देश-दुनिया, राजनीति

पाकिस्तान ने आसिम मुनीर के लिए बदला संविधान, पहली बार बनेंगे तीनों सेनाओं के प्रमुख

पाकिस्तान ने आसिम मुनीर के लिए बदला संविधान, पहली बार बनेंगे तीनों सेनाओं के प्रमुख

इस्‍लामाबाद: पाकिस्तान की संसद ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर को तीनों सेनाओं का प्रमुख बनाने के लिए संविधान में बदलाव किया है। अब उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) बनाया जाएगा। यह भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की तरह होगा। यह नया पद इसलिए बनाया गया है ताकि सेना, नौसेना और वायुसेना आपस में मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें और तीनों की कमान एक जगह से संभाली जा सके।

इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस साल 20 मई को पाकिस्तानी सरकार ने आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा दिया था। मुनीर से पहले सन् 1959 में सैन्य तानाशाह अयूब खान ने खुद को फील्ड मार्शल घोषित कर दिया था। फील्ड मार्शल पाकिस्तान सेना में सर्वोच्च सैन्य रैंक है, जो एक फाइव स्टार रैंक मानी जाती है। यह रैंक जनरल (फोर स्टार) से ऊपर है। पाकिस्तान में फील्ड मार्शल का पद सेना, नौसेना और वायुसेना में सबसे ऊंचा होता है।

संसद में 27वां संशोधन विधेयक पास

  • पाकिस्तान की संसद में शनिवार को 27वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया, जिसे पास कर दिया गया है। यह संविधान के अनुच्छेद 243 में बदलाव से जुड़ा है। इसमें आर्म्ड फोर्स से जुड़े 5 बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
  • राष्ट्रपति अब प्रधानमंत्री की सलाह पर आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, दोनों की नियुक्ति करेंगे।
  • थलसेना प्रमुख को ही चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद भी दिया जाएगा।
  • नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री की सलाह से चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज इसके मुखिया की नियुक्ति करेंगे। इस कमांड का नेतृत्व पाकिस्तान आर्मी का अधिकारी करेगा।
  • सरकार को अब अधिकारियों को फील्ड मार्शल, एयर फोर्स मार्शल और एडमिरल ऑफ द फ्लीट जैसे विशेष रैंक देने की मंजूरी होगी। इनमें से फील्ड मार्शल का पद आजीवन रहेगा।
  • मौजूदा चेयरमैन, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का पद 27 नवंबर 2025 के बाद खत्म हो जाएगा

एक संवैधानिक अदालत बनाने का प्रावधान

27वां संशोधन सिर्फ सेना से जुड़ा नहीं है। इसके जरिए कुछ और बड़े बदलाव भी किए जा रहे हैं। इनमें फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट की स्थापना, हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार, प्रांतीय कैबिनेट (राज्य मंत्रिमंडल) के गठन के नियमों में बदलाव और प्रांतों को मिलने वाली राजस्व हिस्सेदारी में बदलाव भी शामिल हैं। फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट यानी संवैधानिक अदालत संविधान संशोधन का एक अहम प्रस्ताव है। यह अदालत खास तौर पर संविधान से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। जैसे कि केंद्र और प्रांतीय सरकारों के बीच विवाद, कानूनों की संवैधानिक वैधता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मामले।

अभी पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ही ऐसे मामलों की सुनवाई करता है, लेकिन नई अदालत बनने के बाद संवैधानिक मामलों की जिम्मेदारी अलग अदालत को मिल जाएगी। इससे सुप्रीम कोर्ट का बोझ कम होगा और संवैधानिक मुद्दों पर तेजी से फैसला हो सकेगा।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *