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Shailendra Singh
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तुर्किये से विरोध के बाद 600 करोड़ रुपये का व्यापार बंद, AMU ने भी खत्म किए शैक्षिक संबंध
कानपुर: भारत और पाकिस्तान तनाव के बीच भारतीय कारोबारी तुर्किये के उत्पादों का बॉयकॉट कर रहे हैं। कानपुर के मार्बल कारोबारियों ने टर्किस मार्बल मंगाने से इनकार कर दिया है। कारोबारियों ने लगभग 80 फीसदी ऑर्डर कैंसिल कर दिए। मार्बल का सालाना करीब 600 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
वहीं, अलीगढ़ के ताला और हार्डवेयर कारोबारियों ने भी संबंध खत्म कर दिए हैं। अब तुर्किये को ताला और हार्डवेयर नहीं भेजा जाएगा। मुस्लिम विश्वविद्यालय ने तुर्किये से अपने सभी शैक्षिक संबंध खत्म कर दिए। अब AMU का तुर्किये के किसी भी विश्वविद्यालय के साथ कोई संबंध नहीं रहेगा। विवि प्रशासन ने शुक्रवार को इसका ऐलान किया।
पाकिस्तान के सपोर्ट के कारण हो रहा विरोध
दरअसल, 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक तनाव बढ़ा तो उसी तुर्किये ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया और भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले ड्रोन्स और हथियार भेजे थे। इसके बाद से भारत में तुर्किये का विरोध हो रहा है।
कानपुर में 700 करोड़ का सालाना होता है कारोबार
फियो के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि अकेले कानपुर से ही 700 करोड़ रुपये का कारोबार सालाना होता है। तुर्कीय को खासकर लेदर, एग्रीकल्चर, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिक उत्पादों की डिमांड काफी ज्यादा है। इसके अलावा मीट, डेयरी, प्लास्टिक, पशुओं के आहार संबंधी सामान भी भेजा जाता है। कई व्यापारी संगठन भी निर्यात बंद करने के पक्ष में हैं।
कानपुर में मार्बल का बड़ा कारोबार है। कानपुर मार्बल एंड टाइल्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री व कारोबारी हिमांशु पाल ने बताया कि टर्किस मार्बल की कानपुर में बहुत डिमांड है। 700 से 1500 रुपये स्क्वायर फीट तक की मार्बल आती है। कारोबारी प्रशांत तिवारी ने बताया कि टर्किस मार्बल स्टेट्स सिंबल है, इसलिए लोग इसका प्रयोग करते हैं। मगर, इंडियन मार्बल इससे लाख गुना अच्छा है। कारोबारी संजय कुमार जैन बताते हैं कि करीब 50 लाख रुपये का माल मंगाया था, पूरे ऑर्डर को ही कैंसिल कर दिया है। विरोध में लोग भी ज्यादा डिमांड नहीं कर रहे हैं।
तुर्किये का न सेब लेंगे और न ताला भेजेंगे
कानपुर में रोजाना करीब 2 ट्रक सेब कानपुर की फल मंडियों में आता है। कानपुर फ्रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश सिंह ने बताया कि दुश्मन के साथ किसी भी तरह का कारोबार नहीं करेंगे।
AMU ने तुर्किये से तोड़े सभी शैक्षिक संबंध
अभी तक एएमयू का तुर्किये के साथ पुराना शैक्षिक संबंध रहा है। पिछले कुछ सालों में भारत-तुर्किये के संबंधों पर केंद्रित सम्मेलन और कई संयुक्त शोध कराए गए। तुर्किये के शोध विद्वानों और छात्र व्याख्यान देने आए। इस्तांबुल के आयडिन विश्वविद्यालय और अंकारा स्थित अंकारा मेडिपोल विश्वविद्यालय में एएमयू के शिक्षक और छात्र भ्रमण पर जाते रहे हैं। मगर, अब यह सिलसिला खत्म हो गया है।



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