SRMS मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी- ‘बीमारियों का पैकेज है मोटापा, कम करें पेट की चर्बी’
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एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में 24वीं वर्षगांठ पर युवा स्वास्थ्य मेला जारी, तीसरे दिन भी उमड़ी भारी भीड़
बरेली: श्री राम मूर्ति स्मारक (SRMS) मेडिकल कॉलेज की 24वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित चार दिवसीय ‘युवा स्वास्थ्य मेला’ के तीसरे दिन शुक्रवार को स्वास्थ्य जांच कराने वालों का तांता लगा रहा। मेले में नि:शुल्क जांच का लाभ उठाने वाले युवाओं की कुल संख्या अब 3.5 हजार (3500) के पार पहुंच गई है। गौरतलब है कि पहले दिन एक हजार और दूसरे दिन डेढ़ हजार से ज्यादा युवा इस मेले का लाभ उठाने पहुंचे थे। तीसरे दिन आयोजित जागरूकता परिचर्चा में चिकित्सकों ने सीधे तौर पर मोटापे को बीमारियों का पैकेज बताया। डॉक्टरों ने कहा कि पेट की चर्बी कम करे बगैर स्वस्थ होने की बात करना नासमझी है, इसे दूर करके ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला रखी जा सकती है।
रात में अंधेरे कमरे में रील्स देखना छीन रहा आंखों की रोशनी: डॉ. नीलिमा
आप्थैल्मोलॉजी (आंख) विभाग की प्रमुख डॉ. नीलिमा मेहरोत्रा ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली से शरीर के सभी अंग प्रभावित हैं और आंखें भी इससे अछूती नहीं हैं। उन्होंने बताया कि आंखों का सबसे बड़ा दुश्मन मोबाइल है। अनजाने में मां-बाप द्वारा छोटे बच्चों को मोबाइल थमाना, उन्हें चश्मा लगने का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। रात में बिस्तर पर सोने से पहले अंधेरे कमरे में मोबाइल पर रील देखना आंखों की रोशनी को छीन रहा है। इससे बचने के लिए मोबाइल का कम से कम इस्तेमाल करें और सोने से दो घंटे पहले इसे खुद से दूर रख दें। अगर आपकी आंखें सूखी या लाल हो रही हैं, या उनमें से पानी आता है तो तुरंत सावधान हो जाएं।
डॉ. नीलिमा ने मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल करने वालों को ’20-20-20 का मंत्र’ दिया। उन्होंने कहा कि हर 20 मिनट मोबाइल का इस्तेमाल करने के बाद 20 सेकंड के लिए कम से कम 20 मीटर (या फीट) की दूरी पर देखना चाहिए और समय-समय पर आंखों में साफ पानी के छींटे मारना जरूरी है।

इयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल और देर से शादी करने के बड़े नुकसान
परिचर्चा में आगे बढ़ते हुए ईएनटी स्पेशलिस्ट (नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ) डॉ. अम्बालिका सिंह ने इयरफोन लगाकर लगातार मोबाइल के इस्तेमाल पर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इससे कान की नसें हमेशा के लिए कमजोर हो जाती हैं और इसका चिकित्सा विज्ञान में कोई इलाज भी नहीं है। ऐसे में इयरफोन लगाकर भी मोबाइल की आवाज को कम से कम रखें। स्पीकर की आवाज सिर्फ इतनी होनी चाहिए कि आपके पड़ोस में बैठा व्यक्ति उसे न सुन पाए।
वहीं, गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. कनीज फातिमा ने बदलती लाइफस्टाइल की वजह से समाज में बढ़ रही ज्यादा उम्र में विवाह की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ज्यादा उम्र के विवाह में पति-पत्नी के साथ-साथ होने वाले बच्चों को भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होना आम बात है। अधिक उम्र में होने वाले बच्चों में ‘डाउन सिंड्रोम’ (एक तरह का आनुवंशिक विकार) होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। ऐसे में स्वास्थ्य के नजरिए से 30 वर्ष की उम्र तक विवाह करना ही सबसे उचित है।

तनाव, वैक्सीन और मोटापे को लेकर डॉक्टरों की महत्वपूर्ण सलाह
मन की बीमारियां: मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. रूपाली रोहतगी ने जीवन शैली बिगड़ने से होने वाली मानसिक बीमारियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिस तरह शारीरिक बीमारियां होती हैं, वैसे ही मन भी बीमार होता है। बिगड़ती जीवन शैली के कारण युवाओं में स्ट्रेस, डिप्रेशन और तनाव लगातार बढ़ रहा है। इससे बचने के लिए अपनी लाइफस्टाइल सुधारें और जरूरत पड़ने पर योग्य चिकित्सक का परामर्श जरूर लें।
वयस्कों के लिए भी वैक्सीन जरूरी: फिजिशियन डॉ. दीपक दास ने जीवन शैली से संबंधित बीमारियों में टीकाकरण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस बी, निमोनिया और हरपीज जैसी गंभीर बीमारियों के लिए बेहतरीन वैक्सीन उपलब्ध हैं और वयस्कों को ये वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए। इसके साथ ही डॉ. दीपक ने मोटापे को बीमारियों का पैकेज बताते हुए पेट की चर्बी को कम करने की सलाह दी और युवाओं को ‘रील लाइफ से रियल लाइफ’ की ओर लौटने का संदेश दिया।
योग और कसरत: फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. शिवांग चौधरी ने युवाओं को एक्सरसाइज और योग को अपनी दिनचर्या में नियमित रूप से शामिल करने की सलाह दी, ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट रह सकें।



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