजीब (एलियन जैसी) लग सकती है?
कपिल: ‘मट्ठा-बन’ और ‘बन-मक्खन’ जो हम कानपुर के लोग सुबह-सुबह खाते हैं, वह कहीं और नहीं मिलेगा। इसके अलावा, सुबह-सुबह ‘दही-जलेबी’ खाने की आदत पर भी बाहर के लोग हैरान हो जाते हैं कि ये लोग सुबह मीठा और दही कैसे खा लेते हैं। यह बात कानपुर और लखनऊ दोनों पर लागू होती है।
सवाल: आजकल सोशल मीडिया पर आ रहे नए कंटेंट क्रिएटर्स के लिए आपका क्या संदेश है?
कपिल: भेड़चाल में आकर क्रिएटर मत बनिए। जब दिल से इच्छा हो, तभी इस फील्ड में आएं। सोशल मीडिया पर 99% से ज्यादा असफलता मिलती है, इसलिए सिर्फ सफलता की उम्मीद लेकर न आएं। अगर यह आपका पैशन है, तभी करते रहें, इससे आपको खुशी मिलेगी। साथ ही अपने अंदर स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) जरूर करते रहें, ताकि बैकअप के तौर पर आप कुछ और काम भी कर सकें।



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