मनरेगा स्कीम की जगह लेगा ‘विकसित भारत-G RAM G’, नया बिल ला रही मोदी सरकार

मनरेगा स्कीम की जगह लेगा 'विकसित भारत-G RAM G', नया बिल ला रही मोदी सरकार

नई दिल्‍ली: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) को मोदी सरकार खत्म करके अब नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने जा रही है। इसे मौजूदा शीतकालीन सत्र में चर्चा के लिए सूचीबद्ध भी किया गया है। बिल की कॉपी सोमवार (15 दिसंबर) को लोकसभा सांसदों के बीच सर्कुलेट की गई है। इसका नाम ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025’ रखा गया है।

नए बिल में कहा गया है कि इसका उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है। काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी जाएगी। वहीं, कांग्रेस ने सरकार के फैसले का विरोध किया है। सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम क्यों हटाया जा रहा?

VB-G Ram G Bill-2025 की 3 खासियतें

  • रोजगार की गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन होगी।
  • पहले खर्चा केंद्र उठाता था। अब राज्यों को भी 10 से 40 फीसदी तक पैसा देना होगा।
  • बोवाई/कटाई (60 दिन) के समय रोजगार नहीं, ताकि मजदूर उपलब्ध रहें।

इससे पहले 12 दिसंबर को खबर आई थी कि केंद्रीय कैबिनेट ने मनरेगा का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना रखा है। हालांकि, सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन सामने नहीं आया था।

सामाजिक-आर्थिक बदलावों को देखते हुए फैसला

बिल में लिखे हुए उद्देश्य के अनुसार, बीते 20 वर्षों में MGNREGA ने ग्रामीण परिवारों को रोजगार दिया, लेकिन गांवों में हुए सामाजिक-आर्थिक बदलावों को देखते हुए इसे और मजबूत करना जरूरी है। नए कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को, जो बिना कौशल वाला काम करने को तैयार हो, हर साल 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा। इसका मकसद विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप गांवों का समग्र विकास करना है।

जानिए क्या है MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम)?

  • शुरुआत: साल 2005 में देशभर में लागू हुआ।
  • उद्देश्य: ग्रामीण इलाकों में हर परिवार को कम से कम 100 दिन का रोजगार देना।
  • किसे मिलता है काम?: 18 साल से ऊपर का कोई भी ग्रामीण व्यक्ति आवेदन कर सकता है।
  • काम का प्रकार: सड़क, तालाब, नहर, खेतों की मेड़, जल संरक्षण जैसे काम।
  • कानूनी अधिकार: काम देना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी है।
  • मजदूरी भुगतान: मजदूरी सीधे बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते में जाती है।
  • काम न मिले तो भत्ता: 15 दिन में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान।
  • महिलाओं की भागीदारी: कम से कम एक-तिहाई कामगार महिलाएं होनी चाहिए।
  • निगरानी: सोशल ऑडिट के जरिए काम और भुगतान की जांच होती है।

प्रियंका बोली थीं- नाम बदलने का तर्क समझ नहीं आता

जब मनरेगा के नाम बदलने की जानकारी सामने आई थी, तब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा था कि उन्हें MGNREGA योजना का नाम बदलने के फैसले के पीछे का तर्क समझ नहीं आता। इससे फिजूल खर्च होता है।

उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि इसके पीछे क्या मानसिकता है? सबसे पहले, यह महात्मा गांधी का नाम है और जब इसे बदला जाता है, तो सरकार के संसाधन फिर से इस पर खर्च होते हैं। ऑफिस से लेकर स्टेशनरी तक, सब कुछ का नाम बदलना पड़ता है, इसलिए यह एक बड़ी, महंगी प्रक्रिया है। तो ऐसा करने का क्या फायदा है?

कांग्रेस ने कहा था- मोदी सरकार ने हमारी 32 योजनाओं के नाम बदले

कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने मनरेगा का नाम बदले जाने पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने MGNREGA का नाम बदल कर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार स्कीम रखा है। इसी मनरेगा को मोदी कांग्रेस की विफलताओं का पुलिंदा बताते थे लेकिन असलियत यह है कि यही मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी साबित हुआ।

कांग्रेस की स्कीमों का नाम बदल कर उनको अपना बना लेने की मोदी जी की यह लत बड़ी पुरानी है यही तो किया है उन्होंने 11 साल, UPA की स्कीमों का नाम बदल अपना ठप्पा लगा कर पब्लिसिटी करना। सुप्रिया ने X पर उन योजनाओं के नाम शेयर किए, जिन्हें कांग्रेस ने शुरू किया था। साथ ही दावा किया है कि इनके नाम बदले गए हैं।

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