पाकिस्तानी पीएम ने माना- नूर खान एयरबेस पर हमला हुआ था, जम्‍मू-कश्‍मीर में कड़ी सुरक्षा  

पाकिस्तानी पीएम ने माना- नूर खान एयरबेस पर हमला हुआ था, जम्‍मू-कश्‍मीर में कड़ी सुरक्षा  

नई दिल्‍ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत की ओर से नूर खान एयरबेस पर हमला करने की बात मान ली है। उन्होंने शुक्रवार रात कहा कि 10 मई की रात लगभग 2:30 बजे जनरल आसिम मुनीर ने उन्हें सेफ लाइन पर फोन कर बताया कि भारत की बैलिस्टिक मिसाइलों ने नूर खान एयरबेस और कुछ अन्य इलाकों को निशाना बनाया है।

प्रधानमंत्री शरीफ ने दावा किया कि पाकिस्तान की वायुसेना ने देसी तकनीक और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर देश को बचाया। चीन से मिले जेट्स की आधुनिक टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया। इधर, भारत के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि 9 और 10 मई की रात पाकिस्तान की तरफ से हुए हमले को भारत के एयर डिफेंस सिस्टम आकाशतीर ने नाकाम किया था। यह पूरी तरह से स्वदेशी डिफेंस सिस्टम है। यह तीनों सेनाओं के पास मौजूद है।

सेंट्रल और नॉर्थ कश्मीर में कई जगहों पर छापेमारी

शनिवार को जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने सेंट्रल और नॉर्थ कश्मीर के कई इलाकों में छापेमारी की। यह कार्रवाई आतंक से जुड़े मामलों की जांच के सिलसिले में की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक ये छापे सोपोर, बारामुला, हंदवाड़ा, गांदरबल और श्रीनगर में चल रहे हैं। एजेंसी को कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी, जिसके बाद यह कार्रवाई शुरू की गई।

अजमेर में तुर्किये और पाकिस्तान के फल बैन

अजमेर के एक सेब व्यापारी अर्जुन ने बताया कि भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बाद पाकिस्तान और तुर्किये से आने वाले सेब और कीवी जैसे फलों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि अब लोग तुर्किये की जगह कश्मीरी सेब खरीद रहे हैं।

कटरा से संगलदान के बीच रेल ट्रैक पर सुरक्षा बढ़ाई गई

कटरा से संगलदान तक के रेल ट्रैक की नई सुरक्षा जांच पूरी हो गई है। अब कुछ संवेदनशील इलाकों में ज्यादा सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस (GRP) जवान तैनात किए जा रहे हैं। यह कदम 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उठाया गया है।

ट्रैक पर पहले से सुरक्षा थी, लेकिन अब सुरंगों, पुलों और खुले इलाकों की निगरानी और बढ़ाई जा रही है। चिनाब नदी और अंजी खड्ड पर बने बड़े पुलों पर भी और CCTV कैमरे लगाए गए हैं। रियासी के बाद कुछ जगहें सुनसान हैं, इसलिए वहां ज्यादा जवान लगाए जा रहे हैं।

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