एसआरएमएस रिद्धिमा में गजल संध्या में गायकों की प्रस्तुति पर झूमे श्रोता
बरेली: एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार (10 मई) को गायन कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें संस्थान के गायन गुरुओं और उनके विद्यार्थियों ने गजलों को अपने स्वर दिए और श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का आरंभ इंस्ट्रूमेंटल गुरुओं सूर्यकांत चौधरी (वायलिन), सुरेंदर (परकशन), अनुग्रह सिंह (ड्रम), विशेष सिंह (गिटार), ऋषभ आशीष पाठक (पखावज), दीपकांत जौहरी (तबला), रॉनी फिलिप्स (सेक्सोफोन), डॉ. नम्रता सिंह और विवान अग्रवाल ने अपने वाद्ययंत्रों से राग भूपाली की प्रस्तुति से किया। गायन गुरु प्रियंका ग्वाल ने गजल ‘तुमको हम दिल में बसा लेंगे तुम आओ तो सही’ को अपने स्वर में प्रस्तुत कर मार्डन गजल प्रस्तुति शुरू की।
गायन की विद्यार्थी शालिनी पांडेय ने तस्लीम फाजली की प्रसिद्ध गजल ‘रफ़्ता रफ़्ता वो मेरी हस्ती का सामां हो गए’ को श्रोताओं के सामने प्रस्तुत कर वाहवाही हासिल की। गायन के विद्यार्थी अतिशय गोयल ने गजल ‘मैं जो शायर कभी होता तेरा सहारा कहता’, अंशुमा और मानसी ने ‘हवा और दिल में साजिश हो रही है’, श्रेय ने ‘बूंदे यह बरसे है कि घर आओ ना’ को अपने स्वरों में प्रस्तुत किया। गायन गुरु सात्विक मिश्रा ने ‘मिलकर जुदा हुए तो ना सोया करेंगे हम’ और ‘रोने वालों से कहो कभी उनका भी रोना रोल’ अपनी आवाज दी तो गुरु प्रियंका ग्वाल के साथ गजल ‘काली काली जुल्फों के फंदे ना डालो’ को गाया।

इंदू परडल ने ‘एक बार ही जी भर के सजा क्यों नहीं देते’ को प्रस्तुत किया। गायन के विद्यार्थी श्रेया प्रभजोत, अंशुमा अग्रवाल, अतिशय गोयल, मानसी टंडन ने भी कार्यक्रम में संगत दी। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, उषा गुप्ता, डॉ. रजनी अग्रवाल, सुभाष मेहरा, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. शैलेश सक्सेना, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. रीता शर्मा और शहर के गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।



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