बरेली: एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार शाम नाटक *तीन थे भाई* का मंचन किया गया। ब्लैक पर्ल आर्ट नई दिल्ली की ओर से प्रस्तुत और अमूल सागर नाथ निर्देशित इस नाटक का नाट्य रूपांतरण अमूल सागर नाथ ने किया। नाटक तीन भाइयों (बड़का, मझला और छुटका) के बारे में है। यह तीनों मुरैना जिले की एक प्रसिद्ध रामलीला में अभिनय करते हैं और फिल्मों में काम कर सफल हीरो बनना चाहते हैं। उनका नाटक देखने पहुंची मुंबई की एक कास्टिंग एजेंट मंच पर आकर तीनों भाइयों की एक्टिंग की तारीफ करती है और उन्हें मुंबई आकर हीरो बनने का न्योता देती है।
गुरु जी के मना करने के बाद भी तीनों भाई मुंबई जाने का फैसला कर लेते हैं। रात में तीनों भाई बाऊजी को इसकी जानकारी देते हैं, लेकिन बाऊजी उनके एक्टर बनने के सपने का मजाक उड़ाते हैं। भाई बॉलीवुड के अलग-अलग अभिनेताओं के अंदाज़ में डायलॉग बोलकर बाऊजी को मनाने की कोशिश करते हैं। अंत में, मझला भाई बाऊजी से एक साल में कुछ न बनने पाने पर वापस आकर खेती करने का वादा करता है। तीनों भाई बारी-बारी से रज्जो नाम की लड़की से मिलते हैं, जो उन्हें छोड़कर मुंबई जाने पर नाराज़ होती है। तीनों उससे न भूलने का वायदा करते हैं।
ट्रेन में बैठकर देखते हैं सपने
मुंबई जाने के लिए स्टेशन पहुंचने पर तीनों को रामलीला के गुरुजी भी मिलते हैं और वह भी उनके साथ जाने की जानकारी देते हैं। ट्रेन में बैठकर तीनों भाई अंबानी के बंगले पर नाश्ता, अमिताभ बच्चन के गुसलखाने में नहाना और माधुरी दीक्षित के घर डिनर जैसे सपने देखते हैं। तीनों भाई हीरोपंती के अंदाज़ में मुंबई रेलवे स्टेशन पर उतरते हैं, तभी उन्हें पता चलता है कि तीनों के पर्स चोरी हो गए हैं। तीनों भाई चाय की दुकान पर अपनी बदकिस्मती पर रोते हैं। गुरुजी उनकी मदद करने का वादा करते हैं। तभी एक नकली कास्टिंग वाला आता है और उनको काम दिलाने का वादा करते एक ऑफिस ले जाता है। नकली कास्टिंग वाला छुटके को चुनता है और बाकियों को बाहर भेज देता है। वह छुटके के साथ बदसलूकी करता है। इतनी देर में बाकी भाई आकर छुटके को बचाते है। वापस तीनों भाई और गुरुजी स्टेशन के पास, घर जाने की बात करते है।
तभी रामलीला में आई कास्टिंग एजेंट वहां पहुंचती है और ऑडिशन देने बुलाती है। तीनों के मना करने पर वह समझाती है कि हर कोई एक जैसा नहीं होता। कास्टिंग एजेंट तीनों को एक डायरेक्टर के पास लाती है। ऑडिशन में डायरेक्टर उन्हें पेट दर्द का सीन सख्ती और फिर नज़ाकत के साथ करने को कहता है, लेकिन वे दोनों बार कॉमेडी कर देते हैं। गुस्सा होकर डायरेक्टर बड़का को चांटा मारती है। इस पर तीनों भाई गुस्सा हो जाते हैं और गुस्से में उन्हें बताता है, अब वो सच्चा अभिनय करके दिखाएंगे। उनका यह सच्चा अभिनय डायरेक्टर को प्रभावित करता है और अपनी आने वाली फिल्म के मुख्य किरदार के रूप में उन्हें चुनती है। तभी बाबूजी, गुरुजी और अम्मा भी आकर उनकी खुशियों में शामिल हो जाते हैं। नाटक यहीं पर समाप्त हो जाता है।
इस मौके पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, ऋचा मूर्ति, देविशा मूर्ति, इंजीनियर सुभाष मेहरा, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. अनुज कुमार, डॉ. शैलेश सक्सेना, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. रीटा शर्मा और गणमान्य लोग मौजूद रहे।