बरेली: एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को मेडिकल एथिक्स और गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस पर सीएमई हुई। इसमें मरीजों के उपचार में मेडिकल एथिक्स का ध्यान रखने के साथ ही गुड प्रैक्टिस का जिम्मेदारी के साथ पालन करने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने इसके लिए नियमों और जिम्मेदारियों की भी जानकारी दी। आनलाइन और आफलाइन मोड पर आयोजित इस हाइब्रिड सीएमई में बरेली परिक्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, पीजी स्टूडेंट शामिल हुए।
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से आयोजित सीएमई में मुख्य अतिथि के रूप में एनआईएमसी के नेशनल कन्वीनर एवं सीएमसी लुधियाना के प्रोफेसर (डॉ.) दिनेश बदयाल शामिल हुए। गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस एवं आईसीएच जीसीपी पर व्याख्यान देने के साथ ही उन्होंने क्लीनिकल ट्रायल में इंवेस्टीगेटर, स्पांसर और स्टडी टीम की भूमिका एवं जिम्मेदारियों की भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मरीजों के उपचार के लिए गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस पर जोर दिया और इसे सफल चिकित्सक बनने की दिशा में पहला स्टेप बताया। एसीएमई और एमएचपीई के को- कंवीनर, मेडिकल एजूकेशन टीम के सक्रिय सदस्य एवं केजीएमयू के प्रोफेसर (डॉ.) आरके दीक्षित ने बायोएथिक्स के नियम, बायो मेडिकल एवं हेल्थ रिसर्च में मानव भागीदारी के संबंध में नेशनल इथिकल गाइडलाइंस, बायो मेडिकल एवं हेल्थ रिसर्च में बच्चों की भागीदारी के संबंध में नेशनल इथिकल गाइडलाइंस की विस्तृत चर्चा की।
बायोएथिक्स है मेडिकल प्रोफेशन का कोर
डॉ. दीक्षित ने बायोएथिक्स को मेडिकल प्रोफेशन का कोर बताया। उन्होंने कहा कि गुड क्लीनिकल एथिक्स में गुड व्यापक शब्द है। इसे मेडिकल प्रोफेशन में अपनाने के साथ ही जीवन में जरूरी है। सीएमई में रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल की डॉ. शालिनी चंद्रा ने नई दवाइयां और उनके क्लीनिकल ट्रायल, भारत में क्लीनिकल ट्रायल और रिसर्च के लिए वर्तमान में नियामक जरूरतें पर विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने सीएई रिपोर्टिंग और फार्माकोविजिलेंस लिंकेज पर भी चर्चा की। रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की डॉ. सुजाता सिंह ने क्लीनिकल ट्रायल प्रोटोकॉल्स, जरूरी दस्तावेजों का संग्रह, अभिलेखन और उनका रख-रखाव पर व्याख्यान दिया। इससे पहले सीएमई का उद्घाटन सत्र दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ आरंभ हुआ।

इसमें मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. एमएस बुटोला ने सभी का स्वागत किया और सीएमई के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मेडिकल एथिक्स और गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस के संबंध में पीजी विद्यार्थियों को जानकारी देने के संबंध में एनएमसी कोई दिशा-निर्देश नहीं देता, लेकिन मरीजों के उपचार और श्रेष्ठ चिकित्सकों के निर्माण के लिए यह जरूरी है। इसलिए एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में मेडिकल एथिक्स और गुड मेडिकल प्रैक्टिस पर जोर दिया जाता है। आज की सीएमई का भी यही उद्देश्य है कि पीजी के विद्यार्थियों को इसकी जानकारी मिले और वह भविष्य में अच्छे चिकित्सक के रूप में समाज को स्वस्थ करने में अपना योगदान दें।
इनकी रही मौजूदगी
मेडिकल एजुकेशन विभाग के कन्वीनर डॉ. जसविंदर सिंह ने रिसर्च के लिए मेडिकल एथिक्स ट्रेनिंग को जरूरी बताया और पीजी विद्यार्थियों को अपने प्रतिदिन के अभ्यास में इसे शामिल करने की सलाह दी। मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आरपी सिंह ने उद्घाटन सत्र में ऑफलाइन और ऑनलाइन रूप में शामिल सभी चिकित्सकों, विद्यार्थियों और अतिथियों का आभार जताया और धन्यवाद दिया। उद्घाटन सत्र का संचालन मेडिकल एजुकेशन की को कंवीनर डॉ. संध्या चौहान ने किया। इस अवसर पर सभी विभागाध्यक्ष, डॉ. मीनाक्षी जिंदल, डीएसडब्ल्यू डॉ. क्रांति कुमार, सभी पीजी विद्यार्थी मौजूद रहे।