जोधा अकबर में दिखा प्रेम आस्था और सांस्कृतिक समन्वय का भव्य डांस ड्रामा

जोधा अकबर में दिखा प्रेम आस्था और सांस्कृतिक समन्वय का भव्य डांस ड्रामा

बरेली: एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार शाम नृत्य नाटिका ‘जोधा अकबर’ का मंचन हुआ। रिद्धिमा के कथक गुरुजन और विद्यार्थियों की इस नृत्य नाटिका में ‘जोधा अकबर’ की कहानी के माध्यम से प्रेम, विश्वास और सांस्कृतिक एकता की गाथा को मंचित किया गया। नाटक में दर्शाया गया कि राजपूत राजकुमारी जोधा भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त हैं, जबकि सम्राट अकबर इस्लाम धर्म के अनुयायी हैं। दोनों के बीच विचारों का अंतर होने के बावजूद उनके संबंधों में प्रेम, सम्मान और समझ की भावना बनी रहती है।

प्रस्तुति का आरंभ राजमहल के भव्य दृश्य से होता है, जहां राजपूताना संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक नृत्य ने दर्शकों को मुगलकालीन वातावरण का अनुभव कराया। जोधा के कृष्ण भक्ति से जुड़े दृश्यों में मनमोहक नृत्य, भजन और भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। वहीं अकबर के दरबार के दृश्यों में शाही गरिमा, सूफियाना संगीत और मुगल संस्कृति की झलक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत की गई।

मनुष्‍य को जोड़ने का माध्‍यम है धर्म

नृत्य नाटिका में अकबर के दरबार में मौलवियों और पंडितों के बीच धार्मिक मान्यताओं पर बहस भी दिखाई गई, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने धर्म और परंपराओं को श्रेष्ठ सिद्ध करने का प्रयास करते हैं। यह बहस धीरे-धीरे विवाद में बदलती है और महल का वातावरण तनावपूर्ण हो जाता है। इस दृश्य को कलाकारों ने अत्यंत जीवंत अभिनय, संवाद अदायगी और नाटकीय प्रस्तुति के माध्यम से प्रभावशाली बनाया। इसके बाद अकबर और महारानी जोधा दोनों पक्षों को यह समझाने का प्रयास करते हैं कि धर्म मनुष्य को जोड़ने का माध्यम है, विभाजन का नहीं। अकबर संदेश देता है कि कि ‘ईश्वर तक पहुंचने के मार्ग अलग हो सकते हैं, परंतु उद्देश्य मानवता और प्रेम ही है’।

नाटक के अंतिम दृश्य में पंडित और मौलवी आपसी समझ, सम्मान और सहमति के साथ विवाद को समाप्त करते हैं। अकबर के दरबार में कथक के विद्यार्थियों ने गीत केसरिया बालमा और सुंदर गोरी रे को प्रस्तुत किया। दरबार में अकबर और जोधा को भी नृत्य करते दिखाया गया। वहीं दोनों के विवाह पर कथक के विद्यार्थियों ने छाप तिलक सब छीनी रे, जोधा के कृष्ण आराधना और ख्वाजा मेरे ख्वाजा गीत पर नृत्य किया। नृत्य नाटिका में अकबर की भूमिका कथक गुरु देवज्योति नास्कर और जोधा की भूमिका कथक गुरु रियाश्री चटर्जी ने निभाई। जोधा के बचपन के रोल में नितारा लूथरा मंच पर आईं। अकबर के दरबार में नृत्यांगना के रूप में मंच पर कथक के विद्यार्थी अंशु शर्मा, गौरिका, अवनी भसीन, अवनी अग्रवाल, कायरा, अनाया, विवक्षा, युतिका, त्रिशिका, आयत, नवाया, नित्या, मीरा, गुरनूर, क्षमा, तृप्ता, मधुर और निधि ने मंच संभाला।

कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी

देविशा मूर्ति ने सूत्रधार के रूप में दर्शकों के समक्ष नृत्य नाटिका को प्रस्तुत किया। गायन गुरु प्रियंका ग्वाल और सात्विक मिश्रा ने अपने स्वरों के जरिए और इंस्ट्रूमेंट गुरु सूर्यकांत चौधरी (वायलिन), अनुग्रह सिंह (ड्रम), विशेष सिंह (गिटार), ऋषभ आशीष पाठक (तबला) और डैरिक अमन जेम्स (कीबोर्ड) ने अपने वाद्ययंत्रों के जरिए उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम का संचालन अरुणा गंगवार ने किया। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, ऋचा मूर्ति, उषा गुप्ता, डॉ. रजनी अग्रवाल, सुभाष मेहरा, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. अनुज कुमार, डॉ. शैलेश सक्सेना, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. रीता शर्मा और शहर के गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।

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