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सरकारी कर्मचारियों को SIR ड्यूटी निभानी होगी, ज्यादा बोझ हो तो और स्टाफ बढ़ाएं: सुप्रीम कोर्ट

सरकारी कर्मचारियों को SIR ड्यूटी निभानी होगी, ज्यादा बोझ हो तो और स्टाफ बढ़ाएं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्‍ली: देश की शीर्ष अदालत ने गुरुवार (04 दिसंबर) को कहा कि राज्य सरकारों या राज्य चुनाव आयोगों की ओर से नियुक्त कर्मचारियों को एसआईआर (SIR) की ड्यूटी निभानी होगी। अगर किसी के पास ड्यूटी से छूट मांगने का कोई खास कारण है, तो राज्य सरकार उनकी अपील पर विचार करके उनकी जगह दूसरे कर्मचारी को नियुक्त कर सकता है।

भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारी SIR सहित दूसरे वैधानिक कामों को करने के लिए बाध्य हैं। राज्य सरकारों का भी कर्तव्य है कि वे चुनाव आयोग (EC) को कर्मचारी उपलब्ध कराएं।

काम का बोझ ज्‍यादा है तो स्‍टाफ बढ़ाएं

उच्‍चतम न्‍यायालय ने कहा कि अगर SIR काम में लगे बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) के पास काम का बोझ ज्यादा है, तो राज्यों को और स्टाफ को काम पर लगाना चाहिए। बेंच ने कहा कि इससे BLO के काम के घंटे कम करने में मदद मिलेगी और पहले से ही नियमित काम के अलावा SIR कर रहे अधिकारियों पर दबाव कम होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी साउथ एक्टर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। TVK की याचिका में कोर्ट से EC को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वह समय पर काम पूरा नहीं करने वाले BLO के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करे।

कोर्ट रूम लाइव

TVK वकील गोपाल शंकरनारायणन: हमारे पास 35 से 40 BLO की जानकारी है, जिन्होंने आत्महत्या की है। ये सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षक हैं। इन्हें धारा 32 ROPA के तहत नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि अगर वे समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं करेंगे, तो उन्हें 2 साल की जेल होगी। उत्तर प्रदेश में BLO के खिलाफ 50 FIR दर्ज की गई हैं। उन्हें (चुनाव आयोग) इस पर गर्व है।

CJI सूर्यकांत: देखिए, यह कानूनी प्रक्रिया है तो इसे करना ही होगा।

TVK वकील गोपाल शंकरनारायणन: तमिलनाडु में एक लड़के को शादी करनी थी, लेकिन उसे छुट्टी नहीं मिली और उसने आत्महत्या कर ली।

CJI सूर्यकांत: कोई बीमार हो सकता है। मौत के अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं…

TVK वकील गोपाल शंकरनारायणन: लेकिन चुनाव अधिकारी उनका बॉस होता है और वे चुनाव आयोग को रिपोर्ट करते हैं। राज्य इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं।

CJI सूर्यकांत: राज्य सरकारें इन कर्मचारियों को तैनात करती हैं। इसलिए हम राज्यों को बता सकते हैं कि जहां भी कर्मचारियों को समस्या हो रही है, उनकी जगह किसी और को नियुक्त किया जा सकता है।

CJI सूर्यकांत: राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नियुक्त कर्मचारी, SIR सहित, वैधानिक कर्तव्यों को पूरा के लिए चुनाव आयोग के अधीन हैं। अगर उन्हें कोई समस्या आ रही है, तो राज्य सरकार उनकी कठिनाई को दूर कर सकती है, जिसके लिए हम ये 3 निर्देश जारी करते हैं।

  1. राज्य अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति करे ताकि काम के घंटे कम किए जा सकें।
  2. जहां किसी व्यक्ति के पास ड्यूटी से छूट मांगने के लिए कोई खास कारण हो, राज्य सरकार ऐसी अपील विचार करेगी और उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त करेगी।
  3. अगर कर्मचारियों के किसी दिक्कत का समाधान नहीं हो पाता है, तो पीड़ित व्यक्ति कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

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