शैलेंद्र सिंह
ठंड का मौसम शुरू होते ही बच्चों की सेहत को लेकर हर माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है। ठंड की वजह से बदलती भूख, बार-बार होने वाले इंफेक्शन और जरूरत से ज्यादा कैलोरी की मांग, ये सब मिलकर बच्चों की डाइट को खास ध्यान देने लायक बना देते हैं। इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने बात की लखनऊ की डायटीशियन लता यादव से, जिन्होंने सर्दियों में बच्चों की इम्युनिटी, ग्रोथ और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस पर खास और उपयोगी जानकारी साझा की। आइए पढ़ते हैं बाचतीच के कुछ खास अंश…
सवाल: सर्दियों में बच्चों के लिए कितनी कैलोरी पर्याप्त होती है?
जवाब: हम बच्चों के लिए आवश्यक कैलोरी की मात्रा उम्र, लिंग और गतिविधि के हिसाब से निर्धारित कर सकते हैं। सामान्य तौर पर 1-3 साल के बच्चों में हाइट और वेट के हिसाब से जनरली रिक्वायरमेंट करीब 1000 कैलोरी तक होती है। 4-6 साल के बच्चों को लगभग 1,400 कैलोरी और 7-10 साल तक के बच्चों को लगभग 1500-2000 कैलोरी प्रतिदिन की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, सर्दियों में अक्सर बच्चे का मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है और ऐसे में हम 100 से 150 कैलोरी उनके खाने में और ऐड कर सकते हैं।
सवाल: सर्दियों में बच्चों के लिए हेल्दी और इम्युनिटी बढ़ाने वाले फूड्स कौन-कौन से हैं?
जवाब: सर्दियों में बच्चों को संतुलित आहार देना जरूरी होता है। इस मौसम में बच्चों की डाइट में प्रोटीन, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए। प्रोटीन रिच फूड्स में दाल, पनीर, अंडा, दूध, दही, सोयाबीन या चना दे सकते हैं। बच्चों की इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें विटामिन सी और ए से भरपूर फल, जैसे- संतरा, आंवला, नींबू, अमरूद, मौसंबी, सेब, कीवी और गाजर दे सकते हैं।
साथ ही कुछ हेल्दी फैट्स होते हैं, उनका भी शरीर में जाना जरूरी होता है, क्योंकि जो वसा में घुलनशील विटामिन होते हैं, जब फैट रहेगा तभी बॉडी में ऑब्जर्व होगा। इसके अलावा बच्चों को बादाम, मुनक्का, अखरोट, पालक, मेथी, सरसों का साग, ब्रोकली चुकंदर, गाजर, लाल और पीली शिमला मिर्च, टमाटर, दालें, सूप, और पतली खिचड़ी जैसे गर्म और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ दे सकते हैं, जो उन्हें सर्दी-जुकाम से बचाते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि अगर बच्चा ब्रेस्टफीडिंग है तो मां को अपनी डाइट में अच्छी क्वालिटी में प्रोटीन लेना चाहिए। अगर वह वेजिटेरियन हैं तो पनीर, सोयाबीन, दूध, दही भरपूर मात्रा में लें और अगर नॉन वेजिटेरियन हैं तो अंडा, चिकन और फिश डाइट में शामिल कर सकती हैं। साथ पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और इसके लिए पानी, सूप, दाल का पानी और अजवाइन का पानी भी प्रॉपर मात्रा में ले सकती हैं। इस तरह से अगर मां की डाइट प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर रहेगी तो बच्चे की फीडिंग में भी उसका असर दिखाई देगा।
सवाल: सर्दियों में बच्चों के लिए वार्मिंग फूड कौन-कौन से माने जाते हैं?
जवाब: सर्दियों में बच्चों को गर्म यानी वार्मिंग और पौष्टिक खाद्य पदार्थ देने चाहिए। इनमें दाल, सूप, नट्स (बादाम, खजूर), ड्राई फ्रूट्स (किशमिश, अंजीर) और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे- पनीर, अंडे और चिकन शामिल करने चाहिए। इसके अलावा हल्दी वाला दूध, गाजर का हलवा और गुड़ या मूंगफली जैसे व्यंजन भी बच्चों को बॉडी को गर्म रख सकते हैं। हल्दी वाला दूध बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और सर्दी-खांसी से बचाता है। बच्चे धूप में बैठकर कैल्शियम से भरपूर तिल के लड्डू खा सकते हैं, जिससे उन्हें साथ में विटामिन डी भी मिलती है। साथ ही उन्हें गुड़, सूप और दूध में थोड़ी सी काली मिर्च का मिश्रण भी दे सकते हैं।
सवाल: सर्दियों में बच्चों को ड्राई फ्रूट्स और दूध कितनी मात्रा में देना चाहिए?
जवाब: सर्दियों में बच्चों को ड्राई फ्रूट्स या दूध-घी सीमित में देना चाहिए, क्योंकि हर एक बच्चे के बॉडी का डाइजेस्टिंग सिस्टम अलग-अलग हिसाब से काम करता है। अगर बच्चा 2 से 3 साल का है तो 2-3 मेवे और पांच एमएल का आधा से एक चम्मच घी दे सकते हैं। पेरेंट्स को ध्यान रखना है कि आपके बच्चे का डाइजेस्टिंग सिस्टम कैसा है और जो ड्राई फ्रूट्स या दूध-घी उसे आप दे रहे हैं, क्या उसकी बॉडी को सूट कर रहा है। अगर बच्चे का डाइजेशन सिस्टम गड़बड़ है तो उस समय उसे ऐसी चीजें न दें। ड्राई फ्रूट्स को दूध में मिलाना या पाउडर बनाकर खिलाना बेहतर होता है। खासकर छोटे बच्चों के लिए, जिससे वे आसानी से पचा सकें और गले में अटकने का खतरा कम हो।
अगर आपका बच्चा 7 से 8 साल का है तो आप घी एक से दो चम्मच दे सकते हैं। वहीं, अगर बच्चा 9 साल प्लस है तो उसे दो से तीन चम्मच भी दे सकते हैं। बच्चे को दूध भी सीमित मात्रा में दें, जिससे उसका डाइजेस्टिव सिस्टम खराब न हो। इसके अलावा अपने बच्चे की पसंद और नापसंद का ध्यान रखें। यदि बच्चे को कोई एलर्जी है तो ये चीजें देने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
सवाल: बच्चों को सर्दी-जुकाम होने पर कौन से फूड्स दें और कौन से नहीं?
जवाब: सर्दियों में कई बार बच्चों को खांसी-जुकाम हो जाता है। ऐसे में कई पेरेंट्स उनका खाना बंद कर देते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। बच्चों को तीन टाइम की प्रॉपर मील देनी चाहिए। बच्चों को सर्दी-जुकाम होने पर उन्हें गर्म, पौष्टिक और आरामदायक चीजें खिलानी चाहिए, जैसे- सूप, दलिया और विटामिन सी से भरपूर फल। इस समय उनकी डाइट में एक सीजनल फल और सब्जी जरूर शामिल करनी चाहिए। फल उन्हें दिन के समय धूप में खाने के लिए दें। मगर, जो फल उन्हें सूट नहीं कर रहा, वो नहीं देना चाहिए।
इसके अलावा दूध हल्दी वाला, जिसमें एक चुटकी काली मिर्च, अदरक और लहसुन थोड़ी सी मात्रा में देना चाहिए। अगर गले में बहुत ज्यादा खराश है तो थोड़ा सा तुलसी का रस, शहद और थोड़ा सा अदरक का रस दे सकते हैं, जिससे खांसी बंद हो जाए। इस दौरान बच्चों को जिन फूड्स से बचाना है, उनमें प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थ, डेयरी उत्पाद, फ्रिज का पानी, ठंडी चीजें, आइसक्रीम, पैक्ड जूस और जंक फूड शामिल हैं।
सवाल: सर्दियों में बच्चों की पानी की मात्रा को कैसे बढ़ाया जाए?
जवाब: यह सिर्फ बच्चों के साथ नहीं है, बल्कि बड़ों के साथ भी होता है कि ठंड में प्यास कम लगती है और वे पानी कम पीते हैं। मगर ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि सर्दियों में ही सबसे ज्यादा डिहाइड्रेशन की समस्या होती है। ऐसे में आपको और बच्चों को ध्यान रखकर पानी पीने की आवश्यकता होती है। ऐसे में पेरेंट्स अपने बच्चों को ठंडे के बजाय गुनगुना पानी, दाल का पानी, सूप, नारियल का पानी और पानी में थोड़ा गुड़ मिलाकर भी दे सकते हैं, क्योंकि पानी की मात्रा को सिर्फ पानी ही पूरा नहीं करता, बल्कि तरल पदार्थ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
साथ अपने बच्चे के साथ पेरेंट्स भी पानी पिएं, जिससे उन्हें इसकी प्रेरणा मिले। इसके अलावा पेरेंट्स बच्चों को पानी पिलाने के लिए थोड़ा क्रिएटिविटी दिखा सकते हैं, जैसे- कलरफुल बोतल, डिजाइनिंग गिलास का इस्तेमला कर सकते हैं, जिससे बच्चे अट्रैक्ट हों।
सवाल: सर्दियों में बच्चे का मील प्लान क्या होना चाहिए और टिफिन में क्या-क्या रख सकते हैं?
जवाब: आजकल ये चीज बहुत देखी जा सकती है कि बच्चे खाली पेट स्कूल चले जाते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बच्चे को कभी खाली पेट स्कूल नहीं भेजना चाहिए। अगर आप पूरा टिफिन तैयार करके नहीं दे पा रहे तो क्विक डाइट तैयार कर सकते हैं। नाश्ते में बच्चों को आप एप्पल या खजूर का शेक, बादाम का दूध या गुनगुन पानी के साथ बादाम-किशमिश का पेस्ट बनाकर दे सकते हैं, जो बच्चा कंज्यूमर करे।
इसके अलावा दलिया, ओट्स (दूध/पानी में पकाकर, फल मिलाकर), मूंग दाल का चीला या अंडे का ऑमलेट भी दे सकते हैं। दोपहर के नाश्ते यानी लंच के लिए बच्चों के टिफिन में एक सीजनल फल होना ही चाहिए। सीजनल सब्जियों, जैसे- बथुआ, सोया या पालक का इस्तेमाल करके डिजाइनिंग या अट्रैक्टिव तरीके से पराठे या पूड़ी बनाकर टिफिन में पैक कर सकते हैं, जिससे बच्चे उसे आसानी से खाएं। इसे बनाने के लिए आप पनीर फाड़कर जो पानी बचता है यानी ग्रे वाटर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ में आंवले की चटनी भी दे सकते हैं, जो विटामिन सी का सोर्स है।
वहीं, बच्चों के डिनर की बात करें तो एक अनाज, एक प्रोटीन का सोर्स और एक सीजनल सब्जी शामिल करनी चाहिए। बच्चों को रोटी या थोड़ा चावल, सूप, राजमा, छोले, सोयाबीन, पनीर या मशरूम दे सकते हैं। अगर नॉन वेजिटेरियन हैं तो उनको चिकन, फिश या फिर अंडे दे सकते हैं। साथ ही बच्चों को सलाद देना ना भूलें, वो चाहे सूप के फॉर्म में दें या सलाद के फॉर्म में या फिर कुक्ड फॉर्म में। यहां पेरेंट्स को ये बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि बच्चों को खाने के लिए फोर्स नहीं करना है, बल्कि थोड़े-थोड़े टाइम पर थोड़ा-थोड़ा खिलाते रहना चाहिए। एक साथ ज्यादा खिलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
सवाल: सर्दियों में बच्चों की देखभाल के लिए पेरेंट्स को क्या संदेश देना चाहेंगी?
जवाब: मैं बतौर डाइटीशियन सभी पेरेंट्स से यह कहना चाहूंगी कि बच्चों को न्यूट्रिशन से भरपूर डाइट देनी चाहिए। इसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट जैसी सभी जरूरी चीजें शामिल हों। दूसरी बात है कि हाइड्रेशन भी बहुत जरूरी है, जिसके लिए उन्हें गुनगुना पानी, दाल का पानी और सूप भी पर्याप्त मात्रा में देना चाहिए, जो ठंड से बचाने का काम करते हैं। तीसरी चीज है कि बच्चों को ज्यादा कपड़े पहनाने के बजाय गर्म और साफ-सुथरे कपड़े पहनाने चाहिए, जिसमें बच्चा कंफर्टेबल हो और उसे गर्माहट मिले।
इसके अलावा बच्चों की ओवरऑल हेल्थ के लिए एक अच्छी नींद होना भी बहुत जरूरी है। पेरेंट्स को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों की स्क्रीन टाइम कम होनी चाहिए। रात को उसे टाइम पर सुलाना और सुबह टाइम से जगाना चाहिए। प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 मिनट धूप लेना चाहिए, जो उसके लिए विटामिन डी का सोर्स है। सभी पेरेंट्स को बच्चों की डाइट के साथ-साथ इन सारी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए, जिससे उनका बच्चा पूरी तरह सुरक्षित, ऊर्जावान और स्वस्थ रहे।