राम मंदिर चढ़ावा चोरी में SIT रिपोर्ट: 70 घटनाएं CCTV में कैद, अनिल मिश्रा बने रहे लापरवाह

राम मंदिर चढ़ावा चोरी में SIT रिपोर्ट: 70 घटनाएं CCTV में कैद, अनिल मिश्रा बने रहे लापरवाह

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में ट्रस्ट की बैठक और चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद सोमवार रात लगभग 9 बजे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्राइमरी रिपोर्ट भी सामने आ गई। इस रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 05 जून के बीच सीसीटीवी में लगभग 70 संदिग्ध घटनाएं कैद हुईं। फुटेज में पुलिस की गिरफ्त में आए आठ आरोपी नोटों की गड्डियां जेब और जूतों में छिपाते हुए दिखे।

एसआईटी ने डॉ. अनिल मिश्रा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। SIT ने कहा कि पहले से बनाए गए तलाशी के सिस्टम में लूपहोल्स के लिए अनिल मिश्रा ही जिम्मेदार हैं। चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू बिना किसी आदेश के गिनती वाले कमरे की चाबी अपने पास रखता था। इतना ही नहीं, उसने सिफारिश कर अपने भतीजे मनीष यादव को चंदे की गिनती के काम में लगवाया था। राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी की जांच के लिए यूपी सरकार ने SIT बनाई थी। टीम ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

SIT की प्राइमरी रिपोर्ट की बड़ी बातें

चोरी के लिए जिम्मेदार अनिल मिश्रा

चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया ही खामियों से भरी मिलीं। डॉ. अनिल मिश्रा वित्तीय मामलों और नकदी संकलन प्रबंधन की निगरानी कर रहे थे। बैंक के साथ तय SOP और सहमति बिंदु तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

निगरानी सिस्टम में खामियां

तलाशी न किए जाने की जानकारी अनिल मिश्रा को आंतरिक माध्यमों से दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कोई असरदार लिखित आदेश-निर्देश जारी नहीं किया। पहले तय किए गए तलाशी लेने वाले सिस्टम में भी अनिल मिश्रा के कारण ही हीला-हवाली की गई।

न अटेंडेंस, न पेपरवर्क, इसलिए बढ़ी चोरी की हिम्मत

कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस, तय यूनिफॉर्म, निजी सामान कमरे में ले जाने पर रोक, दानपेटियों, उनसे निकले पैसों-नोटों का रिकॉर्ड, डेली रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं लागू करने ठोस कदम नहीं उठाए गए। कमजोर निगरानी होने से आरोपियों की नीयत बिगड़ी और वे लगातार रामलला के खजाने से चोरी करते रहे।

कपड़ों, जेब, जूते-मोजे में छिपाते थे नोटों की गडि्डयां

27 अप्रैल से 05 जून 2026 तक मिले सीसीटीवी फुटेज में सामने आया कि जहां चढ़ावे की गिनती होती, उस कमरे में काम कर रहे कुछ कर्मचारी बार-बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट अपने कपड़ों, जेबों, जूतों-मोजों में छिपाते हुए दिखाई दिए। एंट्री-एग्जिट गेट पर तलाशी न होने से नकदी बाहर ले जाना संभव हुआ।

जेबों में नोट भरते, साथी इशारा करके सतर्क कर देते

यह एकाध घटना नहीं, बल्कि लगातार दोहराई गई संगठित गतिविधि थी। जांच में 70 ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं। कुछ कर्मचारी इशारों के जरिए एक-दूसरे को सतर्क करते दिखाई दिए।

SIT रिपोर्ट में इनका भी जिक्र

  • जांच से पहले गिनती के काम में लगे कुछ कर्मचारियों से लगभग 78.94 लाख रुपये बरामद हुए।
  • 04 जून, 2026 को गिनती वाले कमरे से जुड़े बाथरूम से कथित तौर पर 2.25 लाख रुपये और बरामद किए गए।
  • चांदी की ईंटों, अन्य कीमती चढ़ावे के गायब होने के सोशल मीडिया दावों का समर्थन करने वाला कोई शुरुआती सबूत नहीं मिला।

रिपोर्ट में खुलासा- छह आरोपी सीधे तौर पर चोरी में शामिल रहे

एसआईटी के मुताबिक, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा की पहली नजर में ही संलिप्त नजर आए। सीसीटीवी फुटेज, बरामदगी और बैंक खातों की जांच में इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं।

रिपोर्ट में इन सभी के खिलाफ चोरी, आपराधिक न्यासभंग, आपराधिक दुर्विनियोग, चोरी की संपत्ति रखने, षड्यंत्र समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई है। SIT की रिपोर्ट के आधार पर ही ट्रस्टी कृष्ण मोहन ने केस दर्ज कराया था। बाद में आरोपी गिरफ्तार हुए। अब सभी जेल में हैं।

अविनाश के पास मिले 20.39 लाख नकद

पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक आरोपी अविनाश ने यह बात कबूल कर ली है कि उसने अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों पर 19 लाख रुपए खर्च किए। उसने एक भाई की शादी के जश्न के लिए लगभग 6 लाख खर्च किए। दूसरे भाई को 5 लाख दिए। 3.5 लाख की कार भी खरीदी।

अविनाश ने एक दोस्त को लगभग 2.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए और उसी व्यक्ति को एक महंगा मोबाइल फोन भी तोहफे में दिया। भाई अभिषेक शुक्ला के नाम पर 2024 में खरीदी गई जमीन की जांच कर रहे हैं। पैसे की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शुक्ला के पास से अब तक कुल 20.39 लाख नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर, सोने के गहने, चांदी के आभूषण भी मिले हैं।

हुंडियों की चाबियां बिना लिखित आदेश के टिन्नू के पास मिलीं

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के मंदिर की हुंडियों की चाबियों और पहुंच संबंधी व्यवस्थाओं का नियंत्रण था। रिपोर्ट के अनुसार, इसी व्यक्ति की सिफारिश पर मनीष कुमार यादव को गणना कार्य में लगाया गया, जो बाद में चोरी के मामलों में संलिप्त पाया गया। एसआईटी ने इसे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक माना है।

सैलरी 20 हजार, बैंक खातों में लाखों जमा

जांच में आरोपितों और उनके परिजनों के बैंक खातों का भी परीक्षण किया गया। एसआईटी के अनुसार, इन कर्मियों का मासिक वेतन करीब 20 हजार रुपये था, लेकिन उनके खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा, एफडी, दूसरे लेन-देन मिले, जो उनकी घोषित आय से मेल नहीं खाते। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि चोरी की रकम बैंक खातों और संपत्तियों में खपाई गई हो सकती है। इसकी भी विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है।

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