मायावती का पोस्‍ट, बोलीं- पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा पर सख्त कदम उठाए सरकार

मायावती का पोस्‍ट, बोलीं- पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा पर सख्त कदम उठाए सरकार

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X पर पोस्‍ट करते हुए कहा कि पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक, आर्थिक हालात को लेकर सदन से लेकर सड़कों तक हो रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर कहा कि इसे सूझबूझ से टाला जा सकता है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि मेडिकल (NEET) जैसी अखिल भारतीय परीक्षाओं से लेकर विभिन्न राज्यों की भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली और पेपर लीक के कारण युवा व बेरोजगार गंभीर तनाव में हैं। लगातार रद्द होती परीक्षाओं से परेशान युवा अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। यह सीधे तौर पर जनहित से जुड़ा अति-संवेदनशील मामला है। सरकार को स्थिति पर काबू पाने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने होंगे।

उच्च पदों पर बैठे अफसरों की तय हो जवाबदेही

मायावती ने कहा कि देश की नींव युवा पीढ़ी के भविष्य को अंधकार में जाने से बचाने के लिए केवल छोटी मछलियों पर नहीं, बल्कि परीक्षा कराने वाली संस्थाओं के उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी तय की जाए। गड़बड़ी में शामिल बड़े अफसरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।

उन्‍होंने कहा कि यूपी, राजस्थान और दिल्ली समेत देशभर में अच्छे सरकारी स्कूलों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव के चलते प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग सेंटरों का जाल तेजी से फैला है। जबरदस्त महंगाई के बावजूद आम परिवार पेट काटकर अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। युवा आउटसोर्सिंग की शोषणकारी नौकरियों के बजाय सम्मानजनक और स्थायी रोजगार पाना चाहते हैं।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कोचिंग सेंटरों पर निगरानी जरूरी

मायावती ने कहा कि सरकारें कोचिंग संस्थानों पर कड़ी और पारदर्शी निगरानी रखें। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक पूरी सरकारी व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए। केवल जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों से काम नहीं चलेगा; जब तक शिक्षा पर सही बजट और गुणवत्तापूर्ण दृष्टिकोण नहीं होगा, तब तक देश का भविष्य संवरना मुश्किल है।

यूपी और पूरे देश का विकास संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की सोच के अनुरूप ‘शिक्षित, सुरक्षित और कल्याणकारी भारत’ के आधार पर होना चाहिए। सरकारों को इन बुनियादी मुद्दों पर समय रहते ध्यान देना होगा। सरकार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं व संगठनों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाकर सही समाधान निकालना चाहिए। तभी जनता और युवा पीढ़ी को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

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