इंदौर में दूषित पानी पीने से मासूम समेत नौ लोगों की मौत, दो अधिकारी सस्‍पेंड और एक की सेवा समाप्‍त

इंदौर में दूषित पानी पीने से मासूम समेत नौ लोगों की मौत, दो अधिकारी सस्‍पेंड और एक की सेवा समाप्‍त

इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक नौ लोगों की मौत की खबर है। मौतों का सिलसिला सप्ताहभर से जारी था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मरीजों का इलाज करने के बजाए मौतें छुपाता रहा। लोग बीमार होकर अस्पतालों में पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने मामले को दबाए रखा। बस्ती में सप्ताहभर में नौ मौतें हो चुकी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने तीन मौतों की पुष्टि डायरिया के कारण होने वाली मौत से की है।

वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतक के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्‍होंने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई घटना बेहद दु:खद है। मैंने अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। पेयजल के संक्रमित या दूषित होने के कारण नागरिकों का स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति पर नजर रखने के लिए कहा है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि पीड़ितों को आवश्यक दवाइयां, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और सभी जरूरी संसाधन तत्काल उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि किसी भी मरीज को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

कलेक्‍टर बोले- लगातार रखी जा रही निगरानी

कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि इंदौर जिला प्रशासन द्वारा सतत निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य अमला पूरी तत्परता के साथ उपचार में जुटा हुआ है। घटना के कारण पता करने के लिए विस्तृत जांच करवाई जा रही है।

वहीं, भास्‍कर के मुताबिक बुधवार को जिन चार लोगों की जान गई है, उनमें गोमती रावत (50), उमा कोरी (31), संतोष बिगोलिया और अवन्या साहू (5 माह) शामिल हैं। दोनों महिलाएं भाऊ गली, भागीरथपुरा की रहने वाली थीं। गोमती रावत की मौत 26 दिसंबर को हुई थी। इससे पहले मंगलवार को नंदलाल पाल (75), उर्मिला यादव (69), उमा कोरी (31), मंजुला पति दिगंबर (74) और सीमा प्रजापत (50) की मौत की जानकारी सामने आई थी।

मरीजों का इलाज मुफ्त, पूरा खर्च शासन वहन करेगा

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव और सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र के सभी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वहां से आने वाले मरीजों से इलाज का कोई शुल्क न लिया जाए। मरीजों के इलाज का खर्च शासन वहन करेगा।

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार, 2703 घरों का सर्वे किया गया और करीब 12,000 लोगों की जांच हुई। 1146 मरीजों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 111 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 18 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। भागीरथपुरा की 15 गलियों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा घर-घर जांच और उपचार किया गया। गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा क्लोरीन, जिंक टैबलेट और ओआरएस बांटे जा रहे हैं।

क्षेत्र में 4 एम्बुलेंस तैनात, डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई

लक्षण दिखने पर फौरन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने, उबला पानी पीने और बाहर का भोजन व कटे फल न खाने की सलाह दी जा रही है। क्षेत्र में 4 एम्बुलेंस तैनात हैं। इसके अलावा, 14 डॉक्टर, 24 एमपीडब्ल्यू और पैरामेडिकल स्टाफ और एमवाय हॉस्पिटल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर भी सहयोग कर रहे हैं। रात में भी डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है।

अब तक इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले और प्रभारी सहायक अभियंता (पीएचई) योगेश जोशी निलंबित किया गया है। जबकि, प्रभारी डिप्टी इंजीनियर (पीएचई) शुभम श्रीवास्तव की सेवा समाप्त कर दी गई। इसके अलावा, मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष IAS नवजीवन पंवार बनाए गए हैं। समिति में सुपरिटेंडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय शामिल हैं।

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