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Shailendra Singh
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मानव रहित इंटेलिजेंस मशीन गन से सुरक्षित होंगी देश की सीमाएं, ITM GIDA के स्टूडेंट्स ने की तैयार
गोरखपुर: देश की सुरक्षा करना ही महत्वपूर्ण काम है, जिसके लिए हमारे जवान सरहदों पर दिन-रात अपनी नजरें गढ़ाए रखते हैं। ऐसे में अगर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर ऐसा हथियार बना दिया जाए, जो दुश्मनों से अपने आप सरहदों की सुरक्षा कर सके तो बहुत ही अच्छी उपलब्धि होगी। इसी दिशा में कदम बढ़ाया है गोरखपुर आईटीएम (इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट) गीडा के स्टूडेंट्स ने।
आईटीएम गीडा के बीटेक और बीसीए ब्रांच के सात स्टूडेंट्स दीपा पाण्डेय, अंजलि गुप्ता, आरुषि श्रीवास्तव, मेराज हुसैन, अंशित श्रीवास्तव, आदित्य मद्धेशिया और अदनान खान ने कॉलेज के इन्नोवेशन सेल टीम के साथ मिलकर एक नई और अत्याधुनिक इंटेलिजेंस मशीन गन (मानव रहित इंटेलिजेंस गन) का निर्माण किया है, जो सीमा सुरक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। इस मशीन गन को विशेष रूप से बॉर्डर पर दुश्मनों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।
मानव रहित इंटेलिजेंस मशीन गन के फायदे
यह मानव रहित इंटेलिजेंस मशीन गन न केवल स्वचालित रूप से काम करेगी, बल्कि दुश्मन के हमलों का जवाब तेजी से और प्रभावी तरीके से देने में सक्षम होगी। इस नई तकनीक का मुख्य उद्देश्य सीमा सुरक्षा को और मजबूत करना है, जिससे देश की रक्षा में कोई कोताही न हो। इस मशीन गन में लगे नाइट विजन कैमरे से बॉर्डर एरिया में रात के अंधेरे में भी दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने और उस पर कार्रवाई करने की क्षमता प्रदान होती है। इसके जरिए दुश्मन की गतिविधियों को पहचान कर उन्हें तुरंत नष्ट किया जा सकता है, जिससे सीमा पर किसी भी प्रकार के खतरों से निपटना आसान हो सकता है।

आईटीएम गीडा के छात्रों ने इस प्रोजेक्ट पर कड़ी मेहनत की और कई महीनों तक रिसर्च व परीक्षण के बाद यह तकनीक तैयार की है। छात्रों ने इस इंटेलिजेंस मशीन गन के मॉडल का सफल परीक्षण किया, जो दूर से दुश्मन पर नजर रखने में सक्षम है। भविष्य में भारतीय सुरक्षा बलों के पास एक नया और प्रभावी उपकरण होगा, जो बॉर्डर पर दुश्मनों से मुकाबला करने में मदद करेगा। इसके अलावा इस तकनीक का इस्तेमाल अन्य सुरक्षा बलों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर भी किया जा सकता है।
एक महीने में तैयार की गई मानव रहित इंटेलिजेंस मशीन गन
मॉडल में मानव रहित इंटेलिजेंस मशीन गन वजन करीब 65 किलोग्राम है। इसमें 20एमएम के सात मेटल के बैरल लगे हैं, जिन्हें ऑटो या मैनुअल मोड पर भी किया जा सकता है। ऑटो मोड में इसमें लगे ह्यूमन मोशन सेंसर दुश्मन को दूर से ही भाप कर निशाना साध कर गोलियां दाग सकते हैं और इसे दूर से भी रिमोट या मोबाइल से संचालित किया जा सकता है। इस वायरलेस तकनीक से दुश्मन की नजर में आए बिना उन पर गोलियां दागी जा सकती हैं। छात्र अंशित और आदित्य ने बताया कि प्रोजेक्ट को तैयार करने में एक महीने का समय लगा।

आईटीएम गीडा के निदेशक डॉ. एनके सिंह ने छात्रों की इस सफलता को लेकर उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि छात्रों की उचित सहायता व मार्गदर्शन के लिए उनके द्वारा किए गए प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी रक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगी, जिससे छात्रों के मानव रहित इंटेलिजेंस मशीन गन प्रोजेक्ट को सही मार्गदर्शन मिल सके।



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