बरेली: उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान तेजी से चल रहा है, लेकिन इसके नतीजों ने सियासी हलकों में बेचैनी बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसआईआर के दौरान प्रदेशभर में करीब 4 करोड़ वोटर अपात्र पाए जाने की बात सामने आई है। इसे लेकर भाजपा के भीतर हलचल मची हुई है। माना जा रहा है कि शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में वोटर कम होने से आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बरेली की बात करें तो यहां करीब 7 लाख 30 हजार वोटर अपात्र मिले हैं। इस आंकड़े के सामने आने के बाद प्रशासन ने एसआईआर के काम में एक बार फिर तेजी ला दी है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि 11 दिसंबर तक शत-प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
24 BLO संभाल रहे SIR की जिम्मेदारी
बरेली के कटरा चांद खां मोहल्ले में स्थित बलजाती प्राथमिक विद्यालय को SIR अभियान का केंद्र बनाया गया है। यहां 24 BLO लगातार वोटर वेरिफिकेशन के काम में जुटे हुए हैं। बीएलओ का कहना है कि ज्यादातर वही वोट कटे हैं, जिनके नाम एक से ज्यादा जगहों पर दर्ज थे। उनके मुताबिक, कई लोगों के नाम दो-दो और कुछ मामलों में तीन-तीन जगह वोटर लिस्ट में पाए गए हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे वोटर भी हैं, जिनकी मौत हो चुकी है या जो शहर छोड़कर कहीं और शिफ्ट हो गए हैं।
बीएलओ का कहना है कि अब वोटर लिस्ट देखकर लोगों को फोन किया जा रहा है और उनसे जरूरी डिटेल मांगी जा रही है, लेकिन जनता का सहयोग नहीं मिल रहा। कई लोग तो फोन तक नहीं उठा रहे हैं, जिससे वेरिफिकेशन का काम बेहद मुश्किल हो गया है। कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम तीन अलग-अलग बूथों पर दर्ज मिले हैं। ऐसे में नियमों के तहत अतिरिक्त नाम हटाए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को समझाना आसान नहीं है।
पंचायत चुनाव का असर
बीएलओ ने बताया कि कुछ महीने बाद पंचायत चुनाव हैं, जिस वजह से गांव से शहर आकर बसे लोगों ने गांव और शहर दोनों जगहों पर वोट बनवा रखे थे। अब जब एसआईआर का काम चल रहा है तो लोग शहर से अपना नाम कटवा ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि उनके गांव में चुनाव होगा, इसलिए वो अपने गांव में ही अपना वोट रखेंगे।
उन्होंने बताया कि बूथ लेवल एजेंट यानी BLA का पूरा सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन आम जनता सहयोग नहीं कर रही है। इससे न सिर्फ काम की रफ्तार प्रभावित हो रही है, बल्कि BLO पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ गया है।
SIR के कारण बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
उधर, SIR अभियान का असर स्कूलों की पढ़ाई पर भी साफ दिख रहा है। BLO ने बताया कि SIR की वजह से अधिकांश शिक्षकों की ड्यूटी इसी काम में लगी हुई है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि लगातार चुनावी और प्रशासनिक ड्यूटी के चलते स्कूलों में पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदारी निभाना मजबूरी है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो बरेली जैसे शहरी जिले में 7 लाख से ज्यादा वोटर कम होना बीजेपी के लिए चिंता की बड़ी वजह है। शहरी वोटर को बीजेपी का मजबूत आधार माना जाता रहा है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर वोटर अपात्र मिलने से आगामी चुनावों में सियासी समीकरण बदल सकते हैं। फिलहाल SIR अभियान जारी है और प्रशासन का दावा है कि पारदर्शी तरीके से वोटर लिस्ट को दुरुस्त किया जा रहा है।