Lucknow News: मिनिमली इनवेसिव यूरोलॉजिकल केयर (कम आक्रामक मूत्र रोग उपचार) की दिशा में एक अग्रणी कदम उठाते हुए, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने दो उच्च-जोखिम वाले मरीजों पर सफलतापूर्वक रेज़ूम वॉटर वेपर थेरेपी की। यह उपलब्धि बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया (बीपीएच) यानी बढ़े हुए प्रोस्टेट से जूझ रहे पुरुषों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। रेज़ूम थेरेपी, एक यूएस एफडीए-अनुमोदित प्रक्रिया है, जिसमें वॉटर वेपर में मौजूद प्राकृतिक ऊर्जा का उपयोग कर अतिरिक्त प्रोस्टेट ऊतक को सिकोड़ दिया जाता है। इससे पेशाब से जुड़ी तकलीफ़ों से राहत मिलती है और इसमें किसी प्रकार की चीरा या कट की ज़रूरत नहीं पड़ती।
रेज़ूम थेरेपी क्या है?
इस उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. राहुल यादव (निदेशक एवं प्रमुख– यूरोलॉजी, एंड्रोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांटेशन और रोबोटिक यूरो-ऑन्कोलॉजी, मैक्स हॉस्पिटल) ने कहा, रेज़ूम थेरेपी उन पुरुषों के लिए गेम-चेंजर है जो बढ़े हुए प्रोस्टेट की वजह से पेशाब की समस्या झेल रहे हैं। रेज़ूम एक सेफ और इफेक्टिव ऑप्शन है, जो जीवन की क्वालिटी को बेहतर बनाता है और सेक्सुअल कैपेसिटी पर कोई असर नहीं डालता। बीपीएच एक आम प्रॉब्लम है, जो 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में ज़्यादा पाई जाती है। इस कंडीशन में मरीजों को बार-बार पेशाब की इच्छा, वीक यूरिन फ्लो, ब्लैडर के अधूरे खाली होने की समस्या और स्लीप डिस्टर्बेंस जैसी शिकायतें होती हैं।
दोनों ही सफल मामलों के बारे में जानकारी
पहला केस कन्हैया लाल (57 वर्ष, लखीमपुर) का था, जो पिछले एक साल से यूरिनरी रिटेंशन के चलते कैथेटर के सहारे थे। उनकी सीवियर कार्डियक प्रॉब्लम और डायबिटीज़ के कारण ट्रेडिशनल सर्जरी पॉसिबल नहीं थी। दूसरा केस के बारे में बात करते हुए उन्हने बताया, नकुल मिस्त्री (84 वर्ष, लखनऊ) पिछले छह साल से यूरिनरी रिटेंशन की वजह से कैथेटर पर निर्भर थे। उनकी उम्र के साथ-साथ मल्टिपल को-मॉरबिडिटीज़ और सीवियर कार्डियक डिज़ीज़ होने के कारण उन्हें कई सेंटर्स पर सर्जरी के लिए मना कर दिया गया था। रेज़ूम थेरेपी लोकल एनेस्थीसिया के तहत सफलतापूर्वक की गई और तीन हफ्तों के भीतर उनका कैथेटर हटा दिया गया।