SRMS मेडिकल कॉलेज का चिकित्सा सेवा में 25वें वर्ष में प्रवेश, आदित्य मूर्ति ने दी जानकारी
बरेली: न्यूनतम खर्च पर विश्वस्तरीय इलाज लेना हो तो आज सभी के जेहन में एक ही नाम आता है और वह है- एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज। साल-दर-साल एसआरएमएस में बढ़ती मरीजों की संख्या, इस पर बढ़ते विश्वास को बयान करने के लिए काफी है और यही मरीजों का विश्वास इसकी उपलब्धि है। इमरजेंसी और गंभीर बीमारियों में बरेली और आसपास के मरीज दिल्ली या लखनऊ जाने के बजाय उपचार के लिए एसआरएमएस आते हैं। स्वस्थ होकर घर वापस जाते हैं। यह भरोसा किसी उपलब्धि से कम नहीं। इसी विश्वास और उपलब्धियों के सहारे एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज 04 जुलाई, 2026 को स्वास्थ्य सेवा में 24वीं वर्षगांठ बनाने के साथ ही 25वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन आदित्य मूर्ति कहते हैं कि हमने पहले दिन से ही हेल्थ फॉर आल, हॉस्पिटल फार आल को अपना आदर्श बनाया। हम सभी मरीजों को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। यही वजह है कि एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज पर बरेली और आसपास के मरीजों के साथ ही उत्तराखंड के लोगों का भी भरोसा बढ़ा है। यह विश्वास हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। इन 24 वर्षों में मरीजों के विश्वास के साथ ही एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज ने कई उपलब्धियां भी हासिल की हैं। इनमें 100 बेड का आरआर कैंसर इंस्टीट्यूट, इनफर्टिलिटी सेंटर, अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ 110 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट का स्थापित होना अहम है।
24वीं वर्षगांठ पर चार दिवसीय युवा स्वास्थ्य मेला में निशुल्क जांचें
आदित्य मूर्ति बताते हैं कि अपने स्थापना दिवस पर प्रति वर्ष एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य मेला आयोजित किया जाता है। इस वर्ष स्वास्थ्य के प्रति विशेषकर युवाओं को जागरूक करने के लिए यह चार दिवसीय मेला आयोजित किया जाएगा। इस दौड़ती भागती जिंदगी में स्वास्थ्य के प्रति युवा वर्ग ही सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य मेला इन्हीं युवाओं के सुपुर्द है। जिसमें युवाओं की बीपी, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, ईसीजी, स्पाइरोमैट्री, फाइब्रोस्कैन, लिपिड प्रोभाइल, डीएसएच (थायराइड), एचबीएवनसी, केएफटी (किडनी टैस्ट), पैप स्मेयर, बीएमडी जैसी जांचें नि:शुल्क की जाएंगी। इसके साथ ही युवाओं को सीबीसी, एलएफटी, टीएमटी, इको, एलबीसी, सीटी कार्डियक एंजियोग्राफी, एंडोस्कोपी, ब्रोंकोस्कोपी, लैरेंजोस्कोपी, ऑडियोमैट्री, रेटिना की जांच (ओसीटी), एनसीवी, ईईजी, डैक्सा स्कैन और मैनोमैट्री जैसी जांचों पर 50 फीसद की छूट प्रदान की जाएगी।
इसके साथ ही जीवनशैली संबंधी बीमारियों के प्रति युवाओं को जागरुक करने के लिए उऩके बारे में जानकारी भी दी जाएगी। जिसमें संतुलित भोजन, फिजिकल एक्टिविटी, योग, मोटापा, बीएमआई, डायबिटीज, थायराइड, हाईपरटेंशन, कोलेस्ट्राल और हार्ट डिजीज, मेंटल हेल्थ और स्ट्रेस मैनेजमेंट, मोबाइल एडिक्शन और स्क्रीन टाइम, स्वस्थ जीवन के लिए नींद, कैंसर के प्रारंभिक लक्षण, फैटी लिवर, किडनी समस्याएं और नियमित हेल्थ चेकअप जैसे विषयों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओर से जानकारी दी जाएगी।
9 वर्ष से लगातार देश के टॉप 40 मेडिकल कॉलेजों में एसआरएमएस
आदित्य मूर्ति कहते हैं कि मेडिकल शिक्षा में देश में तेजी से उभर रहा एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज पिछले आठ वर्षों से इंडिया टुडे के सर्वेक्षण में देश के टॉप 40 मेडिकल कॉलेजों में स्थान हासिल किए हुए है। इंडिया टुडे ने वर्ष 2024 के अपने सर्वेक्षण में देश के सरकारी और निजी सभी 783 मेडिकल कॉलेजों में एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज को 38वें स्थान पर बरकरार रखा है। ‘आउटलुक हेल्थकेयर रैंकिंग्स 2026’ में भारत के प्रमुख हेल्थकेयर संस्थानों में एसआरएमएस मेडिकल कालेज को उत्तर प्रदेश में दूसरे सबसे अच्छे मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का दर्जा मिला है। इसी माह पहले सप्ताह में जारी इस सर्वे में एसआरएमएस मेडिकल कालेज के आर्थोपैडिक विभाग (जॉइंट रिप्लेसमेंट और स्पोर्ट्स इंजरी विभाग) को 14वीं रैंक दी गई, जबकि यहां के ऑन्कोलॉजी हॉस्पिटल (RR कैंसर इंस्टीट्यूट और रिसर्च सेंटर) को 17वीं रैंक मिली।
देश के सबसे अच्छे कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल में एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग को 21वां स्थान मिला। ये सम्मान हमारे मरीज़ों के साथ-साथ हमारे उन डॉक्टरों, नर्सों, हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स और सपोर्ट टीमों के भी हैं, जो हर दिन सहानुभूतिपूर्ण, किफायती और वर्ल्ड-क्लास देखभाल देने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
क्षेत्र में बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने वाला एसआरएमएस इकलौता संस्थान
श्रीराम मूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज) में रुहेलखंड और कुमायूं रीजन का पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में पिछले माह बनबसा (उत्तराखंड) निवासी 47 वर्षीय कमला का सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ। इससे एक वर्ष से ज्यादा समय से मल्टीपल मायलोमा (एक प्रकार ब्लड कैंसर) की वजह से पीठ दर्द से परेशान कमला को तकलीफ से निजात मिली। साथ ही लखनऊ और दिल्ली के बीच बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने वाला एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज पहला संस्थान भी बन गया।
रुहेलखंड और कुमायूं रीजन का सर्वश्रेष्ठ रोबोटिक सेंटर बना एसआरएमएस
तीन वर्ष पहले एसआरएमएस मेडिकल कालेज में रोबोटिक सर्जरी आरंभ हुई। रोबोटिक सर्जरी का उपयोग कई प्रकार के सर्जिकल ऑपरेशनों में होता है। इनमें पित्त की थैली की सर्जरी, सभी प्रकार की हर्निया, छोटी और बड़ी आंत की सर्जरी, छोटी और बड़ी आंत का कैंसर, प्रोलेप्स रेक्टम, गर्भाशय के सभी प्रकार के ऑपरेशन, अंडेदानी की सर्जरी, यूटेराइन प्रोलैप्स, प्रोस्टेट के सभी ऑपरेशन, प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी, घुटने और कूल्हे की सर्जरी, गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी, बैरियाट्रिक सर्जरी, लिवर सर्जरी, यूरो सर्जरी, हृदय की बाईपास सर्जरी, वाल्व रिप्लेसमेंट, आंखों की सर्जरी और न्यूरो सर्जरी की जाती है। इतने कम समय में एसआरएमएस में 150 से ज्यादा रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक हो गई हैं।
देश का प्रमुख कैंसर सेंटर है एसआरएमएस का आरआर कैंसर इंस्टीट्यूट
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज स्थित ओंकोलॉजी विभाग अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है। इसे आरआर कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के रूप में जाना जाता है। कैंसर के मरीजों की प्रारंभिक अवस्था में जांच और उपचार के लिए यह 30 सितंबर, 2008 को स्थापित हुआ। कैंसर के उपचार के लिए सर्जिकल, रेडिएशन, मेडिकल ओंकोलॉजी जैसी सभी सुविधाएं यहां एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। कैंसर रोगियों की निगरानी के लिए यहां पर ट्यूमर बोर्ड संचालित है। यहां ब्रेकीथेरेपी के लिए दो हाई एनर्जी लीनियर एस्सेलेटर और 30 चैनल की एचडीआर, लीनियर एस्सेलेटर ट्रूबीम जैसी अत्याधुनिक और महंगी मशीनें उपलब्ध हैं। कैंसर की जांच और इलाज को और भी सुविधाजनक बनाते हुए यहां नए मरीजों के लिए अलग ओपीडी के साथ ही डे केयर कीमोथेरेपी सेंटर भी संचालित है।
अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से होता है इलाज
एसआरएमएस आईएमएस आज लखनऊ और दिल्ली के बीच स्थित पूर्वी उत्तर प्रदेश का अत्याधुनिक संसाधनों से युक्त मल्टी सुपरस्पेशियलिटी हास्पिटल है। प्री क्लीनिकल, पैरा क्लीनिकल और क्लीनिकल डिपार्टमेंट सम्पन्न इस मेडिकल कालेज में रेडियोथेरेपी, कार्डियक साइंसेज, रीनल साइंसेज, न्यूरो साइंसेज और प्लास्टिक सर्जरी विभाग और इनकी ओपीडी भी सफलतापूर्वक संचालित हैं। इन विभागों में सबसे ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिनकी संख्या प्रतिदिन 12 सौ से ज्यादा हो जाती है। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में भी इन्हीं विभागों के 85 फीसद मरीज होते हैं। यहां प्रतिमाह 1200 से ज्यादा मरीज दिल संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंचते हैं। चार सौ से ज्यादा डायलिसिस भी प्रतिमाह एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में की जा रही हैं। 50 से ज्यादा मरीजों की रेडियोथेरेपी और छह सौ से ज्यादा मरीजों की मेजर सर्जरी को यहां सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा रहा है।
एसआरएमएस में ही इलाज क्यों?
- कम समय में 50 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट, सभी सफल
- कोक्लियर इंप्लांट प्रोग्राम से नि:शुल्क कान का ऑपरेशन
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ कार्डियोलॉजी सेंटर
- हाई रिस्क प्रेग्नेंसी निदान और आईवीएफ सेंटर।



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