स्वगणना से राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें नागरिक: आईएएस शीतल वर्मा

स्वगणना से राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें नागरिक: आईएएस शीतल वर्मा
  • जनगणना अधीक्षक एवं निदेशक यूपी शीतल वर्मा सेस्वगणना’ से संबंधित विशेष साक्षात्कार

अभिषेक पाण्डेय

लखनऊ। भारत की विकास यात्रा में जनगणना वह आधारशिला है, जिस पर नीतियां आकार लेती हैं और जनकल्याणकारी योजनाएं गति पाती हैं। उत्तर प्रदेश में जनगणना के पहले चरण में 22 मई से हाउस सर्वे शुरू होगा, जो 22 जून तक चलेगा। इससे पहले 07 से 21 मई तक स्वगणना हो रही है। इन 15 दिनों में लोग अपना पूरा ब्योरा खुद ही ऑनलाइन भर सकते हैं। आपको यह भी बता दें कि पहली बार ऐसा होगा, जब जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से करवाई जाएगी। प्रदेश में स्वगणना की प्रक्रिया नागरिकों को जनगणना से सीधे जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ रही है। यह पहल न केवल आंकड़ों की सटीकता बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि जनभागीदारी को सशक्त कर प्रशासन और नागरिक के बीच विश्वास की नई कड़ी भी स्थापित करती है। स्वगणना के जरिए लोग स्वयं अपनी बुनियादी जानकारी दर्ज कर विकास की भावी रूपरेखा गढ़ने में योगदान दे रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य स्पष्ट है- सही, अद्यतन और विश्वसनीय डेटा के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना।

उत्तर प्रदेश में इस महाअभियान (जनगणना) की कमान संभाल रहीं आईएएस शीतल वर्मा (जनगणना अधीक्षक एवं निदेशक), इस प्रक्रिया की पारदर्शिता, गोपनीयता और उपयोगिता पर स्पष्ट दृष्टिकोण रखती हैं। उनके साथ हुए इस विशेष साक्षात्कार में जनगणना के महत्व, नागरिकों की भूमिका, डेटा सुरक्षा के कड़े प्रावधानों और सटीक आंकड़ों के आधार पर योजनाओं की प्रभावशीलता पर गहन चर्चा की गई है। शीतल वर्मा का कहना है कि यह केवल एक सरकारी कवायद नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की ठोस रूपरेखा तैयार करने का उपक्रम है। पढ़िए इस विशेष साक्षात्कार के प्रमुख अंश…

आईएएस शीतल वर्मा
आईएएस शीतल वर्मा

सवाल: उत्तर प्रदेश में चल रही स्वगणना प्रक्रिया को आप किस रूप में देखती हैं? यह पारंपरिक जनगणना से किस प्रकार भिन्न और अधिक प्रभावी है?

जवाब: नागरिकों को पहली बार ऐसा अवसर प्राप्त हुआ है, जिसके तहत जनगणना की प्रश्नावली को वे स्वंय भर सकते हैं। पहले, यह शिकायत बार-बार सामने आती थी कि प्रगणक ने डाटा को सही तरीके से नहीं भरा, या फिर उसने किसी का घर छोड़ दिया। हमारे डोर-टू-डोर सर्वे की शुरुआत होने से पहले नागरिकों को यह सुविधा मुहैया कराई गई है कि वे स्वंय अपनी डिटेल्स भर लें। इससे यह भी होगा कि प्रगणक को सर्वे करने में कम समय लगेगा, बस नागरिकों को 11 अंकों का एक सीरीज नंबर प्रगणक को मुहैया कराना होगा। इससे डाटा अपने आप फेच हो जाएगा और केवल संशोधन की गुंजाइश रहेगी। बिना किसी डर से हर नागरिक गोपनीयता के साथ डाटा मुहैया करा सकता है।

 

सवाल: स्वगणना के लिए डिजिटल माध्यम अपनाया गया है। ग्रामीण और तकनीकी रूप से कम सशक्त वर्गों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने क्या विशेष रणनीतियां बनाई हैं?

जवाब: अधिकांश जनपदों (सोनभद्र, औरैया, मैनपुरी, पीलीभीत आदि) में स्व-गणना का रिजल्ट काफी अच्छा रहा है। हमारा शुरू से ही यही उद्देश्य रहा है कि कोई यह न कह सके कि हम करना चाह रहे थे, लेकिन तकनीकी ज्ञान न होने के कारण हम कर नहीं पाए। पंचायत सहायक, सेक्रेटरी आदि के माध्यमों से सभी जनपदों में ग्राम सभी की बैठकें आयोजित की गई हैं। स्व-गणना में तेजी के लिए रोजाना के लिहाज से विभाग, समूह और जनसंख्या समूह तय किए गए हैं। इस दौरान सरकारी विभागों और कार्यालयों में सुविधा डेस्क बनाई गई। जनजागरण अभियान भी चलाया गया। इससे यह भी सुनिश्चित किया गया कि अगर कोई स्व गणना करना चाहे तो वे पंचायत सहायक, सेक्रेटरी आदि के लैपटॉप व स्मार्टफोन की मदद से ये कार्य कर सकता है। डिजिटल बैरियर न रहे, यह सभी प्रयास इसी के लिए किये गए हैं।

 

सवाल: जनगणना के आंकड़े नीतियों और योजनाओं की रीढ़ माने जाते हैं।  ऐसे में स्वगणना से प्राप्त डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं?

जवाब: स्व-गणना के तहत नागरिकों को उन्हीं सवालों के जवाब देने हैं, जिन सवालों को लेकर प्रगणक आपके घर आएगा। जनगणना में हम कभी कोई डॉक्यूमेंटेशन नहीं मांगते हैं। हमें आप जो बताते हैं और जो हमें दिखता है, उसी के आधार पर डेटा तैयार किया जाता है। अगर स्व-गणना में आपसे कोई गलती हो भी जाती है तो प्रगणक के पास संशोधन करने प्रावधान हे। 11 अंकों की सीरीज नंबर बताए जाने पर प्रगणक एक बार पुन: आपसे डेटा चेक कराएगा और उसी समय संशोधन की प्रक्रिया भी चलेगी। यहां एक बात और बतानी जरूरी है कि प्रगणक को भी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे डेटा की सटीकता सुनिश्चित हो सके।

 

सवाल: अक्सर देखा जाता है कि लोग व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में संकोच करते हैं। नागरिकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर आप क्या आश्वासन देना चाहेंगी?

जवाब: यह सबसे जरूरी प्रश्न है और इसका उत्तर देना भी जरूरी है। आम नागरिकों के मन में बहुत सारी भ्रांतियां हैं, जैसे- शायद जनगणना का डाटा टैक्स के लिए इस्तेमाल होगा। जनगणना का डाटा, नीतियां बनाने का आधार है। जनगणना का डाटा पूर्ण रूप से गोपनीय रखा जाता है। प्रगणक के अलावा कोई भी आपका डाटा नहीं देख सकता है।

 

सवाल: क्या स्वगणना प्रक्रिया से जनभागीदारी में अपेक्षित वृद्धि देखने को मिल रही है? अब तक का अनुभव और प्रतिक्रिया कैसी रही है?

जवाब: अन्य प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश में जनसहभागिता में ऐतिहासिक वृद्धि देखने को मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सहायकों के माध्यम से नागरिकों ने अच्छी खासी संख्या में स्व-गणना की है। शाहजहांपुर से जानकारी प्राप्त हुई है कि कुछ ब्लाकों में शत-प्रतिशत स्व गणना की गई है। सबसे ज्यादा चुनौती बड़े शहरों में सामने आती है, जहां पति-पत्नी, दोनों ही वर्किंग होते हैं। ऐसे में जब प्रगणक घर पहुंचता है तो वहां कोई नहीं मिलता है। ऐसे दंपतियों के लिए स्व-गणना काफी लाभकारी है। हमारी कोशिश है कि प्रदेश के सभी नगर निगमों में ज्यादा से ज्यादा लोग स्व-गणना प्रक्रिया को अपना लें, जिससे जब प्रगणक उनके घर आए तो केवल उसे कोड मिल जाए, जिससे आगे की प्रक्रिया काफी हद तक सरल हो जाए।

 

सवाल: आप प्रदेश के नागरिकों से क्या अपील करना चाहेंगी ताकि वे स्वगणना में सक्रिय भागीदारी निभायें और यह प्रक्रिया सफल हो सके?

जवाब: प्रदेश के समस्त नागरिकों से यही अनुरोध है कि जनगणना हमारा राष्ट्रीय दायित्व है। अगर हम सही डाटा उपलब्ध कराएंगे तो हमारे देश की नीतियां और सटीक तरीके से बनेंगी और उनका सही रूप में क्रियान्वन होगा। स्व-गणना के अवसर को अपनाएं, स्वंय 34 प्रश्नों के उत्तर दें और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित करें।

 

सवाल: उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में जनगणना की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित करना बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन ने कौनकौन से विशेष प्रबंधन और नवाचार अपनाए हैं?

जवाब: इस बार पूरे देश में डिजिटल जनगणना कराई जा रही है। ऐप के माध्यम से डिजिटली आपका डाटा एकत्रित किया जाएगा। ये अपने आप में नवाचार का सबसे बड़ा उदहारण है। स्व-गणना भी नवाचार का ही एक हिस्सा है। छह लाख प्रगणक इस कार्य को अंजाम देंगे। 20 हजार के करीब पर्यवेक्षक अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा प्रशासनिक कार्य है। हमारी ये जिम्मेदारी है कि कोई भी व्यक्ति छूटने न पाए।

ऐसे होगी स्वगणना

  • www.se.census.gov.in खोलें। राज्य में यूपी चुनें। कैप्चा भरें।

  • परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर फीड करें। ई-मेल का भी विकल्प होगा।

  • मोबाइल पर आया ओटीपी फीड करें।

  • पता भरें, जिसमें जिला, पिन कोड और गांव, शहर या मोहल्ला बताएं।

  • मैप पर घर की लोकेशन मार्क करें।

  • परिवार के सदस्यों और घर से जुड़ी जानकारी फीड करें।

  • ब्योरे की जांच करें। गलती है तो सुधार लें।

  • फाइनल सबमिट के बाद मोबाइल नंबर और ईमेल पर 11 अंको की एसई आईडी आएगी। इसके जरिए ही जानकारी का सत्यापन होगा।

स्वगणना के फायदे

  • अपनी सुविधा से किसी भी वक्त जानकारी भर सकते हैं।

  • खुद डेटा फीड करने से गलतियों की आशंका कम रहेगी।

  • प्रगणक को एसई आईडी दिखाने पर बेहद कम समय में वेरिफिकेशन होगा।

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