कानपुर: अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में जेल में बंद 12वीं पास ओटी (ऑपरेशन थियेटर) मैनेजर मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ अली ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पुलिस के 35 सवालों का सामना करते हुए उसने स्वीकारा कि बिना किसी डाक्टरी डिग्री के वह अब तक कुल 13 किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। तीन ट्रांसप्लांट मेरठ तो 10 कानपुर के अस्पतालों में किए, जिनमें से दो मरीजों की बाद में जान चली गई।
उसने बताया कि मेरठ के अल्फा हॉस्पिटल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट होता था, जहां वह ओटी मैनेजर था। वह देखकर ही ऑपरेशन करना सीख गया था। फिलहाल, पुलिस अब अली के साथ ही जेल में बंद गिरोह के सरगना रोहित और किडनी दलाल शिवम अग्रवाल का कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी में है। तीनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी।
दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है अली
दिल्ली के उत्तम नगर निवासी मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ अली 12वीं पास है और ओटी टेक्नीशियन का कोर्स कर चुका है। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि वह पहले दिल्ली के आकाश हॉस्पिटल में काम करता था। करीब आठ साले पहले वर्ष 2018 में उसकी मुलाकात गाजियाबाद निवासी रोहित तिवारी से हुई थी।
रोहित उसे मेरठ के अल्फा हास्पिटल ले गया था। यहां उसने अस्पताल संचालक व फिजियोथेरेपिस्ट अनुराम उर्फ अमित और उसके पार्टनर डेंटल सर्जन डॉ. वैभव से मिलवाया था। पहले रोहित भी अल्फा हास्पिटल में काम करता था, जहां अवैध ढंग से किडनी ट्रांसप्लांट होता था।
अली ने भी किए तीन ट्रांसप्लांट
अली को भी बतौर ओटी मैनेजर यहां नौकरी मिल गई। वह किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान ओटी में रहता था। कुछ समय बाद एक केस आया तो उसने ही ट्रांसप्लांट कर दिया। ऑपरेशन सफल रहा तो उनकी टीम में वह ही किडनी ट्रांसप्लांट करने लगा। वहां उसने कुल तीन ट्रांसप्लांट किए। दो-तीन साल बाद अल्फा हॉस्पिटल में अनुराग और रोहित के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया और किडनी ट्रांसप्लांट बंद कर दिया गया। इसके बाद रोहित ने कानपुर रुख किया और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए यहां के अस्पताल तलाशने लगे।
अली ने बताया कि उसने कानपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल, मेडलाइफ अस्पताल और स्वरूप नगर स्थित रमाशिव अस्पताल में रोहित की टीम के साथ 10 किडनी ट्रांसप्लांट किए हैं, जिसमें रमाशिव अस्पताल में वर्ष 2023 में एक पुरुष की किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मौत हुई थी। रमाशिव अस्पताल में लखनऊ निवासी खुद को डॉक्टर बताने वाले भूपेंद्र के कार्यकाल में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। बाद में भूपेंद्र ने लखनऊ में ही अपना यूनाइटेड अस्पताल खोल लिया।
2025 में हुआ था महिला का किडनी ट्रांसप्लांट
इसी तरह से मेडलाइफ में नवंबर, 2025 में महिला का किडनी ट्रांसप्लांट तो सफल हुआ था। परिवार वाले उन्हें घर भी ले गए, लेकिन बाद में इंफेक्शन फैलने लगा। हालत बिगड़ने पर कल्याणपुर के किडनी दलाल शिवम अग्रवाल ने मरीज को प्रयागराज के दलाल नवीन पांडेय के माध्यम से दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, महिला की मौत हो गई थी।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि पुलिस टीम डॉ. अफजाल और अल्फा हॉस्पिटल के संचालक फिजियोथेरेपिस्ट अनुराग उर्फ अमित, पार्टनर डेंटल सर्जन डॉ. वैभव समेत आरोपितों की तलाश में लगी है। अफजाल 25 हजार का इनामी है। उसकी गिरफ्तारी जल्द हो सकती है।
ये था मामला
केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में मुजफ्फर नगर की पारुल का 29 मार्च की रात किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। पारुल के लिए बिहार के बेगुसराय निवासी आयुष ने किडनी बेची थी। इस प्रकरण का राजफाश पुलिस ने 30 मार्च को किया था। मामले में अस्पताल के संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, आरोही अस्पताल के संचालक राजेश , मेडलाइफ के संचालक रामप्रकाश, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेन्द्र सिंह, दलाल शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
बाद में गाजियाबाद के ओटी मैनेजर राजेश, हापुड़ निवासी ओटी इंचार्ज कुलदीप सिंह राघव, बागपत निवासी परवेज सैफी,उसके बाद गाजियाबाद निवासी और खुद को डॉक्टर बताने वाले रोहित तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।