नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान मंगलवार (18 नवंबर) को हिंदू राष्ट्र को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत और हिंदू एक ही हैं। भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है। हमारी सभ्यता पहले से ही इसे जाहिर करती है। भागवत ने कहा कि जो भी भारत पर गर्व करता है, वह हिंदू है। हिंदू सिर्फ धार्मिक शब्द नहीं बल्कि एक सभ्यतागत पहचान है, जो हजारों साल की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी है।
भागवत ने यह भी उल्लेख किया कि RSS का उद्देश्य किसी के खिलाफ संघर्ष करना नहीं, बल्कि चरित्रवान और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण करना है, ताकि राष्ट्र को मजबूत और समृद्ध दिशा में आगे बढ़ाया जा सके। आरएसएस चीफ सोमवार को तीन दिवसीय यात्रा के लिए असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंचे। आज बुधवार को भागवत एक युवा सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इसके बाद 20 नवंबर को मणिपुर के लिए रवाना होंगे।
सभी लोगों को मिलकर काम करना चाहिए
असम में डेमोग्राफिक चेंज पर मोहन भागवत ने कहा, हमें आत्मविश्वास, सतर्कता और अपनी जमीन-संस्कृति से मजबूत लगाव रखना चाहिए। साथ ही कहा कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर निस्वार्थ भाव से काम करना चाहिए। पूर्वोत्तर को उन्होंने भारत की एकता में विविधता का बेहतरीन उदाहरण बताया। कहा कि लचित बोरफुकन और श्रीमंत शंकरदेव जैसे व्यक्तित्व सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व रखते हैं। सभी भारतीयों को प्रेरित करते हैं।
राष्ट्र निर्माण में युवा योगदान दें
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में RSS के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि विविधताओं से भरे देश को एक सूत्र में पिरोकर रखना ही संघ का वास्तविक मूल है। उन्होंने असम में बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप पर चिंता जताते हुए अवैध घुसपैठ पर कड़ी निगरानी, संतुलित जनसंख्या नीति और हिंदू परिवारों के लिए तीन बच्चों के मॉडल की आवश्यकता पर जोर दिया।
युवाओं को संबोधित करते हुए भागवत ने इंटरनेट और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने की सलाह दी, जिससे गलत जानकारी व तनाव पैदा करने वाली गतिविधियों से समाज सुरक्षित रह सके।