अली खामेनेई के जनाजे में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़, ताबूत देखते ही रो पड़े लोग

अली खामेनेई के जनाजे में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़, ताबूत देखते ही रो पड़े लोग

इंटरनेशनल डेस्‍क: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शनिवार को तेहरान की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। छह दिन तक चलने वाले इस अंतिम संस्कार के पहले दिन ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में सुबह से ही लाखों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। अधिकारियों का अनुमान है कि पूरे कार्यक्रम में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं।

खामेनेई का ताबूत ईरानी झंडे में लपेटकर मंच पर रखा गया था। उनके साथ हमले में मारे गए परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत भी रखे गए। ताबूत देखते ही कई लोग रो पड़े और कई श्रद्धालु फूट-फूटकर बिलखते नजर आए। इस दौरान भीड़ लगातार ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजराइल पर खुदा का कहर’ के नारे लगाती रही। कई लोग बदला लेने की मांग वाले पोस्टर लेकर पहुंचे।

अली खामेनेई के जनाजे में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़, ताबूत देखते ही रो पड़े लोग

06 जुलाई को अंतिम संस्‍कार  

अंतिम यात्रा 06 जुलाई को तेहरान से निकलेगी। इसके बाद पार्थिव शरीर 07 जुलाई को कोम, 08 जुलाई को इराक के नजफ और करबला और 09 जुलाई को मशहद ले जाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया जाएगा।

खामेनेई के जनाजे को लेकर बड़े अपडेट्स

  • अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए।
  • अंतिम संस्कार को देखते हुए सेना और पुलिस की भारी तैनाती की गई। मेट्रो और सरकारी बसें मुफ्त रहीं, होटलों में 50% तक छूट दी गई, 5,000 से ज्यादा स्कूलों में ठहरने की व्यवस्था की गई और दूसरे शहरों से विशेष ट्रेनें चलाई गईं।
  • अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू होकर क़ोम, इराक के करबला और नजफ होते हुए 09 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
  • अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका-ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता फिलहाल रोक दी गई है। साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने मानवीय आधार पर ईरान को अंतिम संस्कार पूरा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद ईरान को अमेरिकी शर्तें माननी होंगी।

इमाम रजा की दरगाह खास क्यों है, जहां खामेनेई को दफनाया जाएगा?

शिया संप्रदाय के कुल 12 पवित्र इमामों में से इमाम रजा एकमात्र ऐसे इमाम हैं जिन्हें ईरान की धरती पर दफनाया गया है। बाकी के सभी इमाम या तो सऊदी अरब (मदीना) में हैं या इराक (नजफ, करबला, सामर्रा) में। इमाम रजा शिया इस्लाम के आठवें इमाम माने जाते हैं। उनकी बढ़ती लोकप्रियता से डरकर तत्कालीन शासक अब्बासी खलीफा ने जहर देकर हत्या करा दी थी।

जहां इमाम रजा को दफनाया गया, उस जगह का नाम बाद में ‘मशहद’ (शहीद होने की जगह) पड़ गया, जो आज ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। मशहद शिया मुसलमानों के लिए मक्का, मदीना और करबला के बाद सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यहां हर साल दुनिया के कई देशों से लाखों शिया श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

खामेनेई की हत्या के बाद ईरान की नई रणनीति

अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान ने अपनी सुरक्षा और सैन्य नीति में बड़ा बदलाव किया है। नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में तेहरान अब पहले के मुकाबले ज्यादा आक्रामक रुख अपनाता दिख रहा है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं करा सके, लेकिन इस युद्ध ने ईरान की रणनीति जरूर बदल दी। अब ईरान का लक्ष्य यह संदेश देना है कि उस पर दोबारा हमला हुआ तो जवाब पूरे क्षेत्र में मिलेगा। नई रणनीति के तहत होर्मुज स्ट्रेट को सबसे बड़ा दबाव का हथियार माना जा रहा है। ईरान संकेत दे चुका है कि अगर उसके यहां शांति नहीं रहेगी तो दुनिया के लिए तेल की आपूर्ति भी सामान्य नहीं रहने दी जाएगी।

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