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Shailendra Singh
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भारत में मुसलमानों-ईसाइयों के पूर्वज भी हिंदू, वे इसे भूले या भुला दिया गया: भागवत
बेंगलुरु: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम ‘100 साल का संघ: नए क्षितिज’ में शामिल हुए। इसमें उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा हिंदू संस्कृति है। संघ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि समाज की सेवा और संगठन के लिए काम करता है। इस मौके पर आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और कई सामाजिक हस्तियां मौजूद थीं।
आरएसएस चीफ ने कहा कि भारत में सभी हिंदू है। यहां के सभी मुसलमान और ईसाई भी उन्हीं पूर्वजों के वंशज हैं। शायद वे भूल गए हैं या उन्हें भुला दिया गया है। भारत में कोई अहिंदू नहीं है। उन्होंने कहा, संघ सत्ता या प्रमुखता नहीं चाहता। संघ का उद्देश्य सिर्फ एक है कि समाज को संगठित कर भारत माता की महिमा बढ़ाना। पहले लोग इस बात पर विश्वास नहीं करते थे, लेकिन अब करते हैं।
मोहन भागवत की 5 बड़ी बातें
- भारत को ब्रिटिशों ने नहीं बनाया, यह प्राचीन राष्ट्र है- हमारा राष्ट्र ब्रिटिशों की देन नहीं है। हम सदियों से एक राष्ट्र हैं। दुनिया के हर देश की एक मूल संस्कृति होती है। भारत की मूल संस्कृति क्या है? कोई भी परिभाषा दें, वह आखिर में ‘हिंदू’ शब्द पर ही पहुंचती है।
- हिंदू होना मतलब भारत के प्रति जिम्मेदारी लेना- भारत में कोई ‘अहिंदू’ नहीं है। हर व्यक्ति चाहे जाने या न जाने, भारतीय संस्कृति का पालन करता है। इसलिए हर हिंदू को यह समझना चाहिए कि हिंदू होना मतलब भारत के प्रति जिम्मेदारी लेना है।”
- भारत एक हिंदू राष्ट्र होना संविधान के खिलाफ नहीं- भारत का हिंदू राष्ट्र होना किसी बात के विरोध में नहीं है। यह हमारे संविधान के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके अनुरूप है। संघ का लक्ष्य समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं।
- संघ ने विरोध झेला, लेकिन रुका नहीं- संघ के 100 साल पूरे होने तक का सफर आसान नहीं रहा। संघ पर दो बार प्रतिबंध लगा, तीसरी बार कोशिश हुई। स्वयंसेवकों की हत्या हुई, हमला हुआ, लेकिन संघ के कार्यकर्ता बिना स्वार्थ के काम करते रहे।
- संघ हर गांव और हर वर्ग तक पहुंचेगा- संघ का लक्ष्य अब हर गांव, हर जाति और हर वर्ग तक पहुंचना है। दुनिया हमें विविधता में देखती है, लेकिन हमारे लिए यह विविधता एकता की सजावट है। हमें हर विविधता तक पहुंचना है और समाज को एक सूत्र में जोड़ना है।



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